{"_id":"69ef14145d56a3cff2015748","slug":"woman-calls-husband-s-sister-second-wife-divorce-order-challenged-in-madhya-pradesh-high-court-s-gwalior-bench-2026-04-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Divorce Case: पति की सगी बहन को बताया 'सौतन', 28 साल बाद तोड़ा रिश्ता; अब हाईकोर्ट में तलाक के आदेश को चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Divorce Case: पति की सगी बहन को बताया 'सौतन', 28 साल बाद तोड़ा रिश्ता; अब हाईकोर्ट में तलाक के आदेश को चुनौती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: हिमांशु सिंह
Updated Mon, 27 Apr 2026 01:15 PM IST
विज्ञापन
सार
Divorce Case: मध्यप्रदेश में एक महिला ने पति की बहन को ‘दूसरी पत्नी’ बताकर 28 साल पुरानी शादी खत्म कर दी। बाद में सच सामने आने पर पति ने हाईकोर्ट में तलाक आदेश को चुनौती दी है। अदालत अब मामले की सुनवाई कर रही है और फैसले पर पुनर्विचार किया जा सकता है। पढ़ें पूरी खबर...
पति ने हाईकोर्ट में तलाक आदेश को दी चुनौती
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ एक अनोखा वैवाहिक विवाद सामने आया है, जिसने कानूनी जगत को भी चौंका दिया है। एक महिला ने अपने पति पर दूसरी शादी करने का आरोप लगाते हुए करीब 28 साल पुराना वैवाहिक संबंध समाप्त कर दिया। हालांकि, बाद में पता चला कि जिस महिला को ‘दूसरी पत्नी’ बताया गया, वह पति की सगी बहन थी। अब पति ने इस तलाक के आदेश को अदालत में चुनौती दी है।
1998 में हुई थी शादी
मामले के अनुसार, दंपति की शादी वर्ष 1998 में हुई थी। पति एक निजी कंपनी में अधिकारी के रूप में कार्यरत था, जिसके कारण उसे अक्सर काम के सिलसिले में घर से बाहर रहना पड़ता था। समय के साथ दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ती गई और वर्ष 2015 से महिला अलग रहने लगी।
फोटो को बनाया सबूत
महिला ने वर्ष 2021 में पारिवारिक न्यायालय में तलाक की अर्जी दाखिल की। उसने आरोप लगाया कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। अपने दावे को साबित करने के लिए महिला ने एक पारिवारिक फोटो प्रस्तुत की, जिसमें पति एक महिला के साथ खड़ा दिखाई दे रहा था। महिला ने उस व्यक्ति को पति की दूसरी पत्नी बताया, जिसके आधार पर अदालत ने उसके पक्ष में तलाक का आदेश जारी कर दिया।
बाद में सामने आई सच्चाई
इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब पति को अप्रैल माह में तलाक के आदेश की जानकारी मिली। दस्तावेजों की जांच करने पर उसने पाया कि जिस महिला को उसकी दूसरी पत्नी बताया गया था, वह उसकी सगी बहन है। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि तलाक का फैसला गलत और भ्रामक जानकारी के आधार पर दिया गया है और उसे अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं मिला।
ये भी पढ़ें- कांग्रेस का अशासकीय संकल्प अस्वीकार, नेता प्रतिपक्ष बोले-यह महिलाओं का अपमान
हाईकोर्ट कर रहा है मामले की सुनवाई
फिलहाल हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। पति ने अदालत से तलाक के आदेश को रद्द करने की मांग की है। अदालत अब यह तय करेगी कि क्या निर्णय गलत तथ्यों के आधार पर लिया गया था और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Trending Videos
1998 में हुई थी शादी
मामले के अनुसार, दंपति की शादी वर्ष 1998 में हुई थी। पति एक निजी कंपनी में अधिकारी के रूप में कार्यरत था, जिसके कारण उसे अक्सर काम के सिलसिले में घर से बाहर रहना पड़ता था। समय के साथ दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ती गई और वर्ष 2015 से महिला अलग रहने लगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो को बनाया सबूत
महिला ने वर्ष 2021 में पारिवारिक न्यायालय में तलाक की अर्जी दाखिल की। उसने आरोप लगाया कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। अपने दावे को साबित करने के लिए महिला ने एक पारिवारिक फोटो प्रस्तुत की, जिसमें पति एक महिला के साथ खड़ा दिखाई दे रहा था। महिला ने उस व्यक्ति को पति की दूसरी पत्नी बताया, जिसके आधार पर अदालत ने उसके पक्ष में तलाक का आदेश जारी कर दिया।
बाद में सामने आई सच्चाई
इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब पति को अप्रैल माह में तलाक के आदेश की जानकारी मिली। दस्तावेजों की जांच करने पर उसने पाया कि जिस महिला को उसकी दूसरी पत्नी बताया गया था, वह उसकी सगी बहन है। इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि तलाक का फैसला गलत और भ्रामक जानकारी के आधार पर दिया गया है और उसे अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं मिला।
ये भी पढ़ें- कांग्रेस का अशासकीय संकल्प अस्वीकार, नेता प्रतिपक्ष बोले-यह महिलाओं का अपमान
हाईकोर्ट कर रहा है मामले की सुनवाई
फिलहाल हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रहा है। पति ने अदालत से तलाक के आदेश को रद्द करने की मांग की है। अदालत अब यह तय करेगी कि क्या निर्णय गलत तथ्यों के आधार पर लिया गया था और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कमेंट
कमेंट X