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MP Weather Today: एमपी में झमाझम पर ब्रेक, आज 22 जिलों में हल्की बारिश, 16 जुलाई से फिर तेज बारिश की उम्मीद
Mon, 13 Jul 2026 07:09 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Mon, 13 Jul 2026 07:09 AM IST
सार
मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता कमजोर पड़ गई है। पिछले पांच दिन से प्रदेश में भारी बारिश नहीं हुई है। सोमवार को 22 जिलों में हल्की बारिश और बूंदाबांदी का अनुमान है, जबकि भोपाल-इंदौर समेत प्रदेश के बड़े हिस्से में धूप निकल सकती है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 16 जुलाई से नया सिस्टम असर दिखा सकता है और बारिश की रफ्तार फिर बढ़ने के आसार हैं।
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मौसम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में जुलाई की शुरुआत में रफ्तार पकड़ने के बाद मानसून फिलहाल सुस्त पड़ गया है। प्रदेश के करीब 60 प्रतिशत हिस्से में घने मानसूनी बादलों की मौजूदगी कम हुई है। यही वजह है कि पिछले चार से पांच दिन में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई। अगले कुछ दिन भी तेज बरसात के बजाय हल्की फुहारों और रिमझिम का दौर बने रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और आलीराजपुर में बादल छाने के साथ हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत प्रदेश के 33 जिलों में मौसम अपेक्षाकृत खुला रह सकता है। इन क्षेत्रों में धूप निकलने के आसार हैं।
पांच दिन से भारी बारिश गायब
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर है। मानसून को ताकत देने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां या तो कमजोर पड़ चुकी हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर हो गया है। इसी कारण कई इलाकों में बादल और हल्की फुहारें तो हैं, लेकिन तेज बारिश नहीं हो रही। अगले कुछ दिन प्रदेश में रिमझिम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। फिलहाल भारी और अति भारी बारिश की संभावना कम है।
16 जुलाई से सिस्टम के असर के संकेत
मानसून की अगली बड़ी हलचल बंगाल की खाड़ी से शुरू होने की उम्मीद है। 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बनने का अनुमान है। यह सिस्टम यदि निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलता है तो मध्य प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 16 जुलाई से प्रदेश में इस सिस्टम का असर ज्यादा दिखाई देने की संभावना है। प्रशांत महासागर में भी तीन नए सिस्टम बनने के संकेत हैं। इनमें से कोई सिस्टम बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है तो मानसून को फिर मजबूती मिल सकती है।
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बारिश की बढ़त 30% से घटकर सिर्फ 1% रह गई
पांच दिन से तेज बारिश नहीं होने का असर प्रदेश के बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा है। सामान्य से बारिश की बढ़त पहले करीब 30 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर महज एक प्रतिशत रह गई है। प्रदेश में अब तक औसतन 241.8 मिलीमीटर यानी करीब 9.5 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 239.8 मिलीमीटर यानी 9.4 इंच पानी गिरना चाहिए। इस तरह प्रदेश में बारिश सामान्य से सिर्फ एक प्रतिशत अधिक है। मानसून सीजन के कुल कोटे की करीब 25 प्रतिशत बारिश अब तक हो चुकी है।
जुलाई से उम्मीद, इसी महीने बरसता है मानसून का बड़ा हिस्सा
जून में बारिश अपेक्षाकृत कमजोर रही, लेकिन जुलाई मध्य प्रदेश के लिए मानसून का सबसे अहम महीना माना जाता है। सामान्य ट्रेंड के अनुसार पूरे मानसून की करीब एक तिहाई बारिश जुलाई में होती है।
भोपाल में मानसून सीजन की सामान्य बारिश करीब 39 इंच है। इसमें लगभग 14 इंच पानी अकेले जुलाई में गिरता है। जबलपुर में जुलाई के दौरान 17 इंच से ज्यादा बारिश का औसत है। प्रदेश में मानसून के कुल कोटे की करीब 40 प्रतिशत बारिश जुलाई में दर्ज होने का ट्रेंड है।
देवास सबसे आगे, आलीराजपुर में बारिश का सबसे बड़ा घाटा
प्रदेश में बारिश के मामले में देवास सबसे आगे है। यहां सामान्य से 102 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है और अब तक करीब 18 इंच पानी गिर चुका है। हरदा में 15 इंच, जबकि इंदौर और सीहोर में करीब 14 इंच बारिश हुई है। राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक 13.1 इंच पानी गिर चुका है। दूसरी ओर आलीराजपुर में स्थिति सबसे कमजोर है। यहां अब तक करीब सवा दो इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है।
