{"_id":"69c59ba80e065f8c890a3c1c","slug":"mp-news-7-years-in-jail-for-selling-buying-or-rearing-wildlife-forest-department-warns-after-seizing-313-tu-2026-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: वन्यजीवों को बेचा, खरीदा या पाला तो 7 वर्ष की जेल, 313 कछुए जब्त करने के बाद वन विभाग की चेतावनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: वन्यजीवों को बेचा, खरीदा या पाला तो 7 वर्ष की जेल, 313 कछुए जब्त करने के बाद वन विभाग की चेतावनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Fri, 27 Mar 2026 02:18 AM IST
विज्ञापन
सार
मध्य प्रदेश में प्रतिबंधित वन्यजीवों की खरीद फरोख्त को लेकर वन विभाग ने निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें साफ कहा गया है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित जीवों का शिकार करना, खरीदना, बेचना, पालना या परिवहन करना अपराध है।
कछुए (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन
विस्तार
मध्य प्रदेश में प्रतिबंधित वन्यजीवों की अवैध बिक्री और पालन को रोकने के लिए वन विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने साफ कहा है कि ऐसे मामलों में कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में फरवरी 2026 में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 313 जीवित कछुए जब्त किए गए थे। ये कछुए अनुसूची-1 प्रजाति के थे, जिनका व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और एक संगठित गिरोह का भी खुलासा हुआ।
ये भी पढ़ें- भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया: आष्टा और सोनकच्छ तक का इलाका शामिल, छह जिलों के 2500 गांव शामिल होंगे
वन विभाग ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत प्रतिबंधित जीवों का शिकार करना, खरीदना, बेचना, पालना या उनका परिवहन करना अपराध है। इसके बावजूद कुछ पेट शॉप और एक्वेरियम दुकानों में कछुए, पक्षी और अन्य जीवों की अवैध बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं। विभाग ने दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति किसी भी प्रतिबंधित प्रजाति का व्यापार न करें और अपने पास मौजूद जीवों के सभी जरूरी दस्तावेज रखें। साथ ही सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसे जीवों की बिक्री या प्रचार करने से भी मना किया गया है।
ये भी पढ़ें- भोपाल में पेट्रोल-डीजल अफवाहों पर सख्ती: प्रशासन ने जारी की SOP, फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे प्रतिबंधित वन्यजीवों को न खरीदें और न ही घर में पालें। अगर कहीं ऐसी गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचित करें। इसके लिए वन विभाग ने टोल-फ्री नंबर 0755-2524000 भी जारी किया है। वन विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णामूर्ति ने नागरिकों, दुकानदारों और मीडिया से वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।
ये भी पढ़ें- MP: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ दर्ज संगठित अपराधों की जांच STF करेगी, एडीजी के निगरानी में टीम को सौंपी जांच
Trending Videos
ये भी पढ़ें- भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया: आष्टा और सोनकच्छ तक का इलाका शामिल, छह जिलों के 2500 गांव शामिल होंगे
विज्ञापन
विज्ञापन
वन विभाग ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत प्रतिबंधित जीवों का शिकार करना, खरीदना, बेचना, पालना या उनका परिवहन करना अपराध है। इसके बावजूद कुछ पेट शॉप और एक्वेरियम दुकानों में कछुए, पक्षी और अन्य जीवों की अवैध बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं। विभाग ने दुकानदारों को निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति किसी भी प्रतिबंधित प्रजाति का व्यापार न करें और अपने पास मौजूद जीवों के सभी जरूरी दस्तावेज रखें। साथ ही सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसे जीवों की बिक्री या प्रचार करने से भी मना किया गया है।
ये भी पढ़ें- भोपाल में पेट्रोल-डीजल अफवाहों पर सख्ती: प्रशासन ने जारी की SOP, फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे प्रतिबंधित वन्यजीवों को न खरीदें और न ही घर में पालें। अगर कहीं ऐसी गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत वन विभाग या पुलिस को सूचित करें। इसके लिए वन विभाग ने टोल-फ्री नंबर 0755-2524000 भी जारी किया है। वन विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसमें 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एल. कृष्णामूर्ति ने नागरिकों, दुकानदारों और मीडिया से वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है।
ये भी पढ़ें- MP: लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ दर्ज संगठित अपराधों की जांच STF करेगी, एडीजी के निगरानी में टीम को सौंपी जांच

कमेंट
कमेंट X