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गेहूं खरीदी विवाद गरमाया: कांग्रेस सेवादल का 25 घंटे का उपवास, गांधीवादी तरीके से सरकार को घेरने की कोशिश
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 23 Apr 2026 03:01 PM IST
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सार
गेहूं खरीदी में अव्यवस्था और तकनीकी खामियों से नाराज कांग्रेस सेवादल ने भोपाल में सत्याग्रह शुरू किया है। गांधीवादी तरीके से किए जा रहे 25 घंटे के उपवास के जरिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है, वहीं किसानों के मुद्दों को लेकर आंदोलन और तेज होने के संकेत दिए गए हैं।
कांग्रेस का किसान सत्याग्रह उपवास
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी व्यवस्था को लेकर बढ़ती परेशानियों ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। किसानों की दिक्कतों के विरोध में भोपाल में कांग्रेस सेवादल ने सत्याग्रह शुरू किया है। इस विरोध के केंद्र में खरीदी प्रक्रिया में आ रही तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें हैं, जिनसे खासतौर पर छोटे किसान प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के लिए गेहूं खरीदी की शुरुआत अप्रैल के दूसरे हफ्ते में की गई, लेकिन पोर्टल की खामियों और प्रक्रिया की जटिलताओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्लॉट बुकिंग से लेकर सत्यापन तक, कई स्तरों पर बाधाएं सामने आ रही हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर गुरुवार को भोपाल में कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक अवनीश भार्गव 25 घंटे के उपवास पर बैठ गए हैं। इस सत्याग्रह में प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आसपास के जिलों से किसान भी पहुंचे हैं, जिससे यह आंदोलन राजनीतिक के साथ-साथ जनसमर्थन भी जुटा रहा है।
गांधीवादी तरीके से विरोध, सरकार को संदेश
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे महात्मा गांधी के मार्ग पर चलते हुए यह भूख सत्याग्रह कर रहे हैं। उनका कहना है कि अहिंसक और शांतिपूर्ण आंदोलन ही सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। नेताओं का दावा है कि इसी रास्ते से सरकार को मजबूर किया जाएगा कि वह किसानों की समस्याएं सुने और समाधान निकाले।
सरकार पर भेदभाव और लापरवाही के आरोप
अवनीश भार्गव ने आरोप लगाया कि सरकार की घोषणाएं और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। एक तरफ हर दाना खरीदने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर किसानों को जमीन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर खरीदी की जा रही है। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताया।
यह भी पढ़ें- एमपी में तेज हुई गर्मी की मार, आज 19 जिलों में लू का अलर्ट, दिन के साथ रातें भी गर्म
पोर्टल और सत्यापन प्रक्रिया बनी परेशानी
उन्होंने बताया कि किसानों को पंजीयन के बावजूद खरीदी केंद्रों पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों को सैटेलाइट वेरिफिकेशन नहीं होने का हवाला देकर रोका जा रहा है, तो कहीं डीबीटी के लिए आधार लिंक न होने की बात कही जा रही है। इन तकनीकी कारणों से किसान अपनी फसल बेचने से वंचित रह रहे हैं।
यह भी पढ़ें-स्कूल और मंदिर के पास ठेके पर लोगों का गुस्सा, सड़क पर उतरे रहवासी
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की हालत खराब है और उन्हें भुगतान तक समय पर नहीं मिल रहा। शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जब समय पर गेहूं खरीदी ही नहीं हुई, तो किसानों को सहकारी समितियों में डिफॉल्टर कैसे घोषित कर दिया गया। पूरे साल का ब्याज वसूलने को उन्होंने अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे महात्मा गांधी के मार्ग पर चलते हुए यह भूख सत्याग्रह कर रहे हैं। उनका कहना है कि अहिंसक और शांतिपूर्ण आंदोलन ही सरकार तक किसानों की आवाज पहुंचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। नेताओं का दावा है कि इसी रास्ते से सरकार को मजबूर किया जाएगा कि वह किसानों की समस्याएं सुने और समाधान निकाले।
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अवनीश भार्गव ने आरोप लगाया कि सरकार की घोषणाएं और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। एक तरफ हर दाना खरीदने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर किसानों को जमीन के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर खरीदी की जा रही है। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताया।
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उन्होंने बताया कि किसानों को पंजीयन के बावजूद खरीदी केंद्रों पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई किसानों को सैटेलाइट वेरिफिकेशन नहीं होने का हवाला देकर रोका जा रहा है, तो कहीं डीबीटी के लिए आधार लिंक न होने की बात कही जा रही है। इन तकनीकी कारणों से किसान अपनी फसल बेचने से वंचित रह रहे हैं।
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आंदोलन तेज करने की चेतावनी
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की हालत खराब है और उन्हें भुगतान तक समय पर नहीं मिल रहा। शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जब समय पर गेहूं खरीदी ही नहीं हुई, तो किसानों को सहकारी समितियों में डिफॉल्टर कैसे घोषित कर दिया गया। पूरे साल का ब्याज वसूलने को उन्होंने अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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