Dhar Bhojshala: बसंत पंचमी और जुमे की नमाज के बीच धार के धैर्य की परीक्षा, इतिहास के कड़वे जख्म बढ़ा रहे चिंता
Dhar Bhojshala Case : बसंत की बयार और इबादत की गूंज के बीच शुक्रवार को धार के धेर्य की परीक्षा है। जब भी बसंत पंचमी शुक्रवार को आई। तब हालात बिगड़े। इस बार क्या होगा? सबके मन में यही सवाल है। दोनों ही समाज अपनी आस्था एक ही दिन प्रकट करना चाहते हैं।
विस्तार
पुलिस छावनी बने धार में एक अलग ही माहौल है। गलियों चौबारों में खाकी वर्दी में चहलकदमी करते पुलिस जवानों के बूट की गूंज है। संगीनों के साये में धार की भोजशाला है। चारों तरफ बैरिकेट, कंटीले तार लगा दिए गए हैं। आसपास में ड्रोन इधर-उधर मंडरा रहा है। घरों की छतों से लेकर गलियों तक आसपास से निगरानी हो रही है। अब बसंत की बयार और इबादत की गूंज के बीच शुक्रवार को धार के धैर्य की परीक्षा होगी। एक साथ नमाज और मां सरस्वती का पूजन संपन्न हो जाए और शहर की फिजा भी न बिगड़े यही सरकार की कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से साफ कर दिया गया है कि बसंत पंचमी की पूजा और नमाज साथ-साथ होंगे। कोर्ट ने नमाज के दोपहर एक बजे से तीन बजे का समय तय किया है। साथ ही नमाज के लिए परिसर में अलग जगह और आने-जाने के लिए अलग से रास्ते बनाने का आदेश दिया है।
दोनों पक्ष सुनने के बाद निकला संतुलित समाधान
मस्जिद पक्ष के वकील ने कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज अदा की जाएगी और उसके बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा। हिंदू पक्ष की ओर से यह सुझाव दिया गया कि नमाज को शाम 5 बजे के बाद कराया जाए, ताकि पूजा निर्बाध चल सके, लेकिन मस्जिद पक्ष ने स्पष्ट किया कि जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने एक संतुलित समाधान अपनाते हुए कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज के लिए परिसर के भीतर ही एक अलग और विशेष क्षेत्र उपलब्ध कराया जाएगा, जहां आने-जाने के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग होंगे, ताकि नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
शक्ति प्रदर्शन के केंद्र
चप्पे-चप्पे पर पहरा, शहर की सीमाएं सील
जब-जब शुक्रवार और बसंत पंचमी का मिलन हुआ है, धार की फिजाओं में तनाव और संघर्ष की गंध घुली है। आंसू गैस के गोले और पथराव के पुराने जख्मों के बीच, इस बार प्रशासन ने सुरक्षा का ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि चप्पे-चप्पे पर पहरा है। शहर की सीमाएं सील हैं। जमीन और आसमान से भोजशाला व उसके आसपास के इलाकों की निगरानी हो रही है।
आस्था की दो धाराएं एक ही दिन
इस शक्ति प्रदर्शन के कारण धार की फिजाओं में एक बार फिर वही पुरानी बेचैनी तैर रही है। सुरक्षा और डर के साये के बीच हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर क्या होगा शुक्रवार को? आस्था की दो धाराएं एक ही दिन एक ही स्थान पर मिलने जा रही हैं। इस बार फिर बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन है और इसी संयोग ने प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। धार का इतिहास गवाह है कि जब भी धार में यह नाजुक मोड़ आया तो धारवासियों ने आंसू गैस के गोले के कारण आंसू बहाए, पथराव और लाठीचार्ज की पीढ़ा झेली। वर्ष 2006, 2012 और 2016 की कड़वी यादें आज भी ताजा हैं। फिर वैसा न हो, सब यहीं चाहते हैं।
शांति बनाए रखना प्राथमिकता
शहर की सुरक्षा के लिए इस बार प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। दस हजार पुलिस जवानों की मौजूदगी में धार पुलिस छावनी जैसा नजर आने लगा है। चप्पे-चप्पे पर तैनात सुरक्षा बल और आसमान में उड़ते ड्रोन कैमरे इस बात का अहसास करा रहे हैं कि शांति बनाए रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भोजशाला परिसर को छह अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर निगरानी की जा रही है और शहर की सीमाओं को सील करने की तैयारी है, ताकि बाहर से आने वाला कोई भी व्यक्ति बिना जांच के प्रवेश न कर सके।
इसलिए बन रहे टकराव के हालात
भोजशाला से जुड़ी भावनाओं का आलम यह है कि दोनों ही समुदाय अपनी-अपनी परंपराओं को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कायम हैं। एक तरफ हिंदू समाज की मांग है कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की अखंड पूजा और हवन में कोई बाधा न आए, जिसके लिए लगातार यात्राएं निकालकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समाज का कहना है कि उन्हें कई वर्षों से शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति है और वे बिना किसी डर के इबादत करना चाहते हैं, हालांकि समाज ने सांकेतिक पूजा की बात भी कही है।
क्या है भोजशाला विवाद, आइए जानते हैं
धार में भोजशाला का निर्माण 1010 से 1055 ईसवीं के बीच परमार वंश के राजा भोज ने करवाया था। राजा भोज की मृत्यु के 200 साल तक यहां पठन-पाठन का कार्य होता रहा। राजा भोज ने यहां देवी सरस्वती (वाग्देवी) की मूर्ति स्थापित कराई थी, जो 84 कलात्मक स्तंभों पर खड़ी थी। 1857 में एक ब्रिटिश अधिकारी यह मूर्ति इंग्लैंड ले गए। यह मूर्ति आज वहां मौजूद है। भोजशाला परिसर में कमाल मौला मस्जिद भी है। केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अनुसार भोजशाला में मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना करने की अनुमति है। शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने के लिए दोपहर 1 से 3 बजे तक प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए दोनों पक्षों को नि:शुल्क प्रवेश मिलता है। बाकी दिनों में एक रुपये का टिकट लगता है। इसके अलावा बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए हिंदू पक्ष को पूरे दिन पूजा और हवन करने की अनुमति है।
2006 में बिगड़ी स्थिति
पुरातत्व विभाग के आदेश के बाद 3 फरवरी 2006 को जब बसंत पंचमी शुक्रवार को आई तो उस समय की चुनौतियों और शांति कायम करने के लिए तगड़ा पुलिस बल लगाया गया, लेकिन विवाद हुआ। अफसरों के सामने यह चुनौती थी कि बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में धार्मिक प्रथाओं को सूर्यास्त तक कैसे संचालित किया जाए। यज्ञ को बीच में नहीं रोका जा सकता था। परिवार में फूलों की पंखुड़ियों, चावल और कुमकुम के साथ रंगोली बनाई गई, जिसको हटाया नहीं जा सकता था। उधर आदेश के तहत नमाज भी अदा करवाना थी। भोजशाला खाली कराने की कवायद हुई तो विवाद हुआ और परिसर में ही आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। वर्ष 2012 में भी यहीं स्थिति बनी।

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