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Burhanpur News: जिला अस्पताल में नवजात की अदला-बदली, परिजनों का हंगामा, दो नर्सिंग स्टाफ निलंबित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर Published by: बुरहानपुर ब्यूरो Updated Fri, 28 Feb 2025 09:09 AM IST
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सार

एसएनसीयू में दो नवजात शिशुओं की अदला-बदली कर दी गई। ग्राम मैथा निवासी महिला को बेटे की बजाय किसी और की नवजात बेटी सौंप दी गई, जिससे परिजन एक घंटे तक परेशान रहे। विरोध के बाद सही नवजात को सही माता-पिता को सौंपा गया।

Burhanpur News: Newborns swapped in Burhanpur district hospital, two nursing staff suspended
बच्चों की अदला-बदली के बाद परिजनों का हंगामा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर स्थित जिला अस्पताल में गुरुवार को गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया। यहां के एसएनसीयू स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में जन्म के तुरंत बाद नवजात की अदला-बदली कर दी गई थी। इस घटना से दो नवजात बच्चों के परिजन करीब एक घंटे तक परेशान होते रहे। विरोध करने के बाद ही उन्हें उनके सही बच्चे वापस सौंपे गए। इस घोर लापरवाही को लेकर अब अस्पताल प्रबंधन सवालों के घेरे में खड़ा है। इस पर कार्रवाई करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सिसौदिया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो नर्सिंग स्टाफ को हटाने और उनके खिलाफ जांच के आदेश जारी करने की घोषणा की है।

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बुराहनपुर जिले के ग्राम मैथा निवासी एक महिला ने गुरुवार को बेटे को जन्म दिया, लेकिन इस दौरान अस्पताल के एसएनसीयू में इस शिशु की देखभाल के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई। परिवार को बेटे की जगह एक बेटी सौंप दी गई। इस पर महिला के पति ज्ञान सिंह और उनके परिजनों ने आपत्ति जताई। तब स्टाफ ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि यही बच्चा उनका है, लेकिन जब ज्ञान सिंह ने इसका विरोध किया और सबूत मांगे तो मामले की हकीकत सामने आई। दरअसल जिस नवजात बेटी को गलती से दिया गया था वह बुरहानपुर निवासी शोएब नामक व्यक्ति के परिवार की संतान थी। जब परिजनों ने शोर मचाया और अस्पताल प्रशासन पर दबाव बनाया, तब जाकर करीब एक घंटे बाद सही नवजात को सही परिवार को सौंपा गया।

जिला अस्पताल में बच्चों की हुई अदला बदली

पहले भी कई बार हुई लापरवाही
परिजनों और स्थानीय नागरिकों के अनुसार जिला अस्पताल में इस तरह की लापरवाही पहले भी कई बार हो चुकी है। अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के फुट प्रिंट लिए जाते हैं, ताकि पहचान में गलती न हो, लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। सैयद वाजिद जो इस मामले में शोएब के साथ आए थे, उन्होंने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। जिला अस्पताल की अव्यवस्थाएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन को जल्द से जल्द सुधार लाने की जरूरत है।

सिविल सर्जन मोजेश की कार्यशैली पर भी सवाल
इधर इस घटना के सामने आने के बाद जिला अस्पताल प्रशासन पर सवाल खडे़ होने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन लापरवाह हो गया है और नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। वहीं स्थानीय लोगों ने सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार मोजेश की कार्यशैली पर भी सवाल उठाये हैं। यही नहीं जब भी अस्पताल में कोई गंभीर मामला सामने आता है, तब वे फोन तक नहीं उठाते। आवश्यक कार्रवाई करने में भी वे देरी करते हैं।

नोटिस जारी कर दो नर्सिंग स्टाफ को हटाया
वहीं, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी CMHO डॉ. राजेश सिसौदिया ने घटना को लेकर बताया कि नवजात के जन्म के समय ही उनके फुट प्रिंट लिए जाते हैं। फिर भी एसएनसीयू में इस तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए थी। मैंने इस मामले की जानकारी ली है। संबंधित स्टाफ को नोटिस जारी किया जाएगा। फिलहाल तत्काल प्रभाव से दो नर्सिंग स्टाफ को हटा दिया गया है और पूरी घटना की जांच कराई जाएगी।

 

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