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MP News: मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर-मावा के निर्माण और बिक्री पर रोक, 921 में 123 पनीर सैंपल मिले अमानक

Wed, 12 Aug 2026 08:29 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Wed, 12 Aug 2026 08:29 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर और मावा समेत दूध से बने उत्पादों की नकल करने वाले डेयरी एनालॉग पर सरकार ने तत्काल रोक लगा दी है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त के आदेश के बाद इनके निर्माण से लेकर बिक्री तक पर प्रतिबंध रहेगा, जबकि जांच में पनीर के 921 नमूनों में 123 अमानक मिले हैं।
 

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MP News: Ban on the manufacture and sale of analogue paneer and mawa in Madhya Pradesh; 123 out of 921 paneer
पनीर (सांकेतिक फोटो)

विस्तार

मध्यप्रदेश में दूध से बने असली उत्पादों की नकल करने वाले डेयरी एनालॉग, खासकर एनालॉग पनीर और एनालॉग मावा पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त सुखवीर सिंह ने बुधवार को आदेश जारी कर ऐसे उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री को पूरे प्रदेश में प्रतिबंधित कर दिया है। यह रोक फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे मानकीकृत उत्पादों पर लागू नहीं होगी। आदेश के मुताबिक यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य हित और उन्हें वास्तविक डेयरी उत्पाद तथा एनालॉग उत्पाद के बीच स्पष्ट अंतर बताने के उद्देश्य से की गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि कई कारोबारी एनालॉग उत्पादों को पनीर, मलाई पनीर, फ्रेश पनीर, कॉटेज ब्लॉक और अन्य नामों से बेच रहे थे। कई मामलों में लेबलिंग और पैकेजिंग पर उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही थी। इससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की स्थिति बन रही थी।
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पनीर के 921 नमूनों में 123 अमानक
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक वर्ष 2025-26 में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में पनीर के 921 रेग्यूलेटरी नमूने जांच के लिए भेजे गए। इनमें 123 नमूने अमानक पाए गए। इनमें 98 नमूनों की बीआर रीडिंग और 25 नमूनों का फैट प्रतिशत निर्धारित पनीर मानकों के अनुरूप नहीं था। विभाग ने इसे पनीर के मानकों के पालन में कमी और कुछ मामलों में एनालॉग पनीर के इस्तेमाल की संभावना से जोड़ा है। 
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होटल-रेस्टोरेंट में भी नहीं मिलती थी सही जानकारी
विभाग ने पाया कि होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग प्रतिष्ठान, ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं द्वारा तैयार भोजन में इस्तेमाल किए जाने वाले डेयरी एनालॉग की जानकारी अक्सर ग्राहकों को नहीं दी जाती। खुले रूप में इस्तेमाल होने के कारण उपभोक्ता यह पता नहीं कर पाता कि उसे परोसे जा रहे व्यंजन में असली पनीर या कोई एनालॉग उत्पाद इस्तेमाल हुआ है। 

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गैर-दुग्ध सामग्री वाले उत्पादों पर रोक
आदेश में कहा गया है कि ऐसे सभी एनालॉग या गैर-दुग्ध खाद्य उत्पाद प्रतिबंधित रहेंगे, जो किसी दुग्ध उत्पाद की नकल करते हों या उपभोक्ता को वास्तविक डेयरी उत्पाद होने का आभास कराते हों। खासतौर पर वे उत्पाद जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और जिनकी लेबलिंग, पैकेजिंग या बिक्री का तरीका उपभोक्ता को भ्रमित करता है, इस प्रतिबंध के दायरे में होंगे। 

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FSSAI के अंतिम मानक तक रोक
खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 18 और 30 के तहत जारी किया है। रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक FSSAI डेयरी एनालॉग से संबंधित व्यापक और अंतिम नियामकीय मानक या गुणवत्ता मानदंड अधिसूचित नहीं कर देता। हालांकि आदेश की अधिकतम अवधि एक वर्ष रखी गई है। इससे पहले यदि खाद्य सुरक्षा आयुक्त आदेश को संशोधित, प्रतिस्थापित या निरस्त करते हैं तो वह भी लागू होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रोक लगने से पहले लिए गए नमूनों, लंबित न्यायनिर्णयन, अभियोजन या अन्य वैधानिक मामलों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इन मामलों में कार्रवाई मौजूदा कानून के अनुसार जारी रहेगी।
 
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