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दाल ने बिगाड़ा रसोई का बजट: एक हफ्ते में तुवर 10 रुपए महंगी, चना-मूंग-उड़द-मसूर के भाव भी बढ़े, और बढ़ेगा दाम
Thu, 24 Sep 2026 02:57 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 24 Sep 2026 02:57 PM IST
सार
त्योहारी और शादी के सीजन से पहले दालों के दाम बढ़ने लगे हैं। भोपाल में तुवर दाल सितंबर की शुरुआत के 111 रुपये से बढ़कर 130 रुपये किलो हो गई है। व्यापारियों के अनुसार बढ़ती मांग, सीमित आवक, घटता पुराना स्टॉक, मौसम और आयात लागत इसके प्रमुख कारण हैं।
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दालें
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
त्योहारी सीजन शुरू होते ही दालों की बढ़ती कीमत ने घर का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। भोपाल के थोक बाजार में एक सप्ताह में तुवर दाल करीब 10 रुपये किलो महंगी हो गई। 1 सितंबर से अब तक इसके भाव में करीब 19 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ चना, मूंग, उड़द और मसूर के दाम भी ऊपर गए हैं। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली तुवर दाल करीब एक सप्ताह पहले 119 रुपये किलो थी, जो अब 130 रुपये किलो तक पहुंच गई है। 1 सितंबर को इसका भाव करीब 111 रुपये किलो था।
चना से लेकर मसूर तक बढ़े दाम
दालों में तेजी का असर सिर्फ तुवर तक सीमित नहीं है। सितंबर की शुरुआत की तुलना में चना दाल 76 से बढ़कर 80 रुपये किलो, हरी मूंग 85 से 89 रुपये, मूंग मोगर 91 से 93 रुपये, उड़द मोगर 102 से 105 रुपये और मसूर 73 से 76 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
दाल 1 सितंबर मौजूदा भाव
तुवर 111 रुपये 130 रुपये
चना 76 रुपये 80 रुपये
हरी मूंग 85 रुपये 89 रुपये
मूंग मोगर 91 रुपये 93 रुपये
उड़द मोगर 102 रुपये 105 रुपये
मसूर 73 रुपये 76 रुपये
त्योहार और शादियों से पहले मांग बढ़ी
व्यापारियों के मुताबिक दालों के दाम बढ़ने की बड़ी वजह मांग और उपलब्धता के बीच अंतर है। गणेश उत्सव के बाद नवरात्रि, दीपावली और फिर शादी का सीजन आने वाला है। इन दिनों दालों की खपत बढ़ती है। इसी को देखते हुए व्यापारी और मिलर्स पहले से स्टॉक जुटा रहे हैं। दूसरी ओर उत्पादक राज्यों से मंडियों में आवक सामान्य से कम रहने और पुराना स्टॉक घटने से बाजार में उपलब्धता पर दबाव बना है। नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने में अभी समय है। ऐसे में मांग बढ़ने और माल सीमित रहने से कीमतें ऊपर जा रही हैं।
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यह भी पढ़ें-34 लाख मतदाताओं के नाम हटे: निर्वाचन आयोग घेरेगी कांग्रेस, पटवारी बोले- ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई तक आंदोलन
बारिश से लेकर आयात तक, कई कारण डाल रहे असर
विवेक साहू के अनुसार दालों के भाव केवल स्थानीय मांग से तय नहीं हो रहे हैं। दलहन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश, मौसम, बुवाई और उत्पादन का अनुमान भी बाजार पर असर डाल रहा है। इसके अलावा भारत की आयात जरूरत के कारण म्यांमार और कनाडा जैसे देशों से आने वाली दालों की कीमत और उपलब्धता भी घरेलू बाजार को प्रभावित करती है। आयातित माल की परिवहन और अन्य लागत बढ़ने पर उसका असर थोक बाजार से होते हुए खुदरा कीमतों तक पहुंचता है। यानी बाजार में आने वाला महंगा माल सीधे उपभोक्ता की जेब पर असर डालता है।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में फिर बदला मौसम: दो दिन भारी बारिश का अलर्ट, मानसून की विदाई में 6 दिन बाकी
