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Damoh: 'लव जिहाद करने वाले राक्षस, इन्हें खौफनाक सजा मिले', विपिन महाराज बोले- रामायण पाठ्यक्रम में शामिल हो

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Tue, 02 Sep 2025 07:12 PM IST
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सार

दमोह में श्री गणेश महायज्ञ में शामिल होने पहुंचे कथावाचक विपिन बिहारी महाराज ने लव जिहादियों को राक्षस कहा और कड़े दंड की मांग की। उन्होंने रामायण, महाभारत और गीता को शिक्षा में शामिल करने की भी मांग की। 

On the incident of love jihad, Vipin Bihari Maharaj said worldly education is very important
मीडिया से बात करते कथावाचक विपिन बिहारी महाराज।
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विस्तार
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दमोह शहर के धगट चौराहा क्षेत्र में श्री गणेश महायज्ञ का आयोजन चल रहा है, यह बुंदेलखंड का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। इस आयोजन में मंगलवार को बुंदेलखंड के विख्यात कथावाचक विपिन बिहारी महाराज भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में लव जिहादियों को राक्षस कहा और माता-पिता की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया।

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बढ़ते लव जिहाद पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से तो ऐसे राक्षसों को वह दंड देना चाहिए कि दूसरे राक्षसों की रूह कांप जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन घटनाओं में हमारे माता-पिता की भी गलती है। उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जब हमारे बच्चे दो-दो, चार-चार घंटे फोन पर बात कर रहे होते हैं, तो क्या उस वक्त माता-पिता ध्यान नहीं देते कि आखिर हमारा बच्चा दो घंटे किससे बात कर रहा है। अगर, पहली बार में ही माता-पिता कड़ाई से अपने बच्चों पर अंकुश लगा दें, तो लव जिहाद जैसी घटनाएं बंद हो जाएंगी।
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उन्होंने कहा कि कानून ने बच्चों को मन की शादी की अनुमति दी है, लेकिन देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जिसमें बच्चे माता-पिता का दिल दुखा सकें। बच्चों को अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए। संतों के आपसी विरोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह गलत है। सभी सनातनी संतों से आग्रह है कि एक-दूसरे के विरोध के बजाय एक-दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ें, जिससे हमारे सनातन का झंडा और ऊंचा फहरे।

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बच्चों को संस्कारिक शिक्षा देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि जिस शिक्षा में संस्कार नहीं हो, उसे त्याग देना चाहिए। इसलिए संस्कारिक शिक्षा आवश्यक है। मैं तो चाहता हूं कि सरकार पहली से पांचवीं तक के बच्चों को रामायण, पांचवीं से दसवीं तक के बच्चों को महाभारत और उसके बाद की शिक्षा में गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करे। ऐसा होने से समाज में जो विकृति आ रही है, वह अपने आप समाप्त हो जाएगी।

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