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दतिया में बड़ा हादसा टला: स्कूल खुलने से एक घंटे पहले ढही स्कूल की बाउंड्री वॉल, मलबे में दबी कार-बाइक
Tue, 11 Aug 2026 12:45 PM IST
दतिया ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दतिया
Published by: दतिया ब्यूरो
Updated Tue, 11 Aug 2026 12:45 PM IST
सार
दतिया के तलैया मोहल्ले स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-6 की चारदीवारी मंगलवार सुबह करीब 7 बजे लगातार बारिश के चलते भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि स्कूल की पहली पाली शुरू होने से करीब एक घंटे पहले हादसा हुआ, जिससे बच्चों और शिक्षकों की जान बच गई।
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भारी बारिश के चलते गिरी स्कूल की दीवार
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
दतिया जिले में लगातार हो रही बारिश शहर की जर्जर इमारतों के लिए चेतावनी बनकर सामने आई है। तलैया मोहल्ले में स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-6 की लंबी चारदीवारी सुबह-सुबह धराशायी हो गई। गनीमत रही कि हादसा स्कूल लगने से पहले हुआ, वरना तस्वीर कुछ और होती। हादसा सुबह करीब 7 बजे हुआ। रातभर की तेज बारिश से दीवार की नींव में पानी भर गया था। सीलन और कमजोर नींव के कारण दीवार अचानक भरभराकर गिर पड़ी।
हादसे और बच्चों के आने में एक घंटे का फर्क था
स्कूल की पहली पाली सुबह आठ बजे शुरू होती है। यानी हादसे और बच्चों के आने में सिर्फ एक घंटे का फर्क था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दीवार थोड़ी देर बाद गिरती तो जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था। दीवार गिरते ही तेज आवाज के साथ धूल का गुबार उठा। पास में खड़ी एक कार और एक मोटरसाइकिल मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं। दीवार से सटा बिजली का डीपी भी खंभे से टूटकर नीचे आ गिर गया। करंट का खतरा देखते हुए विद्युत विभाग ने तत्काल पूरे तलैया क्षेत्र की बिजली काट दी। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। सड़क पर मलबा और बिजली के तार फैल जाने से कुछ देर के लिए आवागमन भी रुक गया। राहगीर इधर-उधर भागते नजर आए।
शिक्षा विभाग और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची
सूचना मिलते ही स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। स्कूल प्राचार्य ने पूरे परिसर का मुआयना किया और अन्य जर्जर हिस्सों को चिह्नित किया। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने डीपी को हटाकर लाइन दुरुस्त करने का काम शुरू किया। इस हादसे ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया है- मानसून आने से पहले स्कूल भवनों और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई? स्थानीय अभिभावकों का गुस्सा जायज है। उनका कहना है कि हर साल बारिश से पहले जर्जर बिल्डिंग्स की सूची बनती है, मरम्मत के दावे होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य रहती है। आज दीवार गिरी है, कल छत गिर सकती है। तब जिम्मेदारी कौन लेगा?
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ये भी पढ़ें- देख लो सरकार! तीन साल भी नहीं टिक पाया सात करोड़ का पुल, डिंडोरी में बारिश ने खोली निर्माण की पोल
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घटना की रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ कार्यालय को भेजी जाएगी। पिछले 48 घंटों से हो रही बारिश ने सिर्फ स्कूल ही नहीं, शहर की नालियों और सड़कों की भी पोल खोल दी है। कई जगह जलभराव है, तो कई जगह सड़कें धंस गई हैं। तलैया क्षेत्र में बिजली बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दुकानें देर से खुलीं और घरों में पानी की मोटरें नहीं चल पाईं। नगर निगम की टीम मलबा हटाने में जुटी है। स्कूल प्रशासन ने फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से को बांस-बल्लियों से घेर दिया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए परिसर के उस हिस्से में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने कहा है कि बारिश के दौरान किसी भी जर्जर भवन के पास न जाएं। शिकायत मिलते ही तत्काल टीम भेजी जाएगी।
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हादसे और बच्चों के आने में एक घंटे का फर्क था
स्कूल की पहली पाली सुबह आठ बजे शुरू होती है। यानी हादसे और बच्चों के आने में सिर्फ एक घंटे का फर्क था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दीवार थोड़ी देर बाद गिरती तो जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था। दीवार गिरते ही तेज आवाज के साथ धूल का गुबार उठा। पास में खड़ी एक कार और एक मोटरसाइकिल मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गईं। दीवार से सटा बिजली का डीपी भी खंभे से टूटकर नीचे आ गिर गया। करंट का खतरा देखते हुए विद्युत विभाग ने तत्काल पूरे तलैया क्षेत्र की बिजली काट दी। धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। सड़क पर मलबा और बिजली के तार फैल जाने से कुछ देर के लिए आवागमन भी रुक गया। राहगीर इधर-उधर भागते नजर आए।
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शिक्षा विभाग और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची
सूचना मिलते ही स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। स्कूल प्राचार्य ने पूरे परिसर का मुआयना किया और अन्य जर्जर हिस्सों को चिह्नित किया। बिजली विभाग के कर्मचारियों ने डीपी को हटाकर लाइन दुरुस्त करने का काम शुरू किया। इस हादसे ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया है- मानसून आने से पहले स्कूल भवनों और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा जांच क्यों नहीं हुई? स्थानीय अभिभावकों का गुस्सा जायज है। उनका कहना है कि हर साल बारिश से पहले जर्जर बिल्डिंग्स की सूची बनती है, मरम्मत के दावे होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य रहती है। आज दीवार गिरी है, कल छत गिर सकती है। तब जिम्मेदारी कौन लेगा?
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घटना की रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ कार्यालय को भेजी जाएगी। पिछले 48 घंटों से हो रही बारिश ने सिर्फ स्कूल ही नहीं, शहर की नालियों और सड़कों की भी पोल खोल दी है। कई जगह जलभराव है, तो कई जगह सड़कें धंस गई हैं। तलैया क्षेत्र में बिजली बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दुकानें देर से खुलीं और घरों में पानी की मोटरें नहीं चल पाईं। नगर निगम की टीम मलबा हटाने में जुटी है। स्कूल प्रशासन ने फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्से को बांस-बल्लियों से घेर दिया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए परिसर के उस हिस्से में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन ने कहा है कि बारिश के दौरान किसी भी जर्जर भवन के पास न जाएं। शिकायत मिलते ही तत्काल टीम भेजी जाएगी।
