MP: कुत्ते के काटने के बाद भी निकाला गाय का दूध, मट्ठा पीते ही मचा हड़कंप; 90 से ज्यादा लोगों को लगे इंजेक्शन
छिंदवाड़ा के भैंसादंड गांव में कुत्ते के काटने से बीमार गाय का दूध बरात में मट्ठा बनाकर परोस दिया गया। खुलासे के बाद हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर 90 से अधिक लोगों को एहतियाती इंजेक्शन लगाए।
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विस्तार
छिंदवाड़ा जिले के भैंसादंड गांव में मंगलवार को गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। एक बारात में परोसे गए मट्ठा को लेकर खुलासा हुआ कि वह एक बीमार गाय के दूध से तैयार किया गया था, जिसे कुछ दिन पहले कुत्ते ने काट लिया था।
जानकारी के अनुसार, गाय को करीब एक सप्ताह पहले कुत्ते ने काटा था, जिसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसके बावजूद पशु मालिकों ने दूध निकालना बंद नहीं किया और उसी दूध से मट्ठा तैयार कर बारात में मेहमानों को परोस दिया। मंगलवार को जब गाय की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ी, तब गांव में यह जानकारी फैल गई कि बारात में परोसा गया मट्ठा उसी गाय के दूध से बना था। खबर फैलते ही पूरे गांव में अफरातफरी मच गई।
स्वास्थ्य विभाग ने संभाली कमान
मामले की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उप स्वास्थ्य केंद्र भैंसादंड में विशेष शिविर लगाया। मट्ठा पीने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें एहतियातन रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। अब तक 90 से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित लोगों की संख्या अधिक होने के कारण अतिरिक्त वैक्सीन मंगवाई गई है, ताकि किसी को भी उपचार से वंचित न रहना पड़े।
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घर-घर दी जा रही सूचना
बारात में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने के कारण स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की मदद से घर-घर जाकर लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और उन्हें स्वास्थ्य केंद्र बुलाया जा रहा है। स्थानीय निवासी उमेश सोनी ने बताया कि सभी लोगों तक सूचना पहुंचाना चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन लगातार प्रयास जारी हैं।
लापरवाही पर उठे सवाल
बीमार पशु के दूध का उपयोग करना और उसे सार्वजनिक रूप से परोसना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा और जागरूकता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि जिन लोगों ने मट्ठा का सेवन किया है, वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर जांच और आवश्यक उपचार कराएं। साथ ही, पशुओं के काटने या बीमार होने की स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से इलाज कराने और उनके दूध का उपयोग न करने की सलाह दी गई है। घटना के बाद गांव में स्वास्थ्य को लेकर सतर्कता बढ़ गई है और लोग जागरूक नजर आ रहे हैं। यह घटना बताती है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरे का कारण बन सकती है।
