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Indore News: ऐतिहासिक छावनी बनी मलबे का ढेर, मशीनों के बीच वाहन चालकों को खतरा, पूरे क्षेत्र में ट्रैफिक जाम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Tue, 26 May 2026 09:05 PM IST
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सार

सड़क चौड़ीकरण के तहत नगर निगम ने मधुमिलन चौराहे से छावनी और जगन्नाथ धर्मशाला तक बड़ी कार्रवाई करते हुए 136 साल पुरानी बसाहट को मलबे में तब्दील कर दिया है। जनता में भारी आक्रोश है, वहीं निगम अधिकारियों ने जल्द हालात सामान्य होने का कहा है।

Indore News Chhawani Suburb Demolished For Road Widening Residents Allege Excess Force
छावनी में क्रेन के आसपास से गुजरते वाहन चालक। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार

इंदौर शहर की लगभग 136 साल पुरानी ऐतिