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Indore: ठेकेदार बीरटीएस अधूरा छोड़ हुआ गायब, अब निगम तोड़ रहा बस स्टाॅपों को

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sun, 25 Jan 2026 08:30 AM IST
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सार

इंदौर का बीआरटीएस सालभर बाद भी नहीं टूट पाया है। अफसरों को लगातार इस वजह से कोर्ट की नाराजगी भी झेलना पड़ रही है। पहले ठेकेदार ने काम छोड़ दिया। अब नगर निगम को दूसरे ठेकेदारों की तलाश है।

Indore: Contractor disappears leaving BRTS incomplete, now corporation is demolishing bus stops
बुलड़ोजर से तोड़ा जा रहा बस स्टाॅप। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर के बीआरटीएस को तोड़ने के लिए ठेकेदार राजी नहीं हो रहे है और अफसरों को कोर्ट की पेशियों में डांट सुनना पड़ रही है। अब नए सिरे से उसे तोड़ने के लिए नए सिरे से टुकड़ों टुकड़ों में तोड़ेन का टेंडर जारी करने की तैयारी कर रही है।

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टेंडर मंजूर होने, कार्यआदेश जारी होने में एक से दो माह का समय लग जाएगा, तब तक फिर कोर्ट की नाराजगी अफसरों को झेलना पड़ सकती है, हालांकि नगर निगम ने बीआरटीएस के बस अधूरे बस स्टाॅपों को खुद तोड़ना शुरू कर दिया है। शनिवार को शिवाजी वाटिका के बस स्टाॅप को बुलड़ोजर तोड़ता दिखाई दिया। 11 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस में 20 बस स्टाॅप है, उन्हें तोड़ने में ही ज्यादा समय लग रहा है,क्योकि उनका बेस पक्के सीेमेंट का है।

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नगर निगम बीआरटीएस को खुद तोड़ने से बच रहा है,क्योकि उसे तोड़ने के बाद निकलने वाला अटाला बेचना निगम के लिए आसान नहीं होगा। इस कारण यह काम ठेकेदारों को सौंपा गया था, लेकिन ठेकेदार को ज्यादा मुनाफा नहीं दिखाई दिया तो उसने काम अधूरा छोड़ दिया। अब जनकार्य विभाग अलग-अलग हिस्सों के टेंडर जारी करेगा। अफसरों ने अनुमान लगाया है कि बीआरटीएस तोड़े जाने से डेढ़ लाख किलो लोहा निकलेगा।

 

सालभर पहले हटाने का फैसला लिया था

प्रदेश सरकार ने सालभर पहले बीआरटीएस हटाने का फैसला लिया था। इसका मामला कोर्ट में था। इस कारण तोड़ने के लिए कोर्ट से अनुमति ली गई।कोर्ट ने अनुमति दे दी, लेकिन दस माह बाद भी बीआरटीएस की रैलिंग और बस स्टेशन नहीं टूट पाए हैं।


नगर निगम ने बीआरटीएस में लगे सामान की कीमत तीन करोड़ रुपये आंकी थी और इसके टेंडर जारी किए थे, लेकिन किसी एजेंसी ने इस काम में हाथ नहीं डाला। इसके बाद कीमत कम कर टेंडर आंके गए और बीआरटीएस तोड़े जाने से निगम को होने वाली ढाई करोड़ की आय को देखते हुए एक ठेकेदार के टेंडर को मंजूरी दी गई, लेकिन ठेकेदार को उसमें भी फायदा नहीं हुआ और वह काम छोड़कर चला गया। ढाई सौ करोड़ की लागत से इंदौर में निरंजनपुर से राजीव गांधी प्रतिमा तक साढ़े 11 किलोमीटर लंबा बीआरटीएस तैयार किया गया था। इसके लिए 300 से ज्यादा निर्माण और दो हजार से ज्यादा पेड़ काटे गए थे, लेकिन पिछले साल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीआरटीएस तोड़ने की घोषणा की थी।

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