दतिया का फैसला आज: गांवों का जोश जीतेगा या शहर की खामोशी पलटेगी पूरा खेल? हेमंत-जीतू की प्रतिष्ठा भी दांव पर
Datia Bye Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम आज आएगा। कम मतदान, महिलाओं की घटी भागीदारी, गांवों में अधिक और शहर में कम वोटिंग ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। भाजपा, कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी की प्रतिष्ठा दांव पर है।
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दतिया विधानसभा उपचुनाव का फैसला आज हो जाएगा। यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार, पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक साख, कांग्रेस की वापसी की उम्मीद और आजाद समाज पार्टी की मौजूदगी ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
30 जुलाई को हुए मतदान में 71.42 प्रतिशत वोट पड़े, जो 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में 8.86 प्रतिशत कम रहे। इस बार कुल 19,528 मतदाताओं ने मतदान नहीं किया। सबसे अधिक गिरावट महिला मतदाताओं की भागीदारी में दर्ज हुई। पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 9,500 कम महिलाओं ने मतदान किया, जबकि पुरुष मतदाताओं की संख्या में भी कमी रही। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कम मतदान का फायदा आखिर किसे मिलेगा।
गांव और शहर का मतदान पैटर्न अलग-अलग
बूथवार मतदान के आंकड़े दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। कई गांवों के मतदान केंद्रों पर 80 से 90 प्रतिशत तक वोट पड़े। बूथ क्रमांक 62 पर सबसे अधिक 92.19 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। वहीं, दतिया शहर के कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं ने अपेक्षाकृत कम रुचि दिखाई। बूथ क्रमांक 110 पर केवल 43.20 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पूरे विधानसभा क्षेत्र में सबसे कम रहा। इससे साफ संकेत मिलता है कि इस बार गांव और शहर का मतदान पैटर्न पूरी तरह अलग रहा।
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59 मतदान केंद्रों पर महिलाओं ने पुरुषों से अधिक किया मतदान
पूरे विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 68.49 रहा, जबकि पुरुषों का मतदान 74.05 प्रतिशत दर्ज किया गया। हालांकि 59 मतदान केंद्र ऐसे रहे, जहां महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक मतदान किया। इसके बावजूद कुल महिला मतदान में आई गिरावट ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है।
दोनों दलों को भीतरघात से नुकसान की आशंका
चुनाव मैदान में भाजपा के आशुतोष तिवारी, कांग्रेस के घनश्याम सिंह और आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव आमने-सामने हैं। हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान चर्चा उम्मीदवारों से ज्यादा भाजपा में टिकट परिवर्तन, डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भूमिका और दोनों प्रमुख दलों में भीतरघात की संभावनाओं को लेकर होती रही। भाजपा को सरकार और संगठन की ताकत पर भरोसा है, जबकि कांग्रेस ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ और सत्ता विरोधी माहौल को अपने पक्ष में मान रही है। वहीं, आजाद समाज पार्टी भी कुछ वर्गों के वोटों पर असर डालने की स्थिति में दिखाई दे रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार जीत-हार का अंतर बहुत अधिक नहीं रहेगा। कम मतदान, महिलाओं की घटी भागीदारी, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के अलग-अलग मतदान रुझान तथा स्थानीय समीकरणों ने मुकाबले को पूरी तरह खुला बना दिया है। अब सबकी निगाहें मतगणना पर हैं। कुछ ही घंटों में साफ हो जाएगा कि गांवों का उत्साह भारी पड़ा या शहर की खामोशी ने चुनावी गणित बदल दिया। साथ ही यह भी तय होगा कि दतिया का जनादेश भाजपा के लिए राहत लेकर आएगा या कांग्रेस के लिए नई उम्मीदों का संदेश बनेगा।
