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एमपी के सरकारी अस्पताल में पहली बार जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी: जटिल सर्जरी से ट्रांसजेंडर महिला को मिली नई पहचान
Mon, 12 Oct 2026 05:52 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 12 Oct 2026 05:52 PM IST
सार
एम्स भोपाल में मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पहली बार जेंडर-अफर्मिंग बॉटम सर्जरी किए जाने का दावा किया गया है। करीब आठ घंटे चली सर्जरी के बाद ट्रांसजेंडर महिला को संतोषजनक स्थिति में छुट्टी दे दी गई। इसमें तीन विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल रहे।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के अनुरोध और सहमति से पहली जेंडर-अफर्मिंग बॉटम सर्जरी सफलतापूर्वक की है। इसमें लैंगिक पहचान के अनुरूप शरीर बनाने के लिए जननांग क्षेत्र की सर्जरी की गई। मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी पहली बार किए जाने का दावा एम्स भोपाल ने किया है। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति संतोषजनक रही और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह सर्जरी सिर्फ एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपनी लैंगिक पहचान के अनुरूप शारीरिक बदलाव चाहने वाले लोगों के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में उपलब्ध उपचार की दिशा में अहम कदम है। एम्स के अनुसार, मरीज की इच्छा और सहमति से यह प्रक्रिया की गई। सर्जरी के बाद महिला ने परिणाम पर प्रसन्नता व्यक्त की।
तीन विभागों के डॉक्टरों ने संभाली जिम्मेदारी
करीब आठ घंटे चली इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मनाल खान और सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिनव सिंह ने किया। उनके साथ विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर भी शामिल रहे। सर्जरी में जननांग क्षेत्र में लैंगिक पहचान के अनुरूप शल्य चिकित्सा के जरिए बदलाव किया गया। इस संवेदनशील प्रक्रिया में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अनुज जैन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार डोरा और यूरोलॉजी विभाग के डॉ. देवाशीष कौशल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलग-अलग विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों ने समन्वय के साथ सर्जरी की योजना बनाई और उसे पूरा किया।
यह भी पढ़ें-खाने में छिपकली-दाल में कीड़े: भोपाल के छात्रावासों में बच्चों की थाली पर संकट, बदसलूकी का आरोप, किया प्रदर्शन
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ट्रांसजेंडर मरीजों के लिए एम्स में विशेष क्लिनिक
एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समर्पित क्लिनिक भी संचालित है। यहां जांच, उपचार और जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। संस्थान का कहना है कि यह सर्जरी उसकी उन्नत पुनर्निर्माण चिकित्सा क्षमता और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह सफलता संस्थान की उन्नत चिकित्सा क्षमता और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में पहली बार इस तरह की सर्जरी होना गर्व की बात है।
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तीन विभागों के डॉक्टरों ने संभाली जिम्मेदारी
करीब आठ घंटे चली इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मनाल खान और सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिनव सिंह ने किया। उनके साथ विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर भी शामिल रहे। सर्जरी में जननांग क्षेत्र में लैंगिक पहचान के अनुरूप शल्य चिकित्सा के जरिए बदलाव किया गया। इस संवेदनशील प्रक्रिया में एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अनुज जैन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार डोरा और यूरोलॉजी विभाग के डॉ. देवाशीष कौशल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अलग-अलग विशेषज्ञताओं के डॉक्टरों ने समन्वय के साथ सर्जरी की योजना बनाई और उसे पूरा किया।
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ट्रांसजेंडर मरीजों के लिए एम्स में विशेष क्लिनिक
एम्स भोपाल में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समर्पित क्लिनिक भी संचालित है। यहां जांच, उपचार और जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। संस्थान का कहना है कि यह सर्जरी उसकी उन्नत पुनर्निर्माण चिकित्सा क्षमता और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह सफलता संस्थान की उन्नत चिकित्सा क्षमता और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में पहली बार इस तरह की सर्जरी होना गर्व की बात है।
