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पूर्व मिस पुणे की मौत या हत्या? शादी के पांच महीने बाद फंदे पर मिली ट्विशा, मौत की कहानी ने हिला दिया भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: हिमांशु सिंह
Updated Sun, 17 May 2026 09:53 PM IST
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सार
Twisha Sharma Death Case: पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा आखिर फंदे तक कैसे पहुंचीं? दिसंबर 2025 में वकील समर्थ सिंह से शादी के बाद क्या हुआ? रिटायर्ड जज सास-ससुर पर परिजनों ने जबरन गर्भपात, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप क्यों लगाए?
पूर्व मिस पुणे ट्विशा शर्मा की मौत में एसआईटी गठित
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में पूर्व मिस पुणे रह चुकी 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत ने पूरे देश में सनसनी फैला दी है। दिसंबर 2025 में एडवोकेट समर्थ सिंह से शादी करने वाली ट्विशा का शव 12 मई की रात उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला। मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि पति समर्थ सिंह पेशे से वकील हैं और उनके माता-पिता रिटायर्ड जज रह चुके हैं। ट्विशा के परिवार ने इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या करार दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जबरन गर्भपात, शरीर पर चोटों के निशान और मौत से पहले की आखिरी कॉल जैसे कई तथ्य अब इस मामले को और रहस्यमयी बना रहे हैं। परिवार एसआईटी या सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा हुआ है। आइए पूरा मामला समझते हैं।
शादी के पांच महीने बाद संदिग्ध मौत
ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी एडवोकेट समर्थ सिंह से हुई थी। दोनों की मुलाकात मैट्रिमोनियल साइट और डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। परिवार के मुताबिक शादी के बाद शुरुआती कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे ट्विशा को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। 12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित घर में उनका शव फंदे से लटका मिला।
ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी एडवोकेट समर्थ सिंह से हुई थी। दोनों की मुलाकात मैट्रिमोनियल साइट और डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी। परिवार के मुताबिक शादी के बाद शुरुआती कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे ट्विशा को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। 12 मई की रात कटारा हिल्स स्थित घर में उनका शव फंदे से लटका मिला।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल
मामले में सबसे बड़ा मोड़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट से आया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ट्विशा करीब दो महीने की गर्भवती थीं और मौत से करीब एक सप्ताह पहले उनका मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कराया गया था। मायके पक्ष का आरोप है कि यह गर्भपात उनकी इच्छा के खिलाफ कराया गया और इसके लिए उन पर दबाव बनाया गया।
मामले में सबसे बड़ा मोड़ पोस्टमार्टम रिपोर्ट से आया। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ट्विशा करीब दो महीने की गर्भवती थीं और मौत से करीब एक सप्ताह पहले उनका मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कराया गया था। मायके पक्ष का आरोप है कि यह गर्भपात उनकी इच्छा के खिलाफ कराया गया और इसके लिए उन पर दबाव बनाया गया।
चरित्र पर सवाल और मानसिक प्रताड़ना
ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया कि गर्भवती होने के बाद पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह ने ट्विशा के चरित्र पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। परिवार का कहना है कि पति अक्सर कहता था कि 'यह बच्चा मेरा नहीं है।' लगातार अपमान और मानसिक प्रताड़ना ने ट्विशा को गहरे तनाव में डाल दिया था।
