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Guna News:15 बच्चे अस्पताल पहुंचे, लेकिन पानी निकला सुरक्षित, अब बीमारी की असली वजह की तलाश

Tue, 09 Jun 2026 12:15 PM IST
गुना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुना Published by: गुना ब्यूरो Updated Tue, 09 Jun 2026 12:15 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के गुना शहर के बूढ़े बालाजी और पुरानी छावनी इलाके में करीब 15 बच्चों के अचानक उल्टी, दस्त और पेट दर्द से बीमार पड़ने के बाद हड़कंप मच गया। सभी बच्चों को जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

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guna 15 children hospitalized after suspected contaminated water in budhe balaji water quality investigation s
पानी की रिपोर्ट आई सामने - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुना शहर के बूढ़े बालाजी और पुरानी छावनी इलाके में बीते एक सप्ताह से पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता और दहशत का माहौल बना हुआ है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के करीब 15 बच्चों के अचानक उल्टी, दस्त और पेट दर्द से पीड़ित होने के बाद उन्हें जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती कराना पड़ा। एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने की घटना ने स्वास्थ्य विभाग, नगर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सक्रिय कर दिया है। प्राथमिक स्तर पर डॉक्टरों ने दूषित पानी से संक्रमण फैलने की आशंका जताई है, जबकि प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

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एक साथ कई बच्चों की तबीयत बिगड़ी

शनिवार शाम वार्ड पार्षद प्रतिनिधि लालाराम लोधा को मोहल्ले के लोगों ने सूचना दी कि क्षेत्र के कई बच्चे अचानक बीमार हो गए हैं। सूचना मिलने पर जब वे मौके पर पहुंचे तो पता चला कि बच्चों की हालत बिगड़ने के कारण परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले जा चुके हैं। अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में बूढ़े बालाजी और पुरानी छावनी क्षेत्र के कई बच्चे ड्रिप पर उपचार लेते हुए मिले। परिजनों ने बताया कि शुरुआत में बच्चों का इलाज स्थानीय डॉक्टरों से कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर दूषित पानी से संक्रमण फैलने की संभावना जताई है।
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पार्षद ने उठाए पानी की गुणवत्ता पर सवाल

घटना के बाद पार्षद प्रतिनिधि लालाराम लोधा ने क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि इलाके में लंबे समय से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। कई स्थानों पर जल वितरण लाइनें क्षतिग्रस्त हैं और नालियों का गंदा पानी पाइपलाइन में रिसकर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि करीब चार महीने पहले पानी की टंकी की सफाई कराई गई थी, लेकिन टूटी हुई पाइपलाइनों की मरम्मत नहीं हुई। उन्होंने जनस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा।

पीएचई की टीम ने लिए पानी के नमूने

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएचई के कार्यपालन यंत्री को तत्काल तलब किया गया। इसके बाद विभाग की तकनीकी टीम प्रभावित क्षेत्र में पहुंची और विभिन्न घरों से पानी के नमूने एकत्र किए। साथ ही संभावित लीकेज पॉइंट की पहचान और जांच का काम भी शुरू किया गया।

कलेक्टर ने दिए 48 घंटे में सुधार के निर्देश

गुना कलेक्टर किशोर कन्याल ने पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए पीएचई और नगर पालिका अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन को पानी के नमूनों की जांच प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

नगर पालिका ने भी शुरू की जांच

वार्ड क्रमांक 09 से शिकायत मिलने के बाद नगर पालिका ने भी तत्काल कार्रवाई की। जल प्रकोष्ठ प्रभारी की टीम ने पार्षद सुमन लालाराम लोधा की मौजूदगी में विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने एकत्र किए। प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान पानी साफ दिखाई दिया और उसमें किसी प्रकार की दुर्गंध नहीं पाई गई। इसके बाद सभी नमूनों को विस्तृत परीक्षण के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की जिला प्रयोगशाला भेज दिया गया।

लैब रिपोर्ट में सभी नमूने मानक स्तर पर

जिला प्रयोगशाला में पानी के नमूनों की 15 अलग-अलग मानकों पर जांच की गई। इनमें आयरन, नाइट्रेट, आर्सेनिक, फ्लोराइड, क्लोराइड, टीडीएस, एल्केनिटी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, अवशिष्ट क्लोरीन, पीएच मान, टर्बिडिटी, रंग, थर्मल कंडक्टिविटी और गंध जैसे पैरामीटर शामिल थे। जांच रिपोर्ट में सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। किसी भी नमूने में हानिकारक रसायन या बैक्टीरिया की पुष्टि नहीं हुई। इससे प्रशासन को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन बच्चों की बीमारी के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है।


अगले तीन दिन तक होगी विशेष निगरानी

जल प्रकोष्ठ प्रभारी संचित ढिमरी ने बताया कि बारिश के मौसम से पहले हर वर्ष पानी की टंकियों की सफाई और पाइपलाइनों की फ्लशिंग कराई जाती है। वार्ड क्रमांक 09 में भी हाल ही में यह प्रक्रिया पूरी की गई थी। उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर अगले तीन दिनों तक क्षेत्र की जल गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और नियमित रूप से पानी के नमूने लेकर जांच कराई जाएगी।

बच्चों की हालत स्थिर

अस्पताल प्रशासन के अनुसार भर्ती सभी बच्चों की हालत फिलहाल स्थिर है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। दो बच्चों को आज दोपहर तक अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना जताई गई है। वहीं प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग बच्चों के बीमार होने के कारणों का पता लगाने के लिए लगातार जांच में जुटे हुए हैं।

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