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MP: कहानी डॉ. खरे की, रिटायरमेंट के बाद अपनों के बीच रहे, 50 रुपए में इलाज किया; अस्पताल के साथ देह भी दान की

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: दमोह ब्यूरो Updated Tue, 01 Jul 2025 08:34 PM IST
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सार

डॉक्टर खरे का परिवार भोपाल में रहता है, लेकिन उन्होंने क्षेत्र के लोगों की सेवा करने के लिए भोपाल जाना उचित नहीं समझा। आज भी वह अपनी पत्नी के साथ तेंदूखेड़ा में रहकर पचास रुपये में लोगों का उपचार करते हैं।

Retired BMO donated his body to the hospital
मरीजों का इलाज करते डाक्टर
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विस्तार
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एक जुलाई डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है। इस दिन डाक्टरों द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सराहनीय कार्यों को याद किया जाता है। दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में भी एक ऐसे ही एक रिटायर्ड सरकारी डाक्टर हैं जिनके समर्पण को आज हजारों लोग मानते हैं। हम बात कर रहे हैं डाक्टर जेपी खरे की जिन्होंने रिटायर्ड होने के बाद अपनों के बीच रहकर उनकी सेवा करने का संकल्प लिया। साथ ही पचास रुपए में लोगों का इलाज करते हैं। वे अपन अस्पताल और मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए अपनी देह का भी दान कर चुके हैं।  तेंदूखेड़ा में रहने वाले 83 वर्षीय रिटायर्ड बीएमओ डॉक्टर जेपी खरे को लोग नहीं भूल सकते। इसलिए डाक्टर दिवस के अवसर पर सुबह से ही लोग उनकी निजी अस्पताल पहुंचे और उन्हें डॉक्टर दिवस की शुभकामनाएं दी।

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दअरसल, डॉक्टर खरे का परिवार भोपाल में रहता है, लेकिन उन्होंने क्षेत्र के लोगों की सेवा करने के लिए भोपाल जाना उचित नहीं समझा। आज भी वह अपनी पत्नी के साथ तेंदूखेड़ा में रहकर पचास रुपए की फीस लेकर लोगों का उपचार करते हैं। वे यहां पांच बेड वाला एक छोटा सा नर्सिंग होम चलाते हैं। जहां प्रतिदिन पूरे ब्लाक के सैंकड़ों लोग अपना इलाज कराने आते हैं। इसके अलावा सामाजिक कार्यों में भी डॉक्टर जेपी खरे सबसे आगे रहते हैं। चाहे वह सेवा गोवंश से जुड़ी हो या फिर पर्यावरण को लेकर हो। गरीब लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर डॉक्टर खरे के अस्पताल में उनका निशुल्क उपचार किया जाता है। यह काम ये आज से नहीं बल्कि बीस वर्ष से करते आ रहे हैं।
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डॉक्टर जेपी खरे ग्राम धनगौर में संचालित गौशाला की देखरेख भी करते हैं, जहां 100 से अधिक मवेशी हैं। इसके अलावा पिछले तीन वर्ष में उनके द्वारा नगर और गौशाला में 200 से ज्यादा पौधे रोपित किए गए हैं, जो अब पेड़ बन चुके है। नगर और ग्रामीण क्षेत्र के लोग डॉ. खरे का बड़ा सम्मान करते  हैं।

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डॉक्टर जेपी खरे के अनुसार, उनका जन्म तेंदूखेड़ा ब्लाक के ग्राम धनगौर में हुआ है और वह इसी क्षेत्र में रहकर अपने लोगों के बीच उनकी सेवा करके खुश हैं। उन्होंने अपने अस्पताल को गायत्री शक्ति पीठ को दान दे दिया है। उनके न रहने पर अस्पताल का संचालन शक्ति पीठ के द्वारा किया जाएगा। दो साल पहले वे जबलपुर मेडिकल कॉलेज को अपनी देहदान कर चुके हैं। 
 

मरीजों का इलाज करते डाक्टर

 

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