शरीर पर चोटों के मिले निशान
शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी को मौत का कारण बताया गया है, लेकिन साथ ही शरीर पर कई एंटीमॉर्टम इंजरी यानी मौत से पहले लगी चोटों का भी जिक्र है। हाथ, कान और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान मिलने से परिवार ने आशंका जताई है कि ट्विशा के साथ मारपीट की गई और बाद में मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश हुई।
ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया कि गर्भवती होने के बाद पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह ने ट्विशा के चरित्र पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। परिवार का कहना है कि पति अक्सर कहता था कि 'यह बच्चा मेरा नहीं है।' लगातार अपमान और मानसिक प्रताड़ना ने ट्विशा को गहरे तनाव में डाल दिया था।
शरीर पर चोटों के मिले निशान
शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी को मौत का कारण बताया गया है, लेकिन साथ ही शरीर पर कई एंटीमॉर्टम इंजरी यानी मौत से पहले लगी चोटों का भी जिक्र है। हाथ, कान और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान मिलने से परिवार ने आशंका जताई है कि ट्विशा के साथ मारपीट की गई और बाद में मामले को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश हुई।
नौकरी छोड़ने के बाद बढ़ा विवाद
परिवार के मुताबिक ट्विशा एक आत्मनिर्भर महिला थीं और शादी के बाद भोपाल में पति के साथ रहने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्हें 'बेकार' कहकर ताने दिए जाने लगे। आरोप है कि पति और ससुराल वाले उनके पिता द्वारा दिए गए करीब 20 लाख रुपये के शेयर और निवेश अपने नाम कराने का दबाव बना रहे थे। परिवार ने इसे दहेज प्रताड़ना और आर्थिक शोषण बताया है।
परिवार के मुताबिक ट्विशा एक आत्मनिर्भर महिला थीं और शादी के बाद भोपाल में पति के साथ रहने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्हें 'बेकार' कहकर ताने दिए जाने लगे। आरोप है कि पति और ससुराल वाले उनके पिता द्वारा दिए गए करीब 20 लाख रुपये के शेयर और निवेश अपने नाम कराने का दबाव बना रहे थे। परिवार ने इसे दहेज प्रताड़ना और आर्थिक शोषण बताया है।
मौत से पहले मां और भाई को किया था फोन
परिवार का दावा है कि मौत से करीब 10 मिनट पहले ट्विशा ने अपनी मां और भाई को फोन किया था। कॉल पर वह रो रही थीं और कहा था कि 'अब और सहन नहीं होता।' बताया जा रहा है कि ट्विशा भोपाल छोड़कर नोएडा लौटने की तैयारी कर चुकी थीं और रेलवे टिकट भी बुक करा लिया था। इसके कुछ मिनट बाद ही सास का फोन आया कि ट्विशा ने फांसी लगा ली है।
सीबीआई जांच की मांग
चूंकि आरोपी परिवार न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है, इसलिए ट्विशा के परिजनों ने स्थानीय पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि प्रभाव के चलते पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही। इसी वजह से परिवार ने मध्य प्रदेश से बाहर सीबीआई जांच की मांग की है। वहीं, सास को अग्रिम जमानत मिलने के बाद परिवार ने शव लेने से इनकार करते हुए दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग उठाई है।
परिवार का दावा है कि मौत से करीब 10 मिनट पहले ट्विशा ने अपनी मां और भाई को फोन किया था। कॉल पर वह रो रही थीं और कहा था कि 'अब और सहन नहीं होता।' बताया जा रहा है कि ट्विशा भोपाल छोड़कर नोएडा लौटने की तैयारी कर चुकी थीं और रेलवे टिकट भी बुक करा लिया था। इसके कुछ मिनट बाद ही सास का फोन आया कि ट्विशा ने फांसी लगा ली है।
सीबीआई जांच की मांग
चूंकि आरोपी परिवार न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है, इसलिए ट्विशा के परिजनों ने स्थानीय पुलिस जांच पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि प्रभाव के चलते पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही। इसी वजह से परिवार ने मध्य प्रदेश से बाहर सीबीआई जांच की मांग की है। वहीं, सास को अग्रिम जमानत मिलने के बाद परिवार ने शव लेने से इनकार करते हुए दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग उठाई है।
