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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Court Takes Strict Stance Against MLA Sanjay Pathak Seeks Response on Contempt Proceedings

विधायक संजय पाठक पर कोर्ट सख्त: हाईकोर्ट जज से संपर्क की कोशिश पड़ी भारी, अवमानना का केस दर्ज; जानें मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 02 Apr 2026 02:58 PM IST
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सार

अवैध उत्खनन से जुड़ी याचिका में सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट जज से सीधे संपर्क की कोशिश करने पर भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

Court Takes Strict Stance Against MLA Sanjay Pathak Seeks Response on Contempt Proceedings
संजय पाठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अवैध उत्खनन से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट जज से सीधे संपर्क करने के प्रयास के आरोप में भाजपा विधायक एवं पूर्व राज्य मंत्री संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।

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मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि विधायक से संबंधित एक कंपनी के खिलाफ अवैध उत्खनन को लेकर दायर याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा कर रहे थे।

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याचिका के अनुसार, 1 सितंबर 2025 को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। उन्होंने अपने आदेश में उल्लेख किया था कि विधायक संजय पाठक द्वारा उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, जिससे न्यायिक निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी। इसी कारण उन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हुए पूरे प्रकरण को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।


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याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि इस संबंध में पूर्व में संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विधायक के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि उक्त कृत्य न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।

सुनवाई के दौरान विधायक संजय पाठक की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए याचिका खारिज करने की मांग की गई, लेकिन खंडपीठ ने इसे स्वीकार नहीं किया और अवमानना प्रकरण दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव और पुनीत श्रोती ने पैरवी की।

परिवार से जुड़ी फर्मों पर आरोप
संजय पाठक और उनके परिवार से जुड़ी फर्मों पर आरोप है कि उन्होंने तय सीमा से काफी अधिक आयरन ओर (लौह अयस्क) का खनन किया। जांच में सामने आया कि करीब 84.57 लाख टन अतिरिक्त खनन हुआ। इसके बदले सरकार को 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार रुपए रुपये की राशि वसूलनी है।

 तीन फर्मों को जारी किया गया नोटिस

  1. निर्मला मिनरल्स (परिवार से जुड़ी)
  2. आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन (परिवार से जुड़ी)
  3. पेसिफिक एक्सपोर्टर्स (संचालक: सुमित अग्रवाल)  ये सभी फर्म मध्य प्रदेश के सिहोरा क्षेत्र में खनन कार्य कर रही थीं
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