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MP News: कृषि समागम में नई खेती का मंत्र, ब्लूबेरी-स्ट्रॉबेरी से लेकर विदेशी सब्जियों तक, डबल मुनाफे का रास्ता

न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 16 Mar 2026 06:47 PM IST
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सार

भोपाल में आयोजित कृषि समागम में किसानों को नई फसलों की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया। ब्लूबेरी-स्ट्रॉबेरी और विदेशी सब्जियों की खेती को कम लागत में ज्यादा मुनाफे वाला विकल्प बताया गया, जिससे किसान पारंपरिक खेती के साथ नई आय के रास्ते खोल सकते हैं।

MP News: The Mantra of Modern Farming at the Agriculture Conclave—From Blueberries and Strawberries to Exotic
कृषि वर्ष-2026 के वैचारिक समागम में लगे स्टॉल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजधानी भोपाल में आयोजित कृषि वर्ष-2026 के वैचारिक समागम में किसानों के लिए नई खेती के कई मॉडल सामने आए। कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में लगे स्टॉलों में पारंपरिक फसलों से हटकर ब्लूबेरी, राइस बेरी, स्ट्रॉबेरी और विदेशी सब्जियों की खेती को लेकर खास चर्चा रही। किसानों का कहना है कि कम क्षेत्र में भी इन फसलों से ज्यादा कमाई संभव है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए, जहां आधुनिक खेती, नई तकनीक और वैकल्पिक फसलों पर मंथन किया जा रहा है।
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ब्लूबेरी-स्ट्रॉबेरी से कमाई का नया रास्ता
धार जिले के किसान लखन पाटीदार ने अपने स्टॉल पर ब्लूबेरी, राइस बेरी और स्ट्रॉबेरी की खेती का मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारत में इन फसलों की खेती अभी बहुत सीमित है और बाजार में आने वाला लगभग 90 प्रतिशत माल विदेशों से आता है। उनके मुताबिक एक पौधा लगाने में करीब 700 से 800 रुपये की लागत आती है, लेकिन इसकी उत्पादन क्षमता लंबी होती है और एक पौधा करीब 10 साल तक फल देता है। उन्होंने कहा कि यदि किसान बड़े स्तर पर इन फसलों को अपनाते हैं तो उन्हें अच्छा मुनाफा मिल सकता है। सरकार भी इस तरह की फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है।
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विदेशी सब्जियों की खेती से बढ़ रही आमदनी
वहीं भोपाल के लंबाखेड़ा के किसान किशन मौर्य ने विदेशी सब्जियों की खेती का मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने स्टॉल पर सेलरी, विदेशी धनिया और बेबी कॉर्न जैसी सब्जियां प्रदर्शित कीं। मौर्य का कहना है कि पारंपरिक सब्जियों की तुलना में इन विदेशी किस्मों की बाजार में ज्यादा कीमत मिलती है। जहां सामान्य सब्जियां 10 रुपये किलो बिकती हैं, वहीं ये सब्जियां 25 से 50 रुपये किलो तक बिक जाती हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 20 से 25 किसानों को इस तरह की खेती से जोड़ा जा चुका है और उन्हें फसल की किस्म, बुवाई का समय और तकनीक से जुड़ी पूरी जानकारी दी जा रही है। इसके लिए एक पॉलीहाउस भी तैयार किया गया है, जहां किसान प्रशिक्षण के साथ पौधे भी ले सकते हैं।

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कृषि कल्याण वर्ष के तहत हो रहा मंथन: गोविंद सिंह राजपूत
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस वर्ष को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले प्रदेश में औद्योगिक वर्ष मनाया गया था। इसी सोच के तहत किसानों और कृषि विशेषज्ञों के साथ यह वैचारिक कार्यशाला आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ नई तकनीक और फसलों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि किसान आधुनिक तकनीक को अपनाएं और खेती से बेहतर आमदनी हासिल करें। राजपूत ने कहा कि गुना जिले में गुलाब की खेती तेजी से बढ़ रही है और जल्द ही गुना को गुलाबों की नगरी के रूप में पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न विभागों को इस पहल से जोड़ रही है और किसानों से भी सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके और किसान आर्थिक रूप से मजबूत बनें।

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किसानों को सक्षम बनाना सरकार का संकल्प: रामेश्वर शर्मा
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों को सक्षम और समृद्ध बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले केवल अन्नदाता का नाम लिया जाता था, लेकिन उनके सम्मान और आय बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास कम हुए। शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों को फसलों का समर्थन मूल्य, सम्मान निधि और फसल बीमा योजना जैसी सुविधाएं दी गई हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार साल के 365 दिन कृषि के उत्थान के लिए संकल्पित है।उन्होंने बताया कि इस मंथन में जनप्रतिनिधियों से लेकर आम किसानों तक को आमंत्रित किया गया है। किसानों के सुझावों के आधार पर सरकार आगे की कार्ययोजनातैयार करेगी, ताकि खेती को मजबूत बनाया जा सके और अन्नदाता के चेहरे पर मुस्कान लाई जा सके।
 
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