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नाबालिग जनजाति लड़की अपहरण मामले में ढिलाई पर NCST सख्त, MP पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल/खरगोन
Published by: Ashutosh Pratap Singh
Updated Wed, 22 Apr 2026 08:48 PM IST
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सार
नई दिल्ली में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने नाबालिग जनजाति लड़की के अपहरण और उत्पीड़न मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई।
NCST की मध्य प्रदेश पुलिस को फटकार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नई दिल्ली में 22 अप्रैल 2026 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) में एक नाबालिग जनजाति लड़की के अपहरण और उत्पीड़न के मामले की उच्च स्तरीय सुनवाई हुई। इस दौरान आयोग ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई और आरोपी की गिरफ्तारी में देरी को लेकर सवाल उठाए।
सुनवाई में कौन-कौन रहा मौजूद
इस सुनवाई में आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, आयोग के सलाहकार एवं पूर्व न्यायाधीश प्रकाश उईके, मध्य प्रदेश और केरल के डीजीपी व एसपी, अधिवक्ता प्रथम दुबे, अधिवक्ता इंद्रेशजी सोनकर और पीड़िता के माता-पिता उपस्थित रहे। सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष और सलाहकार ने मध्य प्रदेश और केरल पुलिस से तीखे सवाल किए कि अब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। मध्य प्रदेश पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी पर केरल हाईकोर्ट द्वारा अस्थायी रोक लगाई गई है।
आयोग की नाराजगी और लापरवाही पर सवाल
आयोग ने कहा कि चार बार जवाब मांगने के बावजूद मध्य प्रदेश पुलिस अब तक केरल हाईकोर्ट को मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई है, जिससे जांच में देरी हो रही है। आयोग ने यह भी माना कि जनजाति समुदाय की नाबालिग बच्ची के मामले में संवेदनहीन रवैया अपनाया गया है।
लुकआउट नोटिस और जांच पर सवाल
सुनवाई में यह भी सामने आया कि नाबालिग लड़की के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है, लेकिन आरोपी के खिलाफ अब तक ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं हुआ है। इसके अलावा मध्य प्रदेश पुलिस की केरल से लौटने वाली टीम से भी आयोग ने सवाल किए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
ये भी पढ़ें- Jabalpur News: दिव्यांग बच्चों को स्कूल से निकालने पर रोक, हाईकोर्ट ने डीईओ से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
केरल पुलिस की भूमिका
केरल पुलिस ने आयोग को आश्वासन दिया कि वे मामले में हर संभव सहयोग करेंगे और आरोपी की गिरफ्तारी तथा नाबालिग की तलाश में पूरा सहयोग दिया जाएगा। आयोग ने निर्देश दिए कि मध्य प्रदेश पुलिस 24 घंटे के भीतर केरल हाईकोर्ट के समक्ष सभी जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करे और अस्थायी रोक से जुड़े तथ्य स्पष्ट करे। साथ ही केरल पुलिस को निर्देश दिया गया कि वह मामले में पूरी सक्रियता से सहयोग करे और आरोपी की गिरफ्तारी में मदद करे।
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सुनवाई में कौन-कौन रहा मौजूद
इस सुनवाई में आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य, आयोग के सलाहकार एवं पूर्व न्यायाधीश प्रकाश उईके, मध्य प्रदेश और केरल के डीजीपी व एसपी, अधिवक्ता प्रथम दुबे, अधिवक्ता इंद्रेशजी सोनकर और पीड़िता के माता-पिता उपस्थित रहे। सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष और सलाहकार ने मध्य प्रदेश और केरल पुलिस से तीखे सवाल किए कि अब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। मध्य प्रदेश पुलिस ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी पर केरल हाईकोर्ट द्वारा अस्थायी रोक लगाई गई है।
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आयोग की नाराजगी और लापरवाही पर सवाल
आयोग ने कहा कि चार बार जवाब मांगने के बावजूद मध्य प्रदेश पुलिस अब तक केरल हाईकोर्ट को मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई है, जिससे जांच में देरी हो रही है। आयोग ने यह भी माना कि जनजाति समुदाय की नाबालिग बच्ची के मामले में संवेदनहीन रवैया अपनाया गया है।
लुकआउट नोटिस और जांच पर सवाल
सुनवाई में यह भी सामने आया कि नाबालिग लड़की के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया है, लेकिन आरोपी के खिलाफ अब तक ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं हुआ है। इसके अलावा मध्य प्रदेश पुलिस की केरल से लौटने वाली टीम से भी आयोग ने सवाल किए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
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केरल पुलिस की भूमिका
केरल पुलिस ने आयोग को आश्वासन दिया कि वे मामले में हर संभव सहयोग करेंगे और आरोपी की गिरफ्तारी तथा नाबालिग की तलाश में पूरा सहयोग दिया जाएगा। आयोग ने निर्देश दिए कि मध्य प्रदेश पुलिस 24 घंटे के भीतर केरल हाईकोर्ट के समक्ष सभी जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करे और अस्थायी रोक से जुड़े तथ्य स्पष्ट करे। साथ ही केरल पुलिस को निर्देश दिया गया कि वह मामले में पूरी सक्रियता से सहयोग करे और आरोपी की गिरफ्तारी में मदद करे।

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