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बेटी बनी जिले का गौरव: पांढुर्ना की पहली महिला पायलट बनी हर्षिता अग्रवाल, जानें किसने दिया इनके सपनों को पंख
Mon, 13 Jul 2026 08:39 AM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा/पांढुर्ना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा/पांढुर्ना
Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jul 2026 08:39 AM IST
सार
पांढुर्ना की हर्षिता अग्रवाल ने कड़ी मेहनत और लगन के दम पर जिले की पहली महिला पायलट बनने का गौरव हासिल किया है। 200 घंटे से अधिक की सफल उड़ान पूरी करने के बाद उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ पूरे जिले में खुशी की लहर है।
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अपने माता-पिता के साथ हर्षिता।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छिंदवाड़ा से लगे पांढुर्ना से निकलकर बड़े सपनों को सच करने वाली बेटियों की सूची में अब हर्षिता अग्रवाल का नाम भी जुड़ गया है। व्यवसायी परिवार की बेटी हर्षिता ने अपनी लगन, मेहनत और अटूट आत्मविश्वास के दम पर जिले की पहली महिला पायलट बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरे पांढुर्ना और जिले में खुशी का माहौल है।
नगर के व्यवसायी संजय प्रमोद अग्रवाल और गृहिणी जया अग्रवाल की पुत्री हर्षिता ने बचपन से ही कुछ अलग करने का सपना देखा था। जहां अधिकांश छात्र पारंपरिक करियर की ओर बढ़ते हैं, वहीं हर्षिता ने विमान उड़ाने का कठिन रास्ता चुना। परिवार ने उनके सपने पर भरोसा जताया और हर कदम पर उनका साथ दिया। यही विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
200 घंटे से अधिक की सफल उड़ान पूरी की
हर्षिता की प्रारंभिक शिक्षा पांढुर्ना में हुई। इसके बाद उन्होंने कक्षा 10वीं की पढ़ाई सौंसर तथा 11वीं और 12वीं की शिक्षा नागपुर से पूरी की। स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद में एविएशन की पढ़ाई शुरू की। इसके बाद गुजरात के भावनगर स्थित फ्लाइंग अकादमी में प्रशिक्षण लेकर 200 घंटे से अधिक की सफल उड़ान पूरी की और पायलट प्रशिक्षण पूर्ण किया। कठिन तकनीकी प्रशिक्षण, मौसम की चुनौतियों और लगातार अभ्यास के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
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हर्षिता बताती हैं कि उनके दादाजी प्रमोद अग्रवाल और गौतम अग्रवाल ने बचपन से ही उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दी। माता-पिता ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और कभी भी उनके सपनों को सीमित नहीं होने दिया। परिवार के इसी विश्वास ने उन्हें हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी।
ये भी पढ़ें- Ujjain: चतुर्दशी पर निराले रूप में दिखे बाबा महाकाल, भांग के श्रृंगार और ड्रायफ्रूट की माला से सजा दिव्य दरबार
जिले की बेटियों के लिए एक नई प्रेरणा मिली
आज हर्षिता की उपलब्धि पूरे जिले की बेटियों के लिए एक नई प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और परिवार का साथ मिले, तो छोटे शहरों से निकलकर भी आसमान की ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।
हर्षिता की सफलता पर समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षकों, परिजनों और नागरिकों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए इसे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया है। उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ी की बेटियों में नए सपने और नया आत्मविश्वास जगाने का काम करेगी।
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नगर के व्यवसायी संजय प्रमोद अग्रवाल और गृहिणी जया अग्रवाल की पुत्री हर्षिता ने बचपन से ही कुछ अलग करने का सपना देखा था। जहां अधिकांश छात्र पारंपरिक करियर की ओर बढ़ते हैं, वहीं हर्षिता ने विमान उड़ाने का कठिन रास्ता चुना। परिवार ने उनके सपने पर भरोसा जताया और हर कदम पर उनका साथ दिया। यही विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
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200 घंटे से अधिक की सफल उड़ान पूरी की
हर्षिता की प्रारंभिक शिक्षा पांढुर्ना में हुई। इसके बाद उन्होंने कक्षा 10वीं की पढ़ाई सौंसर तथा 11वीं और 12वीं की शिक्षा नागपुर से पूरी की। स्कूल शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद में एविएशन की पढ़ाई शुरू की। इसके बाद गुजरात के भावनगर स्थित फ्लाइंग अकादमी में प्रशिक्षण लेकर 200 घंटे से अधिक की सफल उड़ान पूरी की और पायलट प्रशिक्षण पूर्ण किया। कठिन तकनीकी प्रशिक्षण, मौसम की चुनौतियों और लगातार अभ्यास के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
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हर्षिता बताती हैं कि उनके दादाजी प्रमोद अग्रवाल और गौतम अग्रवाल ने बचपन से ही उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा दी। माता-पिता ने हर परिस्थिति में उनका हौसला बढ़ाया और कभी भी उनके सपनों को सीमित नहीं होने दिया। परिवार के इसी विश्वास ने उन्हें हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी।
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जिले की बेटियों के लिए एक नई प्रेरणा मिली
आज हर्षिता की उपलब्धि पूरे जिले की बेटियों के लिए एक नई प्रेरणा बन गई है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और परिवार का साथ मिले, तो छोटे शहरों से निकलकर भी आसमान की ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।
हर्षिता की सफलता पर समाज के विभिन्न वर्गों, शिक्षकों, परिजनों और नागरिकों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए इसे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया है। उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ी की बेटियों में नए सपने और नया आत्मविश्वास जगाने का काम करेगी।
