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Bhopal News: भोपाल नगर निगम बैठक में नारी शक्ति वंदन पर मुहर, बैठक में अधूरी महिला भागीदारी पर उठे सवाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 16 Apr 2026 06:36 PM IST
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सार
भोपाल नगर निगम की विशेष बैठक में ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम को सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई, जिसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना गया। हालांकि, इसी मुद्दे पर आयोजित बैठक में कई पार्षद खासकर 10 महिला पार्षद की गैरमौजूदगी ने आयोजन की गंभीरता और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी पर सवाल खड़े कर दिए।
भोपाल नगर निगम परिषद की विशेष बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के लिए बुलाई गई भोपाल नगर निगम परिषद की विशेष बैठक में एक ओर प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया, वहीं दूसरी ओर बैठक में पार्षदों की अधूरी मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। खास बात यह रही कि महिलाओं से जुड़े इस अहम मुद्दे पर आयोजित बैठक में खुद 10 महिला पार्षद अनुपस्थित रहीं।
विशेष बैठक में प्रस्ताव को मिली सर्वसम्मति
आईएसबीटी स्थित निगम मुख्यालय में आयोजित इस विशेष बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने अधिनियम के प्रावधानों पर चर्चा की। एमआईसी सदस्य सुषमा बाविसा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का महापौर मालती राय सहित सभी उपस्थित पार्षदों ने समर्थन किया और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम बताया। बैठक की शुरुआत वंदे मातरम के गायन से हुई और पारित प्रस्ताव को अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
कांग्रेस की आधी मौजूदगी, देरी से पहुंचे पार्षद
बैठक में कांग्रेस की उपस्थिति अधूरी रही। कुल 20 कांग्रेस पार्षदों में से केवल 10 ही शामिल हुए। वंदे मातरम के बाद नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी सहित पांच कांग्रेस पार्षद परिषद हाल में पहुंचे, जिससे विपक्ष की सक्रियता पर सवाल उठे।
यह भी पढ़ें-स्पीड नहीं सही डेटा ज्यादा जरूरी,भोपाल के नए कलेक्टर ने गिनाईं प्राथमिकताएं, प्रशासनिक बदलाव के संकेत
85 में से 18 पार्षद गैरहाजिर
नगर निगम के कुल 85 पार्षदों में से 67 बैठक में मौजूद रहे, जबकि 18 पार्षद पूरी तरह अनुपस्थित रहे। इनमें 10 पार्षद कांग्रेस के थे, जिससे बैठक में विपक्ष की कमजोर मौजूदगी साफ नजर आई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महिलाओं से जुड़े इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान 42 में से 10 महिला पार्षद बैठक में नहीं पहुंचीं। इसके अलावा निगमायुक्त संस्कृति जैन और अपर आयुक्त अंजू अरुण कुमार सहित अन्य महिला अधिकारियों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। हालांकि, जानकारी के अनुसार वे प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यस्त थीं।
यह भी पढ़ें-एक हफ्ते में सुलझेंगी प्रभारियों की समस्याएं,नाराज नेताओं को मनाने घर-घर जाएगी पार्टी
भाजपा-कांग्रेस में तीखी बहस भी हुई
बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि उनकी पार्टी भी महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करती है और पहले भी इस दिशा में प्रयास कर चुकी है। हालांकि उन्होंने परिसीमन को लेकर सवाल उठाए और कहा कि इससे दक्षिण भारत की सीटों पर असर पड़ सकता है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जिसमें कहासुनी तक की स्थिति बन गई।
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विशेष बैठक में प्रस्ताव को मिली सर्वसम्मति
आईएसबीटी स्थित निगम मुख्यालय में आयोजित इस विशेष बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने अधिनियम के प्रावधानों पर चर्चा की। एमआईसी सदस्य सुषमा बाविसा द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का महापौर मालती राय सहित सभी उपस्थित पार्षदों ने समर्थन किया और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम बताया। बैठक की शुरुआत वंदे मातरम के गायन से हुई और पारित प्रस्ताव को अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
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कांग्रेस की आधी मौजूदगी, देरी से पहुंचे पार्षद
बैठक में कांग्रेस की उपस्थिति अधूरी रही। कुल 20 कांग्रेस पार्षदों में से केवल 10 ही शामिल हुए। वंदे मातरम के बाद नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी सहित पांच कांग्रेस पार्षद परिषद हाल में पहुंचे, जिससे विपक्ष की सक्रियता पर सवाल उठे।
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85 में से 18 पार्षद गैरहाजिर
नगर निगम के कुल 85 पार्षदों में से 67 बैठक में मौजूद रहे, जबकि 18 पार्षद पूरी तरह अनुपस्थित रहे। इनमें 10 पार्षद कांग्रेस के थे, जिससे बैठक में विपक्ष की कमजोर मौजूदगी साफ नजर आई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महिलाओं से जुड़े इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान 42 में से 10 महिला पार्षद बैठक में नहीं पहुंचीं। इसके अलावा निगमायुक्त संस्कृति जैन और अपर आयुक्त अंजू अरुण कुमार सहित अन्य महिला अधिकारियों की गैरमौजूदगी भी चर्चा में रही। हालांकि, जानकारी के अनुसार वे प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यस्त थीं।
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भाजपा-कांग्रेस में तीखी बहस भी हुई
बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि उनकी पार्टी भी महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करती है और पहले भी इस दिशा में प्रयास कर चुकी है। हालांकि उन्होंने परिसीमन को लेकर सवाल उठाए और कहा कि इससे दक्षिण भारत की सीटों पर असर पड़ सकता है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली, जिसमें कहासुनी तक की स्थिति बन गई।

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