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बीना विधायक दलबदल मामला गरमाया: नेता प्रतिपक्ष ने स्पीकर से मिलकर रखा पक्ष, 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई

न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Wed, 22 Apr 2026 10:24 PM IST
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सार

बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर जल्द निर्णय की मांग की है। मामला लंबे समय से लंबित है और अब 29 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी  हैं।

Bina MLA Defection Case Heats Up: Leader of Opposition Meets Speaker to Present His Case; High Court Hearing S
बीना विधायक निर्मला सप्रे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश की सियासत में बीना विधायक निर्मला सप्रे का दलबदल मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात कर पूरे प्रकरण में अपना पक्ष रखा और जल्द निर्णय की मांग की। वहीं, अब इस विवादित मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में होगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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नेता प्रतिपक्ष का आरोप: जानबूझकर हो रही देरी
मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने कहा कि बीना की जनता विधानसभा अध्यक्ष से निष्पक्ष फैसले की उम्मीद कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार उपचुनाव से बचने के लिए इस मामले को जानबूझकर लंबित रख रही है। सिंघार के मुताबिक सभी साक्ष्य पहले ही प्रस्तुत किए जा चुके हैं, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही।
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90 दिन का फैसला ढाई साल से लंबित
सिंघार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में 90 दिनों के भीतर फैसला होना चाहिए, लेकिन यह मामला करीब ढाई साल से लंबित है। उन्होंने इसे न्याय प्रक्रिया में देरी बताते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

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 दलबदल पर अटका फैसला
बीना से विधायक निर्मला सप्रे 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं थीं। बाद में उनके भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होने और रुख बदलने के आरोप लगे। विपक्ष का कहना है कि उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर भाजपा का समर्थन किया, लेकिन औपचारिक इस्तीफा नहीं दिया। इसी आधार पर उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग की गई और मामला विधानसभा अध्यक्ष के पास लंबित है। यही तय होना है कि उनकी सदस्यता बरकरार रहेगी या खत्म होगी।
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