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भाेपाल ननि के सॉफ्टवेयर पर उठे सवाल: ऑडिट में धांधली की आशंका; लोकायुक्त की कार्रवाई से मामला फिर चर्चा में

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Mon, 16 Mar 2026 10:39 AM IST
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सार

नगर निगम भोपाल में वित्तीय व्यवस्थाओं और सॉफ्टवेयर सिस्टम को लेकर नए सवाल उठे हैं। स्थानीय निधि संपरीक्षा 2024 की रिपोर्ट में वसूली प्रक्रिया और सॉफ्टवेयर संचालन में संभावित गड़बड़ियों की आशंका जताई गई है, वहीं हालिया लोकायुक्त कार्रवाई के बाद मामला फिर चर्चा में आ गया है।

Questions raised about Bhopal Municipal Corporation's software: Audit fraud suspected; Lokayukta action brings
नगर निगम भोपाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नगर निगम भोपाल में वित्तीय व्यवस्थाओं और सॉफ्टवेयर संचालन को लेकर पहले से उठ रहे सवाल अब फिर चर्चा में आ गए हैं। स्थानीय निधि संपरीक्षा 2024 की रिपोर्ट में निगम द्वारा उपयोग किए जा रहे सॉफ्टवेयर के प्रमाणीकरण और वसूली प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। वहीं, हाल ही में लोकायुक्त द्वारा फर्जी बिल मामले में नगर निगम के एक वित्त अधिकारी को आरोपी बनाए जाने के बाद इस रिपोर्ट को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
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सॉफ्टवेयर प्रणाली में खामियों की आशंका
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि नगर निगम भोपाल में उपभोक्ताओं से आय संग्रहण और उसकी रसीदों का संचालन नए सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जा रहा है। इससे पहले यह प्रक्रिया ई-नगर पालिका सॉफ्टवेयर से संचालित होती थी। ऑडिट में यह सवाल उठाया गया है कि पुराने सॉफ्टवेयर से नए सॉफ्टवेयर में डाटा माइग्रेशन त्रुटिरहित हुआ है या नहीं, इसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। संपरीक्षा में यह भी सुझाव दिया गया है कि सॉफ्टवेयर की नियमित रूप से किसी सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि आय वसूली और रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे।

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सोर्स कोड और एडमिन अधिकार पर भी सवाल
रिपोर्ट में कहा गया है कि नगर निगम को सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड संबंधित एजेंसी से प्राप्त कर लेना चाहिए, जिससे भविष्य में किसी प्रकार के बदलाव या विवाद की स्थिति न बने। इसके साथ ही मांग और वसूली से जुड़े सॉफ्टवेयर में एडमिन स्तर के परिवर्तन बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के न किए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी सलाह दी गई है।

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सुरक्षा ऑडिट कराने की अनुशंसा
स्थानीय निधि संपरीक्षा में यह भी कहा गया है कि सॉफ्टवेयर में किए जाने वाले किसी भी परिवर्तन का समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और हर वर्ष इसकी जांच किसी सक्षम एजेंसी से कराई जाए, ताकि वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे।

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पेनल्टी गणना में भी सामने आई खामी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नए सॉफ्टवेयर से आय के अनुलेखन के दौरान कुछ मामलों में पेनल्टी और अधिभार की गणना निर्देशों के अनुरूप नहीं हो रही थी। इससे यह आशंका जताई गई कि निर्धारित राशि से कम वसूली हो सकती है। ऑडिट रिपोर्ट में एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि जोन क्रमांक 14 के वार्ड 60 में 24 नवंबर 2022 को चालान संबंधी तीन रसीदों में जमा और कटौती की तारीखों में विसंगति पाई गई। इस प्रकार की गड़बड़ी को सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न के रूप में देखा गया है।

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लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद बढ़ी चर्चा
हाल ही में लोकायुक्त द्वारा नगर निगम भोपाल के एक वित्त अधिकारी को फर्जी बिल प्रकरण में आरोपी बनाए जाने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। आरोप है कि फर्जी बिल बनाकर बिना कार्य कराए ही करोड़ों रुपये का भुगतान निकाल लिया गया। ऐसे में स्थानीय निधि संपरीक्षा की रिपोर्ट में दर्ज सॉफ्टवेयर और वसूली व्यवस्था से जुड़े सवालों को भी अब जांच से जोड़कर देखा जा रहा है। 

सभी बिंदुओं की जांच कराएंगे 
भोपाल नगर निगम की महापौर मालती राय ने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले पर विचार किया जा रहा है। महापौर ने यह भी कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में सॉफ्टवेयर की खामियों को लेकर जो बातें सामने आई हैं, उनकी भी विस्तृत जांच कराई जाएगी।
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