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मध्य प्रदेश की विजयपुर सीट पर निर्वाचन शून्य: रामनिवास रावत बोले-चुनाव में पारदर्शिता जरूरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 09 Mar 2026 06:56 PM IST
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सार
विजयपुर विधानसभा सीट पर न्यायालय के फैसले के बाद विधायक घोषित किए गए भाजपा नेता रामनिवास रावत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नामांकन के समय प्रत्याशी को शपथपत्र में सभी जानकारियां सही और पूरी देना अनिवार्य है।
रामनिवास रावत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विजयपुर सीट पर निर्वाचन शून्य किए जाने के बाद विधायक घोषित किए जाने के बाद भाजपा नेता रामनिवास रावत बयान जारी कर कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी को नामांकन के समय शपथपत्र में सभी जानकारियां सही तरीके से देना अनिवार्य होता है।
न्यायालय के फैसले के बाद विधायक घोषित किए गए भाजपा नेता रामनिवास रावत ने कहा कि चुनाव कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है और इसमें पारदर्शिता बनाए रखना सभी प्रत्याशियों की जिम्मेदारी है।
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उन्होंने कहा कि नामांकन दाखिल करते समय प्रत्याशी को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित सभी जानकारियां शपथपत्र में देना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के नियमों और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुसार तय की गई है। इसका उद्देश्य यह है कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी के बारे में पूरी और सही जानकारी जनता के सामने हो, ताकि मतदाता सोच-समझकर अपना प्रतिनिधि चुन सकें।
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रामनिवास रावत ने आरोप लगाया कि विजयपुर में कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी शपथपत्र में छिपाई थी और मतदाताओं को पूरी जानकारी नहीं दी थी। इसी कारण इस मामले में चुनाव याचिका दायर की गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी याचिका को न्यायालय ने स्वीकार करते हुए निर्णय दिया है। उनका कहना है कि न्यायालय के इस फैसले से स्पष्ट संदेश जाएगा कि चुनाव आयोग और उच्चतम न्यायालय द्वारा तय की गई चुनावी प्रक्रियाओं का सभी प्रत्याशियों को पूरी ईमानदारी से पालन करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी है कि नामांकन के समय प्रत्याशी चुनाव आयोग द्वारा मांगी गई हर जानकारी सही और पूर्ण रूप से प्रस्तुत करें, ताकि मतदाताओं का भरोसा चुनाव प्रक्रिया पर बना रहे।
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रामनिवास रावत ने आरोप लगाया कि विजयपुर में कांग्रेस प्रत्याशी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी शपथपत्र में छिपाई थी और मतदाताओं को पूरी जानकारी नहीं दी थी। इसी कारण इस मामले में चुनाव याचिका दायर की गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी याचिका को न्यायालय ने स्वीकार करते हुए निर्णय दिया है। उनका कहना है कि न्यायालय के इस फैसले से स्पष्ट संदेश जाएगा कि चुनाव आयोग और उच्चतम न्यायालय द्वारा तय की गई चुनावी प्रक्रियाओं का सभी प्रत्याशियों को पूरी ईमानदारी से पालन करना चाहिए।
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