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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Dhar News ›   Basant Panchami Akhand Puja or Namaz at Bhojshala? Supreme Court hearing today

Dhar Bhojshala: सुप्रीम कोर्ट में आज सुना जाएगा भोजशाला मामला, बसंत पंचमी पर अखंड पूजा या नमाज का होगा फैसला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार Published by: धार ब्यूरो Updated Thu, 22 Jan 2026 06:02 AM IST
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सार

धार स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजन और नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। हिंदू पक्ष अखंड सरस्वती पूजन की अनुमति मांग रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष नमाज के अधिकार पर कायम है। कोर्ट में दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रखेंगे। 

Basant Panchami Akhand Puja or Namaz at Bhojshala? Supreme Court hearing today
भोजशाला में बसंत पंचमी का मामला - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर
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विस्तार
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पुरातत्व द्वारा संरक्षित धरोहर भोजशाला में बसंत पंचमी पर अखंड सरस्वती पूजन होगा या दोपहर में नमाज भी हो सकेगी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई होगी। तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष दो दिन पूर्व हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर आवेदन विचार होगा। साथ ही बाबा कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद बहस के लिए मौजूद रहेंगे।

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अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष पक्ष रखा था। जैन अयोध्या राम जन्मभूमि व काशी ज्ञानवापी केस में भी याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर चुके हैं। उन्होंने मांग की कि भोजशाला में 23 जनवरी को सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को निर्बाध पूजन की अनुमति दी जाए।
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ये भी पढ़ें- धार भोजशाला: बसंत पंचमी पर नमाज का समय तय करने की दिग्विजय सिंह की मांग, शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील

याचिका में ये बिंदु शामिल
7 अप्रैल 2003 को जारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के आदेश के अनुसार मंगलवार को हिंदू समाज को पूजन का अधिकार व शुक्रवार को मुस्लिम समाज को नमाज का अधिकार है। आदेश में यह स्पष्ट नहीं है कि यदि बसंत पंचमी शुक्रवार को आती है तो व्यवस्था क्या होगी। इस बार हिंदू समाज अखंड पूजन पर अड़ा है, जबकि मुस्लिम समाज नमाज के अपने अधिकार की बात कह रहा है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से लगाई गई याचिका में उल्लेख है कि धार शहर में 25 मस्जिदें हैं, जबकि वाग्देवी की पूजा के लिए एक ही ऐतिहासिक स्थल भोजशाला है। याचिका में एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश की अस्पष्टता का भी उल्लेख व वर्ष 2013 और वर्ष 2016 के उदाहरण भी दिए गए हैं।

बाबा कमाल मौलाना वैलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने बताया कि पूर्व में दर्ज याचिका को लेकर समाज ने अपना जवाब बुधवार को प्रस्तुत कर दिया है। शहर काजी वकार सादिक ने बताया कि बाबा कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी की ओर से हम कोर्ट में पूर्व में पारित आदेश, वर्तमान स्थितियां और इतिहास के संबंध में अपनी बात रखेंगे।


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