यह भी पढ़ें- जून की कमी जुलाई में पूरी, एमपी में बारिश का 25% कोटा पूरा, आज कई जिलों में बारिश का अलर्ट
25 जिलों में बारिश कम, 30 जिलों में सामान्य से ज्यादा
अनूपपुर, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, रीवा, सागर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, दतिया, धार, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन और शिवपुरी में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। वहीं, आगर-मालवा, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, उज्जैन, विदिशा, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना और सिवनी में सामान्य से ज्यादा पानी गिर चुका है।
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पांच दिन से भारी बारिश गायब
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर है। मानसून को ताकत देने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां या तो कमजोर पड़ चुकी हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर हो गया है। इसी कारण कई इलाकों में बादल और हल्की फुहारें तो हैं, लेकिन तेज बारिश नहीं हो रही। अगले कुछ दिन प्रदेश में रिमझिम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। फिलहाल भारी और अति भारी बारिश की संभावना कम है।
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16 जुलाई से सिस्टम के असर के संकेत
मानसून की अगली बड़ी हलचल बंगाल की खाड़ी से शुरू होने की उम्मीद है। 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बनने का अनुमान है। यह सिस्टम यदि निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलता है तो मध्य प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 16 जुलाई से प्रदेश में इस सिस्टम का असर ज्यादा दिखाई देने की संभावना है। प्रशांत महासागर में भी तीन नए सिस्टम बनने के संकेत हैं। इनमें से कोई सिस्टम बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है तो मानसून को फिर मजबूती मिल सकती है।
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बारिश की बढ़त 30% से घटकर सिर्फ 1% रह गई
पांच दिन से तेज बारिश नहीं होने का असर प्रदेश के बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा है। सामान्य से बारिश की बढ़त पहले करीब 30 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर महज एक प्रतिशत रह गई है। प्रदेश में अब तक औसतन 241.8 मिलीमीटर यानी करीब 9.5 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 239.8 मिलीमीटर यानी 9.4 इंच पानी गिरना चाहिए। इस तरह प्रदेश में बारिश सामान्य से सिर्फ एक प्रतिशत अधिक है। मानसून सीजन के कुल कोटे की करीब 25 प्रतिशत बारिश अब तक हो चुकी है।
जुलाई से उम्मीद, इसी महीने बरसता है मानसून का बड़ा हिस्सा
जून में बारिश अपेक्षाकृत कमजोर रही, लेकिन जुलाई मध्य प्रदेश के लिए मानसून का सबसे अहम महीना माना जाता है। सामान्य ट्रेंड के अनुसार पूरे मानसून की करीब एक तिहाई बारिश जुलाई में होती है।
भोपाल में मानसून सीजन की सामान्य बारिश करीब 39 इंच है। इसमें लगभग 14 इंच पानी अकेले जुलाई में गिरता है। जबलपुर में जुलाई के दौरान 17 इंच से ज्यादा बारिश का औसत है। प्रदेश में मानसून के कुल कोटे की करीब 40 प्रतिशत बारिश जुलाई में दर्ज होने का ट्रेंड है।
देवास सबसे आगे, आलीराजपुर में बारिश का सबसे बड़ा घाटा
प्रदेश में बारिश के मामले में देवास सबसे आगे है। यहां सामान्य से 102 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है और अब तक करीब 18 इंच पानी गिर चुका है। हरदा में 15 इंच, जबकि इंदौर और सीहोर में करीब 14 इंच बारिश हुई है। राजधानी भोपाल में इस सीजन में अब तक 13.1 इंच पानी गिर चुका है। दूसरी ओर आलीराजपुर में स्थिति सबसे कमजोर है। यहां अब तक करीब सवा दो इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है।
यह भी पढ़ें- जून की कमी जुलाई में पूरी, एमपी में बारिश का 25% कोटा पूरा, आज कई जिलों में बारिश का अलर्ट
25 जिलों में बारिश कम, 30 जिलों में सामान्य से ज्यादा
अनूपपुर, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, रीवा, सागर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, दतिया, धार, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन और शिवपुरी में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। वहीं, आगर-मालवा, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, उज्जैन, विदिशा, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना और सिवनी में सामान्य से ज्यादा पानी गिर चुका है।