सीएम हाउस पहुंचे परिजन
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में महिला थाना ने जीरो एफआईआर लेने से इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि मीडिया में मामला सामने आने के बाद 15 मई की रात केस दर्ज किया गया। परिवार ने यह भी कहा कि त्विषा की मौत की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई, जबकि पुलिस और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी थी कि परिवार को तुरंत सूचना दी जाती। जांच प्रक्रिया को लेकर भी परिवार ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
ये भी पढ़ें- Twisha Sharma Case: पांच दिन से मर्चुरी में ट्विशा का शव, एम्स ने खड़े किए हाथ; अब कोर्ट तय करेगा अगला कदम
आरोपी पक्ष के परिचित बड़े-बड़े पदों पर
परिवार का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को पर्याप्त समय दिया, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी पर भी परिजनों ने भरोसा नहीं जताया है। उनका कहना है कि जांच उन्हीं अधिकारियों के दायरे में हो रही है, जिनकी भूमिका पर पहले से सवाल उठ रहे हैं। परिवार ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र एसआईटी बनाकर मामले की जांच कराई जाए। परिजनों ने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष के परिचित बड़े बड़े पदों पर बैठे है, वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे केवल निष्पक्ष जांच और न्याय चाहते हैं।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में महिला थाना ने जीरो एफआईआर लेने से इनकार कर दिया था। उनका कहना है कि मीडिया में मामला सामने आने के बाद 15 मई की रात केस दर्ज किया गया। परिवार ने यह भी कहा कि त्विषा की मौत की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी गई, जबकि पुलिस और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी थी कि परिवार को तुरंत सूचना दी जाती। जांच प्रक्रिया को लेकर भी परिवार ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
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आरोपी पक्ष के परिचित बड़े-बड़े पदों पर
परिवार का आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को पर्याप्त समय दिया, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी पर भी परिजनों ने भरोसा नहीं जताया है। उनका कहना है कि जांच उन्हीं अधिकारियों के दायरे में हो रही है, जिनकी भूमिका पर पहले से सवाल उठ रहे हैं। परिवार ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र एसआईटी बनाकर मामले की जांच कराई जाए। परिजनों ने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष के परिचित बड़े बड़े पदों पर बैठे है, वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे केवल निष्पक्ष जांच और न्याय चाहते हैं।
साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने पुलिस अधिकारियों को आवेदन देकर घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है। शनिवार को परिजन पुलिस कमिश्नर से भी मिले थे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। पुलिस का कहना है कि दोबारा पोस्टमार्टम को लेकर कानूनी राय ली जा रही है और अंतिम निर्णय न्यायालय के निर्देश के अनुसार होगा। इस पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस ने छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया है, जो सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस टीम की कमान एसीपी रजनीश कश्यप को सौंपी गई है, जबकि टीम में एक महिला पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया गया है। पुलिस ने बताया कि एसआईटी दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मौत के बाद सबूत मिटाने की कोशिश जैसे सभी पहलुओं की जांच करेगी।
सचिवालय के अधिकारियों ने माना पीएम और जांच दूसरे राज्य में हो
