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होशंगाबाद: गुरुज्ञान कार्यक्रम में समझाई गुरु ग्रह के अस्त और उदय होने की घटना
Sat, 26 Feb 2022 07:03 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 26 Feb 2022 07:03 PM IST
सार
विवाह कार्यक्रमों पर लगे विराम का कारण गुरु का अस्त होने की मान्यता है, लेकिन कोई ग्रह अस्त या उदित हो यह खगोलविज्ञान की दृष्टि से क्या होता है। इसे बताने नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने चिनार पार्क में गुरुज्ञान कायर्क्रम का आयोजन किया।
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चिनार पार्क में गुरुज्ञान कायर्क्रम का आयोजन किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विवाह कार्यक्रमों पर लगे विराम का कारण गुरु का अस्त होने की मान्यता है, लेकिन कोई ग्रह अस्त या उदित हो यह खगोलविज्ञान की दृष्टि से क्या होता है। इसे बताने नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने चिनार पार्क में गुरुज्ञान कायर्क्रम का आयोजन किया। उन्होंने बताया कि सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते रहने के कारण पृथ्वी से देखने पर आकाश में इस समय जहां सूर्य दिख रहा है उसके ही आसपास सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह गुरु भी आ गया है। सूर्य की चकाचौंध में यह खो गया है। इस कारण लगभग एक माह तक इसे अलग से देखा नहीं जा सकेगा।
सूर्य में खो जाने की इस बेला में 5 मार्च को शाम 7 बजकर 25 मिनिट पर सूर्य और जुपिटर के बीच केवल 0.58 डिग्री का अंतर रह जाएगा। इस समय यह पृथ्वी से साल की सबसे अधिक दूरी 89 करोड़ किमी से अधिक पर होगा। अगर इसे देखा जा सकता तो सबसे अधिक दूरी पर होने के कारण छोटे और कमजोर रूप में दिखता है। इसका व्यास 32,3 आर्कसेक दिखता है।
लगभग 30 दिन बाद जब पृथ्वी कुछ आगे बढ़ जाएगी तब यहां से देखने पर जुपिटर की सूर्य से अलगाव की स्थिति बनेगी और तब सुबह सबेरे सूर्य उगने के कुछ देर पहले यह दिखना आरंभ हो जाएगा। इसे गुरु का उदित होना कहा जाता है। धीरे-धीरे इसके आकाश में रहने का समय बढ़ता जाएगा। इस तरह किसी ग्रह का उदित या अस्त होना सूर्य की परिक्रमा करते रहने के कारण होने वाली एक निरंतर होने वाली खगोलीय घटना है।
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सूर्य में खो जाने की इस बेला में 5 मार्च को शाम 7 बजकर 25 मिनिट पर सूर्य और जुपिटर के बीच केवल 0.58 डिग्री का अंतर रह जाएगा। इस समय यह पृथ्वी से साल की सबसे अधिक दूरी 89 करोड़ किमी से अधिक पर होगा। अगर इसे देखा जा सकता तो सबसे अधिक दूरी पर होने के कारण छोटे और कमजोर रूप में दिखता है। इसका व्यास 32,3 आर्कसेक दिखता है।
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लगभग 30 दिन बाद जब पृथ्वी कुछ आगे बढ़ जाएगी तब यहां से देखने पर जुपिटर की सूर्य से अलगाव की स्थिति बनेगी और तब सुबह सबेरे सूर्य उगने के कुछ देर पहले यह दिखना आरंभ हो जाएगा। इसे गुरु का उदित होना कहा जाता है। धीरे-धीरे इसके आकाश में रहने का समय बढ़ता जाएगा। इस तरह किसी ग्रह का उदित या अस्त होना सूर्य की परिक्रमा करते रहने के कारण होने वाली एक निरंतर होने वाली खगोलीय घटना है।
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