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MP: 'आस्था से खिलवाड़ बंद करो', धार्मिक प्रतीकों पर रोक को लेकर धीरेंद्र शास्त्री की कंपनी पर तीखी प्रतिक्रिया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला,छतरपुर/प्रयागराज Published by: Ashutosh Pratap Singh Updated Wed, 22 Apr 2026 08:14 PM IST
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सार

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में 21 से 23 अप्रैल तक चल रही हनुमंत कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने एक चश्मा बनाने वाली कंपनी के कथित ड्रेस कोड पर सवाल उठाए। विवाद की वजह कंपनी द्वारा कर्मचारियों के लिए तिलक, सिंदूर और मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाने की बात सामने आना है।

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बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में चल रही हनुमंत कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने एक चश्मा बनाने वाली कंपनी के कथित ड्रेस कोड को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने धार्मिक प्रतीकों पर कथित रोक को लेकर नाराजगी जताई और हिंदू समाज से एकजुट रहने की अपील की। उनकी कथा 21 से 23 अप्रैल तक जारी रहेगी।
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ड्रेस कोड को लेकर विवाद
विवाद की वजह एक चश्मा बनाने वाली कंपनी द्वारा कर्मचारियों के लिए बनाए गए कथित ड्रेस कोड को बताया जा रहा है, जिसमें तिलक, सिंदूर और मंगलसूत्र जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाने की बात सामने आई है।
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धीरेंद्र शास्त्री का बयान
कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि वे तिलक, सिंदूर और मंगलसूत्र लगाकर काम पर नहीं आ सकते। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जो लोग धार्मिक पहचान से परेशानी रखते हैं, उन्हें भारत में रहने के बजाय कहीं और चले जाना चाहिए।

भारत और आस्था पर टिप्पणी
उन्होंने आगे कहा कि भारत में रहने वाले लोग अगर तिलक, चंदन, राम और हनुमान से दिक्कत रखते हैं, तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत किसी एक का नहीं है, यह सभी का है और आस्था के खिलाफ नियम स्वीकार नहीं किए जा सकते।

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कंपनी को चेतावनी
धीरेंद्र शास्त्री ने संबंधित कंपनी को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी समय है अपने फैसले पर पुनर्विचार कर लें, नहीं तो कानून अपना काम करेगा और सरकार कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने हिंदू समाज से एकजुट होने की अपील की और कहा कि अगर आज तिलक और मंगलसूत्र पर सवाल उठ रहे हैं, तो कल सनातन परंपराओं और धार्मिक ग्रंथों पर भी सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे संगम में तीन नदियां मिलकर एक हो जाती हैं, वैसे ही समाज को जातियों से ऊपर उठकर एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।
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