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ई-अटेंडेंस में ढिलाई पर एक्शन: अब संकुल प्राचार्यों पर गिरेगी गाज, डीईओ और संयुक्त संचालक भी नहीं बचेंगे

Wed, 01 Jul 2026 07:51 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 01 Jul 2026 07:51 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में ई-अटेंडेंस को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। 100 प्रतिशत ई-अटेंडेंस सुनिश्चित किए बिना वेतन बिल पास करने वाले संकुल प्राचार्यों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होगी। वहीं, 2 जुलाई तक कार्रवाई नहीं करने वाले डीईओ और संभागीय संयुक्त संचालकों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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Action against laxity in e-attendance: Cluster principals to face the axe; DEOs and Joint Directors won't be s
डीपीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस को लेकर बड़ी सख्ती दिखाई है। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने बुधवार को सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश जारी कर कहा है कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की 100 प्रतिशत ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने के बावजूद उनके वेतन बिल अग्रेषित किए गए हैं, वहां संबंधित संकुल प्राचार्यों के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई शुरू की जाए। आयुक्त के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पहले भी कई बार निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद प्रदेश में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम बनी हुई है। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ पहले वेतन कटौती के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं होने पर अब कार्रवाई और सख्त कर दी गई है।
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100% ई-अटेंडेंस नहीं तो होगी कार्रवाई
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की 100 प्रतिशत ई-अटेंडेंस सुनिश्चित नहीं की गई और फिर भी उनके वेतन बिल पास किए गए, वहां संबंधित संकुल प्राचार्यों के खिलाफ निलंबन एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को 2 जुलाई तक कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट संचालनालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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डीईओ और संयुक्त संचालकों की भी तय होगी जिम्मेदारी
आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित समयसीमा तक कार्रवाई की रिपोर्ट नहीं भेजी गई तो संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी और संभागीय संयुक्त संचालकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने साफ कर दिया है कि ई-अटेंडेंस नियमों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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पहले वेतन कटौती, अब निलंबन
ई-अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों पर पहले वेतन कटौती की कार्रवाई की गई थी, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। विभाग का मानना है कि शासन के निर्देशों का लगातार उल्लंघन हो रहा है, इसलिए अब जिम्मेदार अधिकारियों और प्राचार्यों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

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शिक्षक संगठन कर रहे विरोध
ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता और 90 प्रतिशत उपस्थिति की शर्त को लेकर शिक्षक संगठन लगातार विरोध जता रहे हैं। उन्होंने सरकार से नियमों में राहत देने की मांग की थी, लेकिन विभाग ने किसी भी प्रकार की छूट देने के बजाय निगरानी और कार्रवाई दोनों को और सख्त कर दिया है।


क्या है ई-अटेंडेंस व्यवस्था
स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए मोबाइल आधारित ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू की है। इसमें शिक्षक को स्कूल पहुंचकर जीपीएस आधारित ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करनी होती है। विभाग इस डेटा की रियल टाइम मॉनिटरिंग करता है। 1 जुलाई से यह व्यवस्था सभी शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कर दी गई है।
 
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