बदले की कार्रवाई?: गुना में निजी स्कूल पर गंभीर आरोप, बीमार छात्रा के इलाज में बाधा; दो बहनों को थमाई टीसी
गुना के एक निजी स्कूल पर बीमार छात्रा के इलाज में बाधा और शिकायत के बाद बदले की कार्रवाई का आरोप है। प्रबंधन ने दो बहनों को निष्कासित किया है। मामले में पुलिस और बाल कल्याण समिति सक्रिय हैं।
विस्तार
गुना शहर की दलवी कॉलोनी स्थित एक निजी स्कूल एक गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर विवादों में आ गया है। स्कूल प्रबंधन पर आरोप है कि उसने एक गंभीर रूप से बीमार छात्रा के इलाज में न केवल बाधा डाली, बल्कि शिकायत करने पर बदले की भावना से उसकी और उसकी बड़ी बहन को स्कूल से निष्कासित कर दिया। इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, भगत सिंह कॉलोनी निवासी दिलीप थापर, जो एक निजी कंपनी में डिलीवरी बॉय के रूप में कार्यरत हैं, उनकी 6 वर्षीय बेटी इशिता थापर टाइप-1 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में मरीज को दिन में कई बार इंसुलिन इंजेक्शन देना पड़ता है और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करना बेहद जरूरी होता है। बच्ची की कम उम्र को देखते हुए पिता खुद स्कूल जाकर समय-समय पर उसे इंसुलिन देते थे और भोजन कराते थे, ताकि उसकी तबीयत बिगड़ने से रोकी जा सके।
शुरुआत में मिला भरोसा, बाद में बदला रवैया
परिजनों का आरोप है कि स्कूल में प्रवेश के समय प्रबंधन ने हर संभव सहयोग का भरोसा दिया था और बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति को समझते हुए सहायता का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन कुछ महीनों बाद ही स्कूल प्रबंधन का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। पिता का आरोप है कि उन्हें स्कूल में बार-बार आने से रोका जाने लगा और बच्ची के इलाज से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी की गईं। इस वजह से न केवल बच्ची की सेहत पर खतरा पैदा हुआ, बल्कि पूरा परिवार मानसिक तनाव में आ गया।
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प्रशासन से शिकायत, फिर भी नहीं हुआ समाधान
दिलीप थापर ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन और सीएम हेल्पलाइन पर भी दर्ज कराई थी। प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप के बाद कुछ समय के लिए स्थिति सामान्य हुई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका। परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने सुधार करने के बजाय इस शिकायत को ही अपने खिलाफ मान लिया और बाद में बदले की भावना से कार्रवाई की।
रिजल्ट के दिन थमा दी टीसी
सबसे गंभीर आरोप यह है कि वार्षिक परीक्षा समाप्त होने और परिणाम घोषित होने के दिन ही स्कूल प्रबंधन ने उनकी दोनों बेटियों 14 वर्षीय लेशाना और 6 वर्षीय इशिताका नाम स्कूल से काट दिया। परिवार को अचानक टीसी थमा दी गई, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ा और उनका भविष्य अधर में लटक गया।
आर्थिक स्थिति का उड़ाया मजाक
पीड़ित पिता ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने उनकी आर्थिक स्थिति का मजाक उड़ाया और उन्हें सामाजिक रूप से अपमानित किया। उन्होंने कहा कि वे एक डिलीवरी बॉय हैं और सीमित आय के बावजूद उन्होंने समय पर फीस जमा की थी, इसके बावजूद उनके बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया, जो पूरी तरह अनुचित और अमानवीय है।
पुलिस में शिकायत, जांच शुरू
इस मामले को लेकर पीड़ित परिवार सिटी कोतवाली पहुंचा, जहां उन्होंने लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आवेदन स्वीकार करते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बाल कल्याण समिति भी सक्रिय
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल कल्याण समिति (CWC) ने भी संज्ञान लिया। बुधवार को समिति की टीम स्कूल पहुंची और पूरे मामले की विस्तृत जांच की। समिति की अध्यक्ष डॉ. नीरू शर्मा, सदस्य अनुसुइया रघुवंशी सहित अन्य अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन, प्राचार्य और स्टाफ से पूछताछ की। इस दौरान पुलिस और शिक्षा विभाग की टीम भी मौजूद रही। जांच के दौरान बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति, स्कूल की नीतियां और परिजनों के आरोपों को विस्तार से परखा गया।
आगे क्या होगा
बाल कल्याण समिति ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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