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कोसमी विवाद: सीहोर से पांच हजार आदिवासियों का भोपाल कूच, 17 को सीएम से करेंगे पट्टे और मुआवजे की मांग

Thu, 15 Oct 2026 07:07 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 15 Oct 2026 07:07 PM IST
सार

सीहोर के कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में 5 हजार से अधिक आदिवासी पैदल भोपाल जा रहे हैं।  17 अक्टूबर को प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री से जमीन के पट्टे, मकानों और फसलों के नुकसान का मुआवजा देने की मांग करेंगे।

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MP: Tribal March from Sehore to Bhopal, Protest on October 17 for Land Rights and Compensation
सीहोर से भोपाल के लिए निकले आदिवासी वर्ग के लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में 5000 से अधिक आदिवासी भोपाल की ओर पैदल रवाना हुए हैं। गुरुवार रात उनका पड़ाव कोनाझिर में रहेगा। आंदोलनकारी 17 अक्तूबर को भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अपनी मांगें रखेंगे। वे जमीन से जुड़े दस्तावेज दिखाकर खेती की जमीन के पट्टे देने की मांग करेंगे। 
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पांच दिन धरने के बाद शुरू किया मार्च 
आदिवासियों का यह मार्च कोसमी गांव में पांच दिन तक चले धरने के बाद शुरू हुआ है। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। उनका विरोध 11 अक्तूबर को वन विभाग की कार्रवाई में 12 परिवारों के मकान तोड़े जाने और खेतों में खड़ी फसलें नष्ट किए जाने को लेकर है। इस कार्रवाई पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि उनके क्षेत्र में अन्याय की हद हो गई है। उन्होंने बच्चों को चीखते और महिलाओं को दर्द से कराहते हुए देखने की बात कही थी।
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दिग्विजय ने उठाई न्यायिक जांच की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधनी के आदिवासी इलाकों में वर्ष 2004 से अब तक वन भूमि पर हुए कब्जों की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान के आदिवासी क्षेत्रों में पदयात्राएं शुरू करने के बाद बड़े पैमाने पर जंगल कटवाकर लोगों को अवैध कब्जे दिलाए गए। ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

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35 से अधिक गांवों के लोग आंदोलन में शामिल
आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के आदिवासी इस मार्च में शामिल हैं। इनमें महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी हैं। इटावा खुर्द, नवलगांव, भीलखेड़ा, कुरी, बसंतपुर और लवापानी सहित कई गांवों के लोगों ने खेती करने से रोके जाने की शिकायत की है। आदिवासी नेताओं ने विदिशा जिले के ग्यारसपुर, लटेरी, सिरोंज और शमशाबाद क्षेत्रों में भी बेदखली और फसलें बर्बाद किए जाने के मामले उठाए हैं। उनका दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के घर भी तोड़े गए थे।

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अधिकारियों से बातचीत बेनतीजा
14 अक्तूबर को संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. और एसपी सोनाक्षी सक्सेना सहित अन्य अधिकारी कोसमी पहुंचे थे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत करने की कोशिश की। परिवार पंचायत भवन जाने को तैयार नहीं हुए। बाद में उनके दो प्रतिनिधियों ने अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन विवाद का समाधान नहीं निकल सका। संभागायुक्त ने मौके का निरीक्षण करने और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कही थी।

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जांच रिपोर्ट में पौधे काटने और अतिक्रमण का दावा
वन विकास निगम और सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में संबंधित जमीन पर अतिक्रमण किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वन विकास निगम ने वर्ष 2021 में 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3.37 लाख से अधिक सागौन के पौधे लगाए थे। जांच में 78,700 पौधे काटे जाने और आरक्षित वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट 426 में 31.48 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण का दावा किया गया है। रिपोर्ट में पुराने गूगल अर्थ चित्रों और ड्रोन फुटेज का भी हवाला दिया गया है। इसके मुताबिक, वर्ष 2021 तक जमीन खाली थी, जबकि 2022 से वहां झोपड़ियां बनाने और खेती करने की गतिविधियां शुरू हुईं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि संबंधित परिवारों के मूल गांव सिंधपुर और हल्लिब नगर में पक्के मकान और मतदाता पहचान पत्र मौजूद हैं।
 
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