देख लो सरकार: रायसेन में 3.20 करोड़ के चार स्टेडियम पर ताले, खिलाड़ी आज तक नहीं खेल पाए; उठने लगे सवाल
रायसेन की चार विधानसभाओं में 3.20 करोड़ रुपये की लागत से बने चार स्टेडियम वर्षों बाद भी खिलाड़ियों के लिए नहीं खुले हैं। हैंडओवर नहीं होने और घटिया निर्माण के चलते परिसर बदहाल हैं। कलेक्टर ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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बच्चों में खेल और खिलाड़ी भावना जागृत हो, वे खेल के क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश का नाम रोशन कर सकें। इसी उद्देश्य से रायसेन जिले की चारों विधानसभाओं में करीब 3 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से चार खेल स्टेडियम बनाए गए। लेकिन निर्माण के वर्षों बाद भी इन स्टेडियमों में खिलाड़ी खेल नहीं पाए हैं। स्टेडियमों पर ताले लगे हैं और घटिया निर्माण के चलते पंचायतों ने इन्हें हैंडओवर तक नहीं लिया। ठेकेदारों की कथित लापरवाही और निर्माण में अनियमितताओं के चलते करोड़ों की लागत से बने ये स्टेडियम अब बदहाल होने की कगार पर हैं। देखिए आजतक की स्पेशल रिपोर्ट।
रायसेन जिले की चारों विधानसभाओं में खिलाड़ियों के लिए 80-80 लाख रुपये की लागत से खेल स्टेडियम बनाए गए। उदयपुरा विधानसभा के देवरी, सिलवानी के ग्राम जुनिया, सांची के आमखेड़ा और भोजपुर विधानसभा के देवटिया में इनका निर्माण कराया गया। लेकिन निर्माण पूरा होने के वर्षों बाद भी ये स्टेडियम शुरू नहीं हो सके और पंचायतों को हैंडओवर तक नहीं किए गए।
सांची विधानसभा से कुछ ही दूरी पर भोपाल रोड स्थित आमखेड़ा गांव में बनाए गए खेल परिसर के बाहर लगे बोर्ड पर निर्माण कार्य 28 फरवरी 2017 से शुरू होकर 1 जनवरी 2018 को पूरा होना बताया गया है। वहीं, आरईएस से मिली जानकारी के मुताबिक 9 जून 2016 को निर्माण का वर्क ऑर्डर जारी हुआ था और काम पूरा करने की तारीख 8 मार्च 2017 बताई गई है। विभाग और ठेकेदार दोनों ही निर्माण पूरा होने की बात कह रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से स्टेडियम पर ताला लगा है और खिलाड़ी इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।
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मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से हर विधानसभा में एक खेल परिसर बनाने के लिए कुल 3 करोड़ 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी। प्रत्येक स्टेडियम के निर्माण के लिए 80 लाख रुपये खर्च किए गए और काम पूरा करने के लिए करीब एक साल का समय तय किया गया था। लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी चारों स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए नहीं खुल सके।
जिले में सांची के आमखेड़ा, उदयपुरा के देवरी, सिलवानी के जुनिया और भोजपुर के देवटिया में बने इन खेल परिसरों में आज तक एक भी खेल प्रतियोगिता नहीं कराई जा सकी है। हैंडओवर नहीं होने के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बने ये स्टेडियम बिना उपयोग के ही बदहाल होने लगे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट में स्टेडियमों की जमीनी हकीकत सामने आई। जिन परिसरों में खिलाड़ियों को अभ्यास करना था, वहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा दिखाई दे रहा है। आरोप है कि इन परिसरों का इस्तेमाल शराबखोरी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि खिलाड़ियों के लिए बनाए गए इन स्टेडियमों पर आखिर ताले क्यों लगे हैं और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद इन्हें शुरू क्यों नहीं किया गया?
स्टेडियमों के निर्माण, हैंडओवर और उनकी मौजूदा स्थिति को लेकर जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं। वहीं, कलेक्टर ने मामले में जांच कर कार्रवाई की बात कही है। अब देखना होगा कि वर्षों से बंद पड़े इन खेल परिसरों को खिलाड़ियों के लिए कब खोला जाता है और निर्माण में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।
