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Bhopal: पेड़ों में जहरीला रसायन डालकर सुखाने का आरोप,तालाबों में सीवेज भी मिला,NGT ने भोपाल निगम पर कसा शिकंजा
Wed, 12 Aug 2026 07:37 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Wed, 12 Aug 2026 07:37 PM IST
सार
भोपाल में पेड़ों को रासायनिक पदार्थ डालकर सुखाने, लोअर लेक में अनुपचारित सीवेज पहुंचने और वेटलैंड क्षेत्र में निर्माण के आरोपों पर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। जांच में सात पेड़ों के तनों में छेद मिले, जिनमें पांच सूखे पाए गए। संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। वेटलैंड में निर्माण की संयुक्त जांच 30 दिन में होगी।
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एनजीटी भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पेड़ों को रासायनिक पदार्थ डालकर नुकसान पहुंचाने, जलस्रोतों में अनुपचारित सीवेज पहुंचने और वेटलैंड क्षेत्र में निर्माण के आरोपों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। 11 अगस्त 2026 को पारित आदेश में भोपाल नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने और नुकसान की पुष्टि होने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तय करने के निर्देश दिए गए हैं। मामला राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर, भोपाल एवं अन्य का है। आवेदक की ओर से अधिवक्ता हरशवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। सुनवाई न्यायमूर्ति शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की।
सात पेड़ों में ड्रिल के छेद, पांच सूखे मिले
शिकायत थी कि लोअर लेक के पूर्ण जलभराव स्तर से 50 मीटर के दायरे में पेड़ों और हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पेड़ों के तनों में छेद कर संदिग्ध रासायनिक एवं जहरीले पदार्थ डालने का आरोप लगाया गया। जांच के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति बनाई गई। समिति ने सिविल लाइंस, प्रोफेसर्स कॉलोनी स्थित हाउस नंबर 12 के पास निजी भूखंड का निरीक्षण किया। यहां सात पूर्ण विकसित पेड़ मिले और सभी के तनों में ड्रिल किए गए छेद पाए गए। इनमें दो हरे और स्वस्थ थे, जबकि पांच सूखे और मुरझाए मिले। तनों पर मिले संदिग्ध निशान और अवशेष रासायनिक पदार्थ के इंजेक्शन की संभावना की ओर संकेत करते हैं। एनजीटी ने नगर निगम और प्रदूषण बोर्ड को जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति या परिसर के स्वामी से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी वसूली जा सकती है।
लोअर लेक में पहुंच रहा अनुपचारित पानी
समिति को बंडगंगा नाले से लोअर लेक में पर्याप्त पानी पहुंचता मिला। करिश्मा पार्क और कुशाभाऊ ठाकरे भवन के सामने वाले नालों में कम प्रवाह मिला, जिन्हें नगर निगम ने मौसमी नाले बताया। बंडगंगा नाले के झील में मिलने वाले स्थान और किनारे पर नगर निगम का ठोस कचरा भी मिला। निगम ने कचरा रोकने के लिए जालीदार अवरोध लगाए जाने की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित क्षेत्र से 8 से 10 एमएलडी अनुपचारित जल निकल रहा है। इसके उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता का सीवेज उपचार संयंत्र प्रस्तावित/निर्माणाधीन है, जिसके दिसंबर 2027 तक शुरू होने की संभावना है। एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नगर निगम के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना करने के निर्देश दिए हैं। क्षतिपूर्ति उल्लंघन की तारीख से लेकर उपचार संयंत्र शुरू होने या पर्याप्त उपचार व्यवस्था होने तक की अवधि के लिए तय की जाएगी।
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वेटलैंड में निर्माण की भी होगी जांच
आवेदन में वेटलैंड नियम, 2017 के उल्लंघन में नए निर्माण किए जाने का आरोप भी लगाया गया। तस्वीरें भी पेश की गईं। प्रतिवादी पक्ष ने तस्वीरों की प्रतियां नहीं मिलने की आपत्ति की, जिस पर एनजीटी ने सभी दस्तावेज संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के सदस्य सचिव को शपथपत्र देकर बताना होगा कि छोटे तालाब में नगर निगम की गतिविधियों में वेटलैंड नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। राज्य वेटलैंड प्राधिकरण, पर्यावरण एवं योजना समन्वय विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि की संयुक्त टीम यह भी जांच करेगी कि कथित निर्माण नए हैं या पुराने और नए होने की स्थिति में क्या वे वेटलैंड नियमों का उल्लंघन करते हैं। रिपोर्ट 30 दिन में दाखिल करनी होगी।
