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MP News: दो मादा चीतों को जंगल में मुक्त करेंगे CM मोहन यादव, वन्यजीव संरक्षण में नई पहचान बना रहा मध्यप्रदेश

Sun, 10 May 2026 11:57 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sun, 10 May 2026 11:57 AM IST
सार

मुख्यमंत्री मोहन यादव 10 और 11 मई को श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क के दौरे पर रहेगा। सीएम कूनो में दो मादा चीता को उनके बाड़े से खुले जंगल में मुक्त करेंगे। प्रदेश में चीतो की सख्या 57 पहुंच गई है। 

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MP News: Under the leadership of CM Mohan, the state is moving forward in wildlife conservation, two female ch
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश अब केवल “टाइगर स्टेट” नहीं, बल्कि देश के बड़े वन्यजीव संरक्षण मॉडल के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य में वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए लगातार बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री 10-11 मई को श्योपुर स्थित कुनो नेशनल पार्क के दौरे पर रहेंगे, जहां वे बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को बाड़े से जंगल में मुक्त करेंगे। प्रदेश सरकार ने बीते डेढ़ वर्षों में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। सबसे बड़ा फैसला रातापानी को नया टाइगर रिजर्व घोषित करना रहा। लंबे समय से लंबित यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के कार्यकाल में मंजूर हुआ। इसे पुरातत्वविद् विष्णु श्रीधर वांकनकर के नाम से जोड़कर सांस्कृतिक पहचान भी दी गई। रातापानी की खासियत यह है कि यह देश का राजधानी के सबसे नजदीक स्थित टाइगर रिजर्व माना जा रहा है। मार्च 2025 में माध्व टाइगर रिजर्व को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व बनाया गया। यहां मानव और वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनाई जा रही है। विशेषज्ञ इसे भविष्य की जरूरतों के हिसाब से महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
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प्रदेश में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद 
वहीं, गिद्ध संरक्षण में भी मध्यप्रदेश देश में अग्रणी बनकर उभरा है। राज्य में 14 हजार से ज्यादा गिद्ध मौजूद हैं। भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुक्त किया गया एक गिद्ध उज्बेकिस्तान तक पहुंचा, जिसे संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। कुनो नेशनल पार्क अब केवल चीता परियोजना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां चीतों की संख्या बढ़कर 57 तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा गांधी सागर और नौरादेही को भी चीता लैंडस्केप के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ की योजना मंजूर 
सरकार ने नए अभ्यारण्यों और संरक्षण क्षेत्रों पर भी फोकस बढ़ाया है। सागर जिले में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर वाइल्डलाइफ सेंचुरी घोषित की गई, जबकि ओंकारेश्वर और जहानगढ़ में नए अभ्यारण्य बनाए जा रहे हैं। ताप्ती क्षेत्र को प्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया है। इसके साथ ही घड़ियाल, मगरमच्छ, कछुए, हाथी और जंगली भैंसों के संरक्षण के लिए भी विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार ने हाथी संरक्षण के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की योजना मंजूर की है। वहीं, कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। वन्यजीव संरक्षण के इन प्रयासों से पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश अब संरक्षण, विकास और स्थानीय भागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने वाला देश का प्रमुख राज्य बनता जा रहा है।
 
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