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MP News: 3 साल की सजा के बाद भारती की विधायकी खतरे में, हाईकोर्ट से स्टे नहीं मिला तो जाएगी सदस्यता

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 02 Apr 2026 03:41 PM IST
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सार

दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एफडी हेराफेरी मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। अब उनकी सदस्यता बचना पूरी तरह हाईकोर्ट से मिलने वाले स्टे पर निर्भर है, नहीं तो पद जा सकता है।

MP News: Bharti's MLA status in jeopardy after 3-year sentence; membership lost if High Court doesn't grant st
दतिया विधायक राजेंद्र भारती का फाइल फोटो। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने एफडी हेराफेरी मामले में कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधायकी खतरे में है। हालांकि उन्हें जमानत मिल गई है, लेकिन अब उनकी सदस्यता बचना पूरी तरह हाईकोर्ट से मिलने वाले स्टे पर निर्भर है। इस मामले में मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि अब विधायक के पास सजा को स्थगित (स्टे) कराने का विकल्प हैं। उन्होंने कहा कि यदि हाईकोर्ट से स्टे नहीं मिलता है तो, विधानसभा अध्यक्ष उनकी सदस्यता रद्द करने की कार्रवाई करेंगे। सिंह ने बताया कि पूर्व विधायक आशारानी के मामले में भी सजा के बाद कोर्ट से राहत नहीं मिली थी, जिसके चलते उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई थी।
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2 साल से ज्यादा सजा पर जाता है पद
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत 2 साल या उससे अधिक की सजा होने पर विधायक/ सांसद की सदस्यता समाप्त कर दी जाती हैं। राजेंद्र भारती को अलग-अलग धाराओं में तीन साल तक की सजा सुनाई गई है, जिससे उनकी विधायकी पर सीधा खतरा बन गया है। हालांकि जानकारों का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष भी कोर्ट में अपील तक का समय देते हैं। 

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क्या है पूरा मामला
यह मामला वर्ष 1998 से जुड़ा है, जब श्याम सुंदर संस्थान की ओर से बैंक में 10 लाख रुपए की एफडी कराई गई थी। आरोप है कि राजेंद्र भारती ने बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर रिकॉर्ड में हेराफेरी की और एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी। इसके बाद 1999 से 2011 के बीच करीब 13.5% ब्याज दर से हर साल 1.35 लाख रुपए निकाले गए। साल 2011 में बैंक अध्यक्ष बने भाजपा नेता पप्पू पुजारी ने इस गड़बड़ी को उजागर किया। जांच में एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज हुई। इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से भी राहत नहीं मिली। अंततः 2015 में आपराधिक केस दर्ज हुआ और अब कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।

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बढ़ी राजनीतिक हलचल 
विधायक के दोषी करार दिए जाने और दो साल की सजा के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यदि हाईकोर्ट से स्टे नहीं मिलता और सदस्यता समाप्त होती है, तो सीट खाली होने पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।
 
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