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नगर निगम से मांगा पूरे शहर का जल-सीवेज हिसाब
एनजीटी ने नगर निगम से शहर की आबादी, पानी की जरूरत और आपूर्ति, कुल जल उपयोग, उत्पन्न अनुपचारित पानी और उसकी उपचार क्षमता की जानकारी मांगी है। इसके अलावा छोटे तालाब और बड़े तालाब में अनुपचारित पानी पहुंचाने वाले नालों की संख्या, दोनों जलस्रोतों के आसपास उत्पन्न अनुपचारित पानी, उपलब्ध सीवेज उपचार संयंत्र और उनकी क्षमता तथा तालाबों में वर्तमान में पहुंच रहे अनुपचारित पानी की मात्रा भी बतानी होगी।
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सात पेड़ों में ड्रिल के छेद, पांच सूखे मिले
शिकायत थी कि लोअर लेक के पूर्ण जलभराव स्तर से 50 मीटर के दायरे में पेड़ों और हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पेड़ों के तनों में छेद कर संदिग्ध रासायनिक एवं जहरीले पदार्थ डालने का आरोप लगाया गया। जांच के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त समिति बनाई गई। समिति ने सिविल लाइंस, प्रोफेसर्स कॉलोनी स्थित हाउस नंबर 12 के पास निजी भूखंड का निरीक्षण किया। यहां सात पूर्ण विकसित पेड़ मिले और सभी के तनों में ड्रिल किए गए छेद पाए गए। इनमें दो हरे और स्वस्थ थे, जबकि पांच सूखे और मुरझाए मिले। तनों पर मिले संदिग्ध निशान और अवशेष रासायनिक पदार्थ के इंजेक्शन की संभावना की ओर संकेत करते हैं। एनजीटी ने नगर निगम और प्रदूषण बोर्ड को जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति या परिसर के स्वामी से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी वसूली जा सकती है।
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लोअर लेक में पहुंच रहा अनुपचारित पानी
समिति को बंडगंगा नाले से लोअर लेक में पर्याप्त पानी पहुंचता मिला। करिश्मा पार्क और कुशाभाऊ ठाकरे भवन के सामने वाले नालों में कम प्रवाह मिला, जिन्हें नगर निगम ने मौसमी नाले बताया। बंडगंगा नाले के झील में मिलने वाले स्थान और किनारे पर नगर निगम का ठोस कचरा भी मिला। निगम ने कचरा रोकने के लिए जालीदार अवरोध लगाए जाने की जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार संबंधित क्षेत्र से 8 से 10 एमएलडी अनुपचारित जल निकल रहा है। इसके उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता का सीवेज उपचार संयंत्र प्रस्तावित/निर्माणाधीन है, जिसके दिसंबर 2027 तक शुरू होने की संभावना है। एनजीटी ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नगर निगम के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना करने के निर्देश दिए हैं। क्षतिपूर्ति उल्लंघन की तारीख से लेकर उपचार संयंत्र शुरू होने या पर्याप्त उपचार व्यवस्था होने तक की अवधि के लिए तय की जाएगी।
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वेटलैंड में निर्माण की भी होगी जांच
आवेदन में वेटलैंड नियम, 2017 के उल्लंघन में नए निर्माण किए जाने का आरोप भी लगाया गया। तस्वीरें भी पेश की गईं। प्रतिवादी पक्ष ने तस्वीरों की प्रतियां नहीं मिलने की आपत्ति की, जिस पर एनजीटी ने सभी दस्तावेज संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के सदस्य सचिव को शपथपत्र देकर बताना होगा कि छोटे तालाब में नगर निगम की गतिविधियों में वेटलैंड नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। राज्य वेटलैंड प्राधिकरण, पर्यावरण एवं योजना समन्वय विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि की संयुक्त टीम यह भी जांच करेगी कि कथित निर्माण नए हैं या पुराने और नए होने की स्थिति में क्या वे वेटलैंड नियमों का उल्लंघन करते हैं। रिपोर्ट 30 दिन में दाखिल करनी होगी।
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नगर निगम से मांगा पूरे शहर का जल-सीवेज हिसाब
एनजीटी ने नगर निगम से शहर की आबादी, पानी की जरूरत और आपूर्ति, कुल जल उपयोग, उत्पन्न अनुपचारित पानी और उसकी उपचार क्षमता की जानकारी मांगी है। इसके अलावा छोटे तालाब और बड़े तालाब में अनुपचारित पानी पहुंचाने वाले नालों की संख्या, दोनों जलस्रोतों के आसपास उत्पन्न अनुपचारित पानी, उपलब्ध सीवेज उपचार संयंत्र और उनकी क्षमता तथा तालाबों में वर्तमान में पहुंच रहे अनुपचारित पानी की मात्रा भी बतानी होगी।
