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Bhopal: भोपाल के अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, जांच समिति पर रोक, हाईकोर्ट से मिली राहत भी खत्म

Wed, 05 Aug 2026 05:37 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 05 Aug 2026 05:37 PM IST
सार

भोपाल में अवैध निर्माण और आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार की 10 सदस्यीय समीक्षा समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही हाईकोर्ट से मिले सभी स्टे आदेश भी निरस्त कर दिए हैं। अदालत ने नगर निगम को बिना किसी ढिलाई के नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।

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Bhopal: Supreme Court takes a stern stance on illegal construction in Bhopal; stays the probe committee and re
रहवासियों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से गठित 10 सदस्यीय समीक्षा समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी। साथ ही, इस मामले में दुकान संचालकों को हाईकोर्ट से मिली सभी अंतरिम राहत (स्टे) भी निरस्त कर दी।
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समानांतर प्रक्रिया नहीं चलेगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसके आदेशों के तहत चल रही कार्रवाई में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या समानांतर प्रक्रिया स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता से भी नाराजगी जताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के समानांतर अलग जांच या समीक्षा नहीं चल सकती।
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नगर निगम बोला- कार्रवाई में आ रही थीं बाधाएं
नगर निगम ने अदालत को बताया कि वह अवैध निर्माण और आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करना चाहता है, लेकिन विभिन्न स्तरों पर आ रही बाधाओं के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि कानून का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए और कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।
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अब फिर तेज होगी सीलिंग कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद माना जा रहा है कि भोपाल में अवैध निर्माण और आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई फिर तेज होगी। अदालत ने संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

सरकार ने बनाई थी समीक्षा समिति
नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई के विरोध के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूरे मामले की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की 10 सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अध्ययन कर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई थी। रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को राहत देने की बात भी कही गई थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर ही रोक लगा दी है।


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रहवासी और व्यापारी आमने-सामने
एक ओर अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़ियाकलां सहित कई क्षेत्रों के रहवासियों ने आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों का विरोध किया, तो दूसरी ओर व्यापारिक संगठनों ने मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि वर्षों से नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण व्यापारियों को मजबूरी में आवासीय परिसरों से कारोबार करना पड़ रहा है।

 
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