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भोपाल की झीलों पर NGT का शिकंजा: 3 महीने में हटेंगे अवैध निर्माण,नालों पर लगेंगे कैमरे,लापरवाह अफसरों पर सख्ती

Tue, 01 Sep 2026 06:04 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Tue, 01 Sep 2026 06:04 PM IST
सार

भोज वेटलैंड में अतिक्रमण, अवैध निर्माण और सीवेज प्रदूषण पर एनजीटी ने सख्ती दिखाई है। एफटीएल से शहरी क्षेत्र में 50 और ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर तक निर्माण पर रोक रहेगी और अवैध निर्माण तीन महीने में हटाने होंगे। नालों पर कैमरे व प्रवाह मीटर लगेंगे, बिना उपचारित सीवेज रोकने के लिए शून्य-प्रवाह योजना बनेगी। लापरवाही करने वाले अफसरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।

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NGT cracks down on Bhopal's lakes: Illegal structures to be removed within 3 months, cameras to be installed
एनजीटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोज वेटलैंड में अतिक्रमण, अवैध निर्माण और बिना उपचारित सीवेज के प्रवेश को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की भोपाल पीठ ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। पर्यावरणविद् राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकरण ने बड़ा तालाब, छोटा तालाब और संबंधित जल क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कई अहम आदेश दिए। इसी क्रम में नितिन सक्सेना की याचिका में भी भोज वेटलैंड में अवैध निर्माण और सीवेज प्रदूषण पर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकरण ने माना कि भोज वेटलैंड अवैध अतिक्रमण, निर्माण और प्रदूषित पानी के कारण गंभीर पर्यावरणीय दबाव में है। यह संकट केवल पर्यावरण से जुड़ा नहीं है, बल्कि उन भोपालवासियों की पेयजल जरूरतों से भी जुड़ा है, जो इस जलस्रोत पर निर्भर हैं।
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शहरी क्षेत्र में 50, ग्रामीण में 250 मीटर तक निर्माण पर रोक
एनजीटी ने निर्देश दिया है कि भोज वेटलैंड के फुल टैंक लेवल/हाई फ्लड लेवल से शहरी क्षेत्र में 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर के भीतर किसी भी तरह का स्थायी या अस्थायी निर्माण नहीं होगा। इस दायरे में मौजूद अवैध निर्माणों को कानूनी प्रक्रिया के तहत तीन महीने के भीतर हटाना होगा। इसके साथ ही 2017 के बाद एफटीएल/हाई फ्लड लेवल के 50 मीटर दायरे में किए गए पक्के और कच्चे अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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झील में गंदा पानी गया तो कैमरे खोलेंगे पोल
तालाबों में मिलने वाले प्रमुख नालों के मुहानों और सीवेज पंपिंग स्टेशनों पर पीटीजेड कैमरे और डिजिटल प्रवाह मीटर लगाए जाएंगे। इनसे निकलने वाले छेड़छाड़ रहित आंकड़ों की नियमित जांच मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करेगा। बड़ा और छोटा तालाब में मिलने वाले सभी नालों को चिह्नित कर उन्हें शोधन संयंत्रों की ओर मोड़ने और तालाबों में बिना उपचारित सीवेज का प्रवाह पूरी तरह रोकने के लिए शून्य-प्रवाह कार्ययोजना तैयार करनी होगी। संबंधित विभागों को इसकी कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करनी होगी।
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अफसरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी, लापरवाही मिली तो कार्रवाई
एनजीटी ने सार्वजनिक भूमि या वेटलैंड पर अवैध कब्जे और निर्माण रोकने में नाकाम रहने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव को ऐसे अधिकारियों की पहचान कर कठोर विभागीय कार्रवाई करने को कहा गया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक देरी, लापरवाही या लंबे समय तक कार्रवाई नहीं होने से कोई अवैध निर्माण वैध नहीं हो जाता। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

मलबा, मिट्टी, रेत और सीवेज डालने पर रोक
नगर निगम और संबंधित कलेक्टरों को वेटलैंड संरक्षण नियमों का सख्ती से पालन कराने को कहा गया है। वेटलैंड में अतिक्रमण, गैर-वेटलैंड उपयोग में बदलाव, निर्माण-विध्वंस का मलबा, मिट्टी, रेत और कचरा डालने के साथ बिना उपचारित सीवेज और प्रदूषित पानी छोड़ने पर रोक लागू करनी होगी। मछली पकड़ने के लिए रसायन, कीटनाशक या जहर के इस्तेमाल पर भी रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

केरवा-कलियासोत के एफटीएल पर 7 सदस्यीय समिति
केरवा, कलियासोत और संबंधित जल क्षेत्रों के एफटीएल के अंतिम निर्धारण और सीमांकन के लिए सात सदस्यीय तकनीकी समिति बनाई गई है। समिति को 15 दिन में रिपोर्ट देनी होगी।एफटीएल का वैज्ञानिक निर्धारण भू-स्थान निर्धारण, उपग्रह चित्र, स्थल सत्यापन, दूरसंवेदी तकनीक, ड्रोन सर्वे और वीडियोग्राफी के आधार पर किया जाएगा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समिति की समन्वय एजेंसी बनाया गया है। जल संसाधन विभाग को यह भी निर्देश दिया गया है कि निर्धारित एफटीएल से अधिक जलस्तर होने तक संबंधित जलाशयों के गेट नहीं खोले जाएं। भोज वेटलैंड का सीमांकन और सत्यापन भी उच्च क्षमता वाले ड्रोन से कराया जाएगा। एफटीएल प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर याचिकाकर्ता की मौजूदगी में वेटलैंड का सर्वे कर सीमा का सत्यापन किया जाएगा।

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पूरे प्रदेश के वेटलैंड की होगी निगरानी
एनजीटी ने केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के छोटे जलस्रोतों और वेटलैंड के संरक्षण के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों की अध्यक्षता वाली जिला वेटलैंड संरक्षण समितियां अपने-अपने क्षेत्रों के जलस्रोतों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी। चिन्हित वेटलैंड की सूची सार्वजनिक करने और अतिक्रमण व नियमों के उल्लंघन की शिकायत के लिए आसान व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि झील और प्राकृतिक जलस्रोत जनता के लिए हैं और सरकार उनकी न्यासी है। इसलिए इनके संरक्षण में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

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एमपी में रोज 2183.7 एमएलडी सीवेज, आधी से भी कम क्षमता का उपयोग
एनजीटी ने मध्यप्रदेश में सीवेज प्रबंधन की स्थिति पर भी चिंता जताई है। राज्य में प्रतिदिन 2183.7 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि शोधन क्षमता 1311.99 एमएलडी है। वास्तविक रूप से केवल 696.03 एमएलडी क्षमता का उपयोग हो रहा है।अमृत-2.0 के तहत 7166.93 किलोमीटर सीवर नेटवर्क का काम प्रस्तावित है, लेकिन यह अभी अधूरा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश की 18 नदियों के 36 हिस्से बीओडी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। इनमें चंबल, खान, बेतवा, क्षिप्रा, नर्मदा और कलियासोत शामिल हैं।एनजीटी ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकारों से सीवेज उत्पादन, शोधन संयंत्रों की क्षमता, पुन: उपयोग नीति और चल रही परियोजनाओं की समयसीमा सहित विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।




 
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