ट्विशा के परिजन से सीएम सचिवालय के अधिकारियों से मुलाकात के बाद सीएम हाउस से बाहर निकलने के बाद मीडिया से कहा कि अधिकारियों को हमने बताया है कि आरोपी पक्ष का न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेप हो सकता है। पुलिस भी उन पर हाथ डालने से कतरा रही है। ऐसे में जांच और पीएम दिल्ली में कराया जाए। मृतका के पिता ने कहा कि सीएम सचिवालय के अधिकारियों ने भी माना कि पीएम और जांच दूसरे राज्य में हो, तभी परिजनों को विश्वास होगा। हालांकि अभी कोई आदेश-निर्देश इस तरह के पुलिस अधिकारियों ने दिए नहीं हैं। ट्विशा के परिजन कई घंटे तक सीएम हाउस के बाहर भरी दोपहरी में प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग करते रहे।
ये भी पढ़ें- MP News: सीएम हाउस पहुंचे ट्विशा के परिजनों ने किया हंगामा, बोले-एमपी में न्याय का भरोसा नहीं, एसआईटी पर सवाल
ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने पुलिस अधिकारियों को आवेदन देकर घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है। शनिवार को परिजन पुलिस कमिश्नर से भी मिले थे और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। पुलिस का कहना है कि दोबारा पोस्टमार्टम को लेकर कानूनी राय ली जा रही है और अंतिम निर्णय न्यायालय के निर्देश के अनुसार होगा। इस पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस ने छह सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया है, जो सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस टीम की कमान एसीपी रजनीश कश्यप को सौंपी गई है, जबकि टीम में एक महिला पुलिस अधिकारी को भी शामिल किया गया है। पुलिस ने बताया कि एसआईटी दहेज प्रताड़ना, मारपीट और मौत के बाद सबूत मिटाने की कोशिश जैसे सभी पहलुओं की जांच करेगी।
सचिवालय के अधिकारियों ने माना पीएम और जांच दूसरे राज्य में हो
ट्विशा के परिजन से सीएम सचिवालय के अधिकारियों से मुलाकात के बाद सीएम हाउस से बाहर निकलने के बाद मीडिया से कहा कि अधिकारियों को हमने बताया है कि आरोपी पक्ष का न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेप हो सकता है। पुलिस भी उन पर हाथ डालने से कतरा रही है। ऐसे में जांच और पीएम दिल्ली में कराया जाए। मृतका के पिता ने कहा कि सीएम सचिवालय के अधिकारियों ने भी माना कि पीएम और जांच दूसरे राज्य में हो, तभी परिजनों को विश्वास होगा। हालांकि अभी कोई आदेश-निर्देश इस तरह के पुलिस अधिकारियों ने दिए नहीं हैं। ट्विशा के परिजन कई घंटे तक सीएम हाउस के बाहर भरी दोपहरी में प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग करते रहे।
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सोमवार को कोर्ट जाएगी पुलिस
इधर, भोपाल एम्स ने पुलिस को ईमेल भेजकर कहा है कि पांच दिन से शव मर्चुरी में रखा है। गर्मी का मौसम चल रहा है। प्रतिदिन शव आते हैं ऐसे में हम अधिक दिन तक ट्विशा के शव को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं। आप शव की व्यवस्था करें। एम्स के इस तरह के ईमेल के बाद भोपाल पुलिस सोमवार को भोपाल जिला अदालत में आवेदन लगाने जा रही है। बताया जाता है कि पुलिस अदालत को बताएगी कि मायके वाले शव नहीं ले रहे हैं, क्योंकि वह दोबारा पीएम कराए जाने की मांग कर रहे हैं। आरोपी पक्ष को शव देने के लिए भी मायके पक्ष वाले राजी नहीं हैं। ऐसे में शव को क्या किया जाए, क्या पुलिस लावारिश शवों की तरह ट्विशा का भी अंतिम संस्कार स्वयं करें। न्यायालय जो भी व्यवस्था देगी, पुलिस उसी आधार पर आगे कार्रवाई करेगी।
पीएम में पुलिस की लापरवाही आई सामने
ट्विशा शर्मा की पोस्टमार्टम को लेकर कटारा हिल्स थाना पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कानून के अनुसार जिस फंदे से मौत होती है, उसे शव के साथ अस्पताल को सौंपना होता है, तभी मेडिकोलीगल टीम फंदे से गले के निशान का मैच करती है। ट्विशा का शव जिस दुपट्टे से लटका हुआ था, पुलिस ने उसे जब्त कर एम्स को नहीं दिया था। शव के साथ अस्पताल को देना होता है पुलिस को लिगेचर (फंदा), लेकिन कटारा हिल्स पुलिस ने बड़ी लापरवाही कर दी। रविवार को पुलिस ने अपनी गलती सुधारते हुए लिगेचर मटेरियल एम्स को दिया है। सोमवार तक लिगेचर की रिपोर्ट आने की संभावना है। हालांकि, पुलिस का कहना लिगेचर के बिना मौत कारण को लेकर रिपोर्ट दी जा सकती है।
