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MP: एंबुलेंस न मिलने पर लोडर वाहन से बुजुर्ग को लाया गया अस्पताल, बेटा देता रहा सीआरपी; डॉक्टरों ने मृत बताया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर Published by: छतरपुर ब्यूरो Updated Sat, 28 Feb 2026 06:41 PM IST
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सार

छतरपुर में एम्बुलेंस समय पर न मिलने से 65 वर्षीय बुजुर्ग की मौत का मामला सामने आया है। हार्ट अटैक की आशंका में परिजन उन्हें लोडर वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

Chhatarpur News Elderly man dies due to non availability of ambulance on time Congress questions health system
छतरपुर में एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारण बुजुर्ग की हुई मौत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

छतरपुर में एंबुलेंस उपलब्ध न होने के कारण एक 65 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। परिजन उन्हें हार्ट अटैक की आशंका में लोडर वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। इस मामले पर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार की निंदा की है। हेल्थ सिस्टम को लचर करार दिया है। 

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जानकारी के अनुसार, राजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम तालगांव निवासी जगदीश विश्वकर्मा अपने बेटे संतोष विश्वकर्मा के साथ शहर आए थे। रास्ते में ग्राम बरकोंहाँ के पास अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सीने में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने लगी।

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लोडर वाहन से जिला अस्पताल ले जाया गया
परिजनों का आरोप है कि मौके पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। मजबूरन उन्हें एक लोडर वाहन से जिला अस्पताल ले जाया गया। रास्ते में हालत बिगड़ने पर उनके बेटे ने चलती गाड़ी में ही सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देने की कोशिश की।

मरीज को सीने में दर्द और गंभीर स्थिति में लाया गया था- डॉक्टर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शहर में ट्रैफिक जाम के कारण अस्पताल पहुंचने में भी देरी हुई। कुछ लोगों ने आगे बढ़कर रास्ता साफ कराया, तब वाहन अस्पताल तक पहुंच सका। जिला अस्पताल की ड्यूटी डॉक्टर अदिति अग्रवाल ने बताया कि मरीज को सीने में दर्द और गंभीर स्थिति में लाया गया था। जांच के दौरान उन्हें मृत पाया गया।

सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने कहा कि मरीज को अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि मरीज ‘ब्रॉट डेड’ अवस्था में आया था, यानी अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही उसका निधन हो गया था।

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प्रथम दृष्टया मृत्यु का कारण हृदयाघात (हार्ट अटैक) बताया जा रहा है। हालांकि, वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकता था। जानकारी के अनुसार, परिजन बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही शव को घर ले गए। घटना के बाद शहर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध हो जाती और रास्ता जाम न होता, तो संभव है कि जान बचाई जा सकती थी।

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