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Damoh News: चेक बाउंस मामले में शिक्षक को 3 माह की जेल, कोर्ट ने 10 लाख से ज्यादा जुर्माना चुकाने के आदेश दिए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Fri, 22 May 2026 11:34 PM IST
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सार
चेक बाउंस के एक मामले में दमोह कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। इसके तहत एक शिक्षक को तीन माह की जेल और 10 लाख से अधिक राशि परिवादी को लौटाने का आदेश दिया गया है।
चेक बाउंस मामले में शिक्षक को सजा सुनाई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के हटा निवासी एक शिक्षक को चेक बाउंस मामले में बड़ा झटका लगा है। जिला न्यायालय ने आरोपी शिक्षक को तीन माह के साधारण कारावास और 10 लाख से अधिक की प्रतिकर राशि अदा करने का आदेश सुनाया है। फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीर्घा ऐरन की अदालत ने सुनाया।
प्रकरण के अनुसार परिवादी दिनेश चौबे ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019 में आरोपी शिक्षक मूलचंद अहिरवार ने निजी पारिवारिक जरूरत बताकर उनसे 6 लाख 10 हजार रुपए उधार लिए थे। रकम एसबीआई खाते से आरटीजीएस के माध्यम से आरोपी के खाते में ट्रांसफर की गई थी। उस समय परिवादी दमोह-जबलपुर टोल रोड प्रोजेक्ट में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे।
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उधारी चुकाने के लिए आरोपी द्वारा दिया गया चेक 14 जून 2019 को बैंक में लगाया गया लेकिन खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी ने 20 जून 2019 को विधिक नोटिस भेजा, जिसकी रजिस्टर्ड डाक रसीद और अभिस्वीकृति भी न्यायालय में प्रस्तुत की गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपी को 24 जून 2019 को नोटिस प्राप्त हो चुका था, बावजूद इसके नियमानुसार तय अवधि में भुगतान नहीं किया गया। आरोपी पक्ष भुगतान संबंधी कोई ठोस साक्ष्य भी पेश नहीं कर सका।
न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोप को संदेह से परे प्रमाणित मानते हुए आरोपी शिक्षक को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को तीन माह के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ चेक राशि, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, न्यायालय शुल्क और विधिक व्यय सहित कुल 10 लाख 15 हजार 635 रुपए परिवादी को प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।
प्रकरण के अनुसार परिवादी दिनेश चौबे ने अदालत को बताया कि वर्ष 2019 में आरोपी शिक्षक मूलचंद अहिरवार ने निजी पारिवारिक जरूरत बताकर उनसे 6 लाख 10 हजार रुपए उधार लिए थे। रकम एसबीआई खाते से आरटीजीएस के माध्यम से आरोपी के खाते में ट्रांसफर की गई थी। उस समय परिवादी दमोह-जबलपुर टोल रोड प्रोजेक्ट में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि आरोपी को 24 जून 2019 को नोटिस प्राप्त हो चुका था, बावजूद इसके नियमानुसार तय अवधि में भुगतान नहीं किया गया। आरोपी पक्ष भुगतान संबंधी कोई ठोस साक्ष्य भी पेश नहीं कर सका।
न्यायालय ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत आरोप को संदेह से परे प्रमाणित मानते हुए आरोपी शिक्षक को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को तीन माह के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ चेक राशि, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, न्यायालय शुल्क और विधिक व्यय सहित कुल 10 लाख 15 हजार 635 रुपए परिवादी को प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।

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