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Gwalior News: नगर निगम के पांच अफसरों के खिलाफ EOW ने की FIR, 54 लाख की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप
Fri, 07 Nov 2025 09:41 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: ग्वालियर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Nov 2025 09:41 PM IST
सार
ग्वालियर नगर निगम और दीपक एडवरटाइजर्स की मिलीभगत से 54 लाख की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ। ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद एफआईआर दर्ज की। 2017 में जारी शौचालय विज्ञापन टेंडर में अनुबंध की शर्तें फर्जी पाई गईं। निगम अधिकारियों और फर्म संचालक दीपक जेठवानी समेत कई पर केस दर्ज हुआ।
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FIR Demo
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्थानीय नगर निगम और एक निजी विज्ञापन फर्म की मिलीभगत से लाखों की हेराफेरी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा यानी ईओडब्ल्यू ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल निगम को 54 लाख की क्षति पहुंचाने के आरोप में केस दायर किया गया है।
ईओडब्ल्यू को मिली शिकायत की जांच में खुलासा हुआ है कि साल 2017 में नगर निगम ग्वालियर ने 48 सार्वजनिक शौचालयों पर विज्ञापन लगाने के लिए निविदा जारी की थी। यह टेंडर दीपक एडवरटाइजर्स नामक फर्म को मिला था। निगम की ओर से तत्कालीन सीसीओ प्रदीप चतुर्वेदी और फर्म संचालक दीपक जेठवानी के बीच अनुबंध हुआ था, लेकिन जांचकर्ताओं के अनुसार इस अनुबंध की कई शर्तें कूटरचित निकलीं।
ये भी पढ़ें- 'साहब' का घर बना आफत, नींव की खुदाई ने तोड़ी सड़क, स्कूल बस गिरी तो जिम्मेदार कौन?
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अनुबंध में जो प्रावधान जोड़े गए, उनका मेयर-इन-काउंसिल के आधिकारिक संकल्प में कोई उल्लेख नहीं था। वहीं, शर्तों का फायदा उठाकर फर्म को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया और नगर निगम को करीब 54 लाख रुपये का नुकसान हुआ। विज्ञापन की वास्तविक देय राशि करीब 72 लाख रुपये थी, लेकिन नगर निगम की समितियों ने गलत गणना कर इसे कम बताया। वित्तीय गड़बड़ी को देखकर ईओडब्ल्यू ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में नगर निगम के कई अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई।
इनमें तत्कालीन सीसीओ प्रदीप चतुर्वेदी की मृत्यु हो जाने के चलते उन्हें छोड़कर सहायक नोडल अधिकारी शशिकांत शुक्ला, सहायक लिपिक मदन पालिया, आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेंद्र शर्मा, अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव और देवेंद्र पालिया, अधीक्षण यंत्री जेपी पारा और उपायुक्त सुनील सिंह चौहान के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं, दीपक एडवरटाइजर्स के संचालक दीपक जेठवानी को भी आरोपी बनाया गया है।
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ईओडब्ल्यू को मिली शिकायत की जांच में खुलासा हुआ है कि साल 2017 में नगर निगम ग्वालियर ने 48 सार्वजनिक शौचालयों पर विज्ञापन लगाने के लिए निविदा जारी की थी। यह टेंडर दीपक एडवरटाइजर्स नामक फर्म को मिला था। निगम की ओर से तत्कालीन सीसीओ प्रदीप चतुर्वेदी और फर्म संचालक दीपक जेठवानी के बीच अनुबंध हुआ था, लेकिन जांचकर्ताओं के अनुसार इस अनुबंध की कई शर्तें कूटरचित निकलीं।
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अनुबंध में जो प्रावधान जोड़े गए, उनका मेयर-इन-काउंसिल के आधिकारिक संकल्प में कोई उल्लेख नहीं था। वहीं, शर्तों का फायदा उठाकर फर्म को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया और नगर निगम को करीब 54 लाख रुपये का नुकसान हुआ। विज्ञापन की वास्तविक देय राशि करीब 72 लाख रुपये थी, लेकिन नगर निगम की समितियों ने गलत गणना कर इसे कम बताया। वित्तीय गड़बड़ी को देखकर ईओडब्ल्यू ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में नगर निगम के कई अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई।
इनमें तत्कालीन सीसीओ प्रदीप चतुर्वेदी की मृत्यु हो जाने के चलते उन्हें छोड़कर सहायक नोडल अधिकारी शशिकांत शुक्ला, सहायक लिपिक मदन पालिया, आउटसोर्स कर्मचारी धर्मेंद्र शर्मा, अपर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव और देवेंद्र पालिया, अधीक्षण यंत्री जेपी पारा और उपायुक्त सुनील सिंह चौहान के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं, दीपक एडवरटाइजर्स के संचालक दीपक जेठवानी को भी आरोपी बनाया गया है।
