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MP News: गौ-शालाएं स्वावलंबी बनाना जरूरी, सीएम बोले-प्रदेश में देसी नस्ल के गोपालन को प्रोत्साहित किया जाए
Mon, 08 Sep 2025 07:12 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Mon, 08 Sep 2025 07:12 PM IST
सार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आत्मनिर्भर गौशालाएं प्रदेश की अर्थव्यवस्था में नई ताकत बन सकती हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि गौशालाओं में गोबर, गोमूत्र और दुग्ध उत्पादों से आय के साधन विकसित किए जाएं और सौर ऊर्जा उत्पादन जैसी पहलें की जाएं। साथ ही, देसी नस्ल के गोपालन को बढ़ावा देने और पशु चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय में गौसंवर्धन बोर्ड की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा है कि आत्मनिर्भर गोशाला, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। गौ-शालाएं गोबर, गोमूत्र आदि अपशिष्ट से धन अर्जित कर संपन्न बन सकती हैं। अतः स्वावलंबी गौशालाएं विकसित करने के लिए गौशालाओं में दुग्ध उत्पादों सहित गोमूत्र-गोबर आदि से निर्मित सामग्री के विक्रय की व्यवस्था विकसित की जाए। इसके साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध स्थान का उपयोग सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए भी किया जाए। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में स्थानीय परिवेश के अनुरूप देसी नस्ल के गोपालन को प्रोत्साहित किया जाए। गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को जोड़ा जाए। प्रदेश में उपलब्ध पशुधन के अनुपात में पशु चिकित्सकों की संख्या कम है। गोवंश के बेहतर प्रबंधन और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशु चिकित्सकों की संख्या में बढ़ोतरी आवश्यक है। इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
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प्रदेश मेंगिर, साहीवाल नस्ल के पशुधन को प्रोत्साहित करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में देसी नस्ल के गोपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गिर, साहीवाल, मालवी और नागौरी नस्ल के पशुधन को प्रोत्साहित किया जाए। प्रदेश के जनजातीय अंचलों में भी गोपालन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आवश्यक नवाचार किए जाएं। प्रदेश में पशुपालन-कृषि-उद्यानिकी तथा नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समन्वित रूप से कार्य करने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और दुग्ध उत्पादन की दिशा में भी प्रदेश, देश के शीर्षस्थ राज्यों में शामिल हो सकेगा।
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भोपाल और जबलपुर में बन रही आधुनिक गौशालाएं
बैठक में जानकारी दी गई कि गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा गौशाला समितियों के बैंक खातों में राज्य स्तर से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। बोर्ड द्वारा 937 नवीन गौशालाओं की स्थापना के बाद पंजीयन किया गया है, जिसमें एक लाख 10 हजार गोवंश को आश्रय प्राप्त है। वर्ष 2024-25 में विदिशा, देवास, आगर-मालवा, ग्वालियर, दमोह, सतना तथा रीवा में बायोगैस सह जैविक खाद निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए। नगर निगम ग्वालियर, इंदौर तथा उज्जैन ने वृहद गौशालाओं का संचालन आरंभ किया गया है। भोपाल और जबलपुर में गौशालाओं की स्थापना का कार्य जारी है। बैठक में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति की प्रगति पर भी समीक्षा हुई।
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प्रदेश मेंगिर, साहीवाल नस्ल के पशुधन को प्रोत्साहित करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में देसी नस्ल के गोपालन को प्रोत्साहित करने के लिए गिर, साहीवाल, मालवी और नागौरी नस्ल के पशुधन को प्रोत्साहित किया जाए। प्रदेश के जनजातीय अंचलों में भी गोपालन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए आवश्यक नवाचार किए जाएं। प्रदेश में पशुपालन-कृषि-उद्यानिकी तथा नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समन्वित रूप से कार्य करने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और दुग्ध उत्पादन की दिशा में भी प्रदेश, देश के शीर्षस्थ राज्यों में शामिल हो सकेगा।
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भोपाल और जबलपुर में बन रही आधुनिक गौशालाएं
बैठक में जानकारी दी गई कि गौसंवर्धन बोर्ड द्वारा गौशाला समितियों के बैंक खातों में राज्य स्तर से सीधे राशि अंतरित की जा रही है। बोर्ड द्वारा 937 नवीन गौशालाओं की स्थापना के बाद पंजीयन किया गया है, जिसमें एक लाख 10 हजार गोवंश को आश्रय प्राप्त है। वर्ष 2024-25 में विदिशा, देवास, आगर-मालवा, ग्वालियर, दमोह, सतना तथा रीवा में बायोगैस सह जैविक खाद निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए। नगर निगम ग्वालियर, इंदौर तथा उज्जैन ने वृहद गौशालाओं का संचालन आरंभ किया गया है। भोपाल और जबलपुर में गौशालाओं की स्थापना का कार्य जारी है। बैठक में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की नीति की प्रगति पर भी समीक्षा हुई।
