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Bhopal News: अब दंत सर्जरी में नहीं बदलने पड़ेंगे औजार,एम्स ने बनाया स्वदेशी उपकरण, मिला भारत सरकार का पेटेंट
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 10 Feb 2026 06:26 PM IST
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सार
एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने दंत सर्जरी के लिए एक स्वदेशी बहुउद्देश्यीय शल्य उपकरण विकसित किया है, जिसे भारत सरकार से पेटेंट मिला है। इस उपकरण से सर्जरी के दौरान बार-बार औजार बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे इलाज तेज, सुरक्षित और कम खर्चीला होगा। हल्का और कॉम्पैक्ट होने के कारण यह ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे क्लीनिकों में भी उपयोगी साबित होगा।
एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दंत सर्जरी के दौरान बार-बार औजार बदलने की मजबूरी अब खत्म होने वाली है। एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने दांत और मुंह की सर्जरी के लिए एक ऐसा स्वदेशी बहुउद्देश्यीय शल्य उपकरण तैयार किया है, जिससे एक ही उपकरण से सर्जरी के कई काम किए जा सकेंगे। इस खास उपकरण को भारत सरकार से आधिकारिक पेटेंट मिल गया है। इस उपकरण के मुख्य आविष्कारक डॉ. अंशुल राय हैं। उनके साथ डॉ. बाबूलाल, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. जेनिश भट्टी और डॉ. मोनिका राय ने सह-आविष्कारकों के रूप में योगदान दिया है।
एक उपकरण, कई काम
आमतौर पर दंत इम्प्लांट और माइनर ओरल सर्जरी में अलग-अलग चरणों के लिए कई औजारों की जरूरत पड़ती है। इससे सर्जरी लंबी हो जाती है और जटिलता भी बढ़ती है। एम्स भोपाल का यह नया उपकरण स्विस नाइफ की तरह काम करता है, जिसमें कई सर्जिकल सुविधाएं एक ही ढांचे में मौजूद हैं। इससे डॉक्टरों को बार-बार औजार बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सर्जरी होगी तेज और सुरक्षित
कम औजारों के इस्तेमाल से सर्जरी का समय घटेगा, गलती की संभावना कम होगी और मरीज को कम तकलीफ होगी। सर्जरी जल्दी पूरी होने से मरीजों की रिकवरी भी पहले से तेज हो सकेगी।
ग्रामीण और छोटे क्लीनिकों के लिए वरदान
यह उपकरण हल्का, छोटा और आसानी से ले जाने योग्य है। इसी वजह से यह ग्रामीण इलाकों, छोटे क्लीनिकों, मोबाइल डेंटल यूनिट और निःशुल्क दंत शिविरों में खास तौर पर उपयोगी साबित होगा, जहां ज्यादा आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं होते।
यह भी पढ़ें-मैनिट भोपाल में पढ़ाई का सिस्टम बदला, अब विदेश में पढ़ाई और स्टार्टअप भी बनेंगे डिग्री का हिस्सा
खर्च भी होगा कम
एक ही उपकरण से कई काम होने के कारण महंगे और अलग-अलग औजारों की जरूरत कम पड़ेगी। इससे इलाज की लागत घटेगी और ज्यादा मरीजों तक दंत उपचार पहुंच सकेगा।
यह भी पढ़ें-बोर्ड की परीक्षाएं शुरू, अंग्रेजी का पेपर देने पहुंचे 12वीं विद्यार्थियों ने कहा- सरल रहा पेपर
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि स्वदेशी नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूत करती है। आने वाले समय में यह उपकरण सरकारी अस्पतालों, निजी क्लीनिकों और प्रशिक्षण संस्थानों में दंत सर्जरी की कार्यप्रणाली को नया रूप दे सकता है। एम्स भोपाल लगातार ऐसे नवाचार कर रहा है, जिनसे इलाज सरल, सुरक्षित और आम लोगों की पहुंच में हो सके। यह पेटेंट उसी दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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एक उपकरण, कई काम
आमतौर पर दंत इम्प्लांट और माइनर ओरल सर्जरी में अलग-अलग चरणों के लिए कई औजारों की जरूरत पड़ती है। इससे सर्जरी लंबी हो जाती है और जटिलता भी बढ़ती है। एम्स भोपाल का यह नया उपकरण स्विस नाइफ की तरह काम करता है, जिसमें कई सर्जिकल सुविधाएं एक ही ढांचे में मौजूद हैं। इससे डॉक्टरों को बार-बार औजार बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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सर्जरी होगी तेज और सुरक्षित
कम औजारों के इस्तेमाल से सर्जरी का समय घटेगा, गलती की संभावना कम होगी और मरीज को कम तकलीफ होगी। सर्जरी जल्दी पूरी होने से मरीजों की रिकवरी भी पहले से तेज हो सकेगी।
ग्रामीण और छोटे क्लीनिकों के लिए वरदान
यह उपकरण हल्का, छोटा और आसानी से ले जाने योग्य है। इसी वजह से यह ग्रामीण इलाकों, छोटे क्लीनिकों, मोबाइल डेंटल यूनिट और निःशुल्क दंत शिविरों में खास तौर पर उपयोगी साबित होगा, जहां ज्यादा आधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं होते।
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खर्च भी होगा कम
एक ही उपकरण से कई काम होने के कारण महंगे और अलग-अलग औजारों की जरूरत कम पड़ेगी। इससे इलाज की लागत घटेगी और ज्यादा मरीजों तक दंत उपचार पहुंच सकेगा।
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आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह उपलब्धि स्वदेशी नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूत करती है। आने वाले समय में यह उपकरण सरकारी अस्पतालों, निजी क्लीनिकों और प्रशिक्षण संस्थानों में दंत सर्जरी की कार्यप्रणाली को नया रूप दे सकता है। एम्स भोपाल लगातार ऐसे नवाचार कर रहा है, जिनसे इलाज सरल, सुरक्षित और आम लोगों की पहुंच में हो सके। यह पेटेंट उसी दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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