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Dhar Bhojshala: धार भोजशाला में एएसआई ने रखा अपना पक्ष, दो बार हुए सर्वे का हवाला दिया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Mon, 20 Apr 2026 08:08 PM IST
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सार

धार की भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट में चल रही अहम सुनवाई के दौरान सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपना पक्ष रखा। एएसआई ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1902 में भी सर्वे किया गया था।   

Dhar Bhojshala: ASI presented its side in Dhar Bhojshala, citing two surveys conducted
धार भोजशाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

भोजशाला मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट के समक्ष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अपना पक्ष रखा और कहा कि यह पहला मौका नहीं है, जब भोजशाला का सर्वे किया गया। इससे पहले एएसआई ने वर्ष 1902 में भी सर्वे किया था।

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तब भी सर्वे में शिलालेखों पर श्लोक व मूर्तियां मिली थीं। कोर्ट के समक्ष कहा गया कि फिलहाल जो सर्वे किया गया है, उसे अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल कर 98 दिनों में पूरा किया गया और दो हजार पेजों की रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई। एएसआई के वकील ने कहा कि वर्ष 1958 में इस भवन को संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया गया।
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याचिका में इंटरविनर बने धार निवासी जिब्रान अंसारी व अन्य की तरफ से वकील ने कहा कि परिसर में वर्षों पहले मस्जिद थी और पुराने दस्तावेजों व रियासत के गजट में भी इसका उल्लेख है। 1952 में एएसआई की रिपोर्ट का भी हवाला इस दौरान दिया गया। सोमवार को सुनवाई अधूरी रही। अब मंगलवार को भी एएसआई को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।


आपको बता दें कि हाईकोर्ट में भोजशाला को लेकर लगी पांच याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। बारी-बारी से पक्षकारों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है। इसके अलावा कुछ इंटरविनरों ने भी अपना पक्ष रखने की इच्छा जताई है। अब तक दो पक्षकारों को अपने तर्क व पक्ष रखने का मौका दिया जा चुका है। अब मंगलवार को भी कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता ने कहा था कि एएसआई के सर्वे में 12वीं शताब्दी में भोजशाला के निर्माण के प्रमाण मिले हैं। तब मालवा में मुगलों का आगमन भी नहीं हुआ था। बाद में भोजशाला में अवैध कब्जे किए गए।

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