ये भी पढ़ें- MP: भोपाल में त्विषा शर्मा की मौत मामले की जांच के लिए SIT गठित, पूर्व जज और बेटे पर दहेज प्रताड़ना के आरोप
इधर, भोपाल एम्स ने पुलिस को ईमेल भेजकर कहा है कि पांच दिन से शव मर्चुरी में रखा है। गर्मी का मौसम चल रहा है। प्रतिदिन शव आते हैं ऐसे में हम अधिक दिन तक ट्विशा के शव को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं। आप शव की व्यवस्था करें। एम्स के इस तरह के ईमेल के बाद भोपाल पुलिस सोमवार को भोपाल जिला अदालत में आवेदन लगाने जा रही है। बताया जाता है कि पुलिस अदालत को बताएगी कि मायके वाले शव नहीं ले रहे हैं, क्योंकि वह दोबारा पीएम कराए जाने की मांग कर रहे हैं। आरोपी पक्ष को शव देने के लिए भी मायके पक्ष वाले राजी नहीं हैं। ऐसे में शव को क्या किया जाए, क्या पुलिस लावारिश शवों की तरह ट्विशा का भी अंतिम संस्कार स्वयं करें। न्यायालय जो भी व्यवस्था देगी, पुलिस उसी आधार पर आगे कार्रवाई करेगी।
पीएम में पुलिस की लापरवाही आई सामने
ट्विशा शर्मा की पोस्टमार्टम को लेकर कटारा हिल्स थाना पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कानून के अनुसार जिस फंदे से मौत होती है, उसे शव के साथ अस्पताल को सौंपना होता है, तभी मेडिकोलीगल टीम फंदे से गले के निशान का मैच करती है। ट्विशा का शव जिस दुपट्टे से लटका हुआ था, पुलिस ने उसे जब्त कर एम्स को नहीं दिया था। शव के साथ अस्पताल को देना होता है पुलिस को लिगेचर (फंदा), लेकिन कटारा हिल्स पुलिस ने बड़ी लापरवाही कर दी। रविवार को पुलिस ने अपनी गलती सुधारते हुए लिगेचर मटेरियल एम्स को दिया है। सोमवार तक लिगेचर की रिपोर्ट आने की संभावना है। हालांकि, पुलिस का कहना लिगेचर के बिना मौत कारण को लेकर रिपोर्ट दी जा सकती है।
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सोमवार को समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत पर होगी सुनवाई
गिरिबाला सिंह के खिलाफ शुक्रवार को भोपाल पुलिस ने दहेज हत्या का मामला दर्ज किया। इसके बाद गिरिबाला सिंह ने भोपाल जिला अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगा दी। शुक्रवार देर शाम तक चली सुनवई और परिजनों के विरोध के बावजूद जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत से गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई। सिंह को अग्रिम जमानत मिलने के बाद से परिजन और आक्रोशित हो गए और कहने लगे कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी चीजों का उल्लेख नहीं है, इसलिए लिए अग्रिम जमानत मिल गई है। सोमवार 18 मई को ट्विशा के पति और अधिवक्ता समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत पर भोपाल जिला न्यायालय में सुनवाई होनी है। अग्रिम जमानत मिलने के बाद से ही परिजन अधिक आक्रोशित हैं।
गिरिबाला सिंह के खिलाफ शुक्रवार को भोपाल पुलिस ने दहेज हत्या का मामला दर्ज किया। इसके बाद गिरिबाला सिंह ने भोपाल जिला अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी लगा दी। शुक्रवार देर शाम तक चली सुनवई और परिजनों के विरोध के बावजूद जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत से गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई। सिंह को अग्रिम जमानत मिलने के बाद से परिजन और आक्रोशित हो गए और कहने लगे कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी चीजों का उल्लेख नहीं है, इसलिए लिए अग्रिम जमानत मिल गई है। सोमवार 18 मई को ट्विशा के पति और अधिवक्ता समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत पर भोपाल जिला न्यायालय में सुनवाई होनी है। अग्रिम जमानत मिलने के बाद से ही परिजन अधिक आक्रोशित हैं।

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