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Datia News: खेत की झोपड़ी बनी चिता; बेटे को छोड़ तरबूज तोड़ने गए माता-पिता, आग में जिंदा जला दो साल का मासूम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया
Published by: दतिया ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2026 07:28 PM IST
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सार
दतिया के जिगना थाना क्षेत्र में खेत की झोपड़ी में लगी आग से दो साल का मासूम ब्रषभान जिंदा जल गया। माता-पिता खेत में काम कर रहे थे, तभी झोपड़ी में आग भड़क उठी। आग में घर का सामान और बाइक भी जल गई। पुलिस आग लगने के कारणों की जांच कर रही है।
झोपडी में दो साल का मासूम जिंदा जला
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विस्तार
दतिया जिले के जिगना थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। सेमला तालाब के किनारे खेत पर बनी झोपड़ी में अचानक भड़की आग ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। झोपड़ी में सो रहा दो साल का मासूम ब्रषभान उर्फ कल्ला आग की लपटों में जिंदा जल गया। जब तक लोग बचाने पहुंचते, पूरी झोपड़ी राख के ढेर में बदल चुकी थी।
हरदेव कुशवाहा अपने परिवार के साथ सेमला तालाब के पास खेत पर झोपड़ी बनाकर रहते हैं। मंगलवार शाम हरदेव पत्नी के साथ खेत में लगे खरबूज और तरबूज तोड़ने गए थे। उनका दो साल का बेटा ब्रषभान झोपड़ी में गहरी नींद में सो रहा था, जबकि बड़ा बेटा बाहर खेल रहा था। इसी बीच झोपड़ी से अचानक धुएं का गुबार उठा। देखते ही देखते आग की लपटों ने पूरी झोपड़ी को अपनी आगोश में ले लिया। बाहर खेल रहे बड़े बेटे की चीख सुनकर खेत में काम कर रहे हरदेव व उनकी पत्नी दौड़े, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग आग बुझाने दौड़े, लेकिन झोपड़ी फूस और लकड़ी की होने से आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को अंदर जाने का मौका ही नहीं मिला। मासूम ब्रषभान को बाहर निकालने की हर कोशिश नाकाम रही। कुछ ही मिनटों में झोपड़ी, घर-गृहस्थी का सारा सामान और एक बाइक जलकर खाक हो गई। आग बुझने के बाद जब परिजन अंदर पहुंचे तो मासूम का शव बुरी तरह झुलसा हुआ मिला। यह मंजर देख मां-बाप बेसुध हो गए। पूरे इलाके में मातम पसर गया।
घटना की सूचना मिलते ही जिगना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मासूम के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थाना प्रभारी ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। चूल्हे की चिंगारी, शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य वजह से आग लगने की आशंका जताई जा रही है।
हरदेव कुशवाहा मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे। खेत पर रखवाली के लिए उन्होंने यह झोपड़ी बनाई थी। हादसे में न सिर्फ उनका लाल छिन गया, बल्कि जिंदगीभर की जमा-पूंजी भी स्वाहा हो गई।

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