शक्कर के बाद अब दालों पर नजर
विवेक साहू ने हाल में शक्कर के बाजार में आई तेजी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी हस्तक्षेप और बाजार में उपलब्धता बढ़ने के बाद शक्कर के दाम नीचे आए। उनका कहना है कि दालों में भी यदि पर्याप्त बफर स्टॉक खुले बाजार में उतारा जाए तो कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है। फिलहाल तुवर में एक सप्ताह में 10 रुपये और सितंबर में अब तक 19 रुपये की तेजी ने सबसे ज्यादा असर डाला है। आने वाले दिनों में नई फसल की आवक, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और सरकारी कदम यह तय करेंगे कि त्योहारों से पहले दालों के भाव को राहत मिलती है या रसोई का खर्च और बढ़ता है।
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चना से लेकर मसूर तक बढ़े दाम
दालों में तेजी का असर सिर्फ तुवर तक सीमित नहीं है। सितंबर की शुरुआत की तुलना में चना दाल 76 से बढ़कर 80 रुपये किलो, हरी मूंग 85 से 89 रुपये, मूंग मोगर 91 से 93 रुपये, उड़द मोगर 102 से 105 रुपये और मसूर 73 से 76 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
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दाल 1 सितंबर मौजूदा भाव
तुवर 111 रुपये 130 रुपये
चना 76 रुपये 80 रुपये
हरी मूंग 85 रुपये 89 रुपये
मूंग मोगर 91 रुपये 93 रुपये
उड़द मोगर 102 रुपये 105 रुपये
मसूर 73 रुपये 76 रुपये
त्योहार और शादियों से पहले मांग बढ़ी
व्यापारियों के मुताबिक दालों के दाम बढ़ने की बड़ी वजह मांग और उपलब्धता के बीच अंतर है। गणेश उत्सव के बाद नवरात्रि, दीपावली और फिर शादी का सीजन आने वाला है। इन दिनों दालों की खपत बढ़ती है। इसी को देखते हुए व्यापारी और मिलर्स पहले से स्टॉक जुटा रहे हैं। दूसरी ओर उत्पादक राज्यों से मंडियों में आवक सामान्य से कम रहने और पुराना स्टॉक घटने से बाजार में उपलब्धता पर दबाव बना है। नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने में अभी समय है। ऐसे में मांग बढ़ने और माल सीमित रहने से कीमतें ऊपर जा रही हैं।
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बारिश से लेकर आयात तक, कई कारण डाल रहे असर
विवेक साहू के अनुसार दालों के भाव केवल स्थानीय मांग से तय नहीं हो रहे हैं। दलहन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश, मौसम, बुवाई और उत्पादन का अनुमान भी बाजार पर असर डाल रहा है। इसके अलावा भारत की आयात जरूरत के कारण म्यांमार और कनाडा जैसे देशों से आने वाली दालों की कीमत और उपलब्धता भी घरेलू बाजार को प्रभावित करती है। आयातित माल की परिवहन और अन्य लागत बढ़ने पर उसका असर थोक बाजार से होते हुए खुदरा कीमतों तक पहुंचता है। यानी बाजार में आने वाला महंगा माल सीधे उपभोक्ता की जेब पर असर डालता है।
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शक्कर के बाद अब दालों पर नजर
विवेक साहू ने हाल में शक्कर के बाजार में आई तेजी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी हस्तक्षेप और बाजार में उपलब्धता बढ़ने के बाद शक्कर के दाम नीचे आए। उनका कहना है कि दालों में भी यदि पर्याप्त बफर स्टॉक खुले बाजार में उतारा जाए तो कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है। फिलहाल तुवर में एक सप्ताह में 10 रुपये और सितंबर में अब तक 19 रुपये की तेजी ने सबसे ज्यादा असर डाला है। आने वाले दिनों में नई फसल की आवक, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और सरकारी कदम यह तय करेंगे कि त्योहारों से पहले दालों के भाव को राहत मिलती है या रसोई का खर्च और बढ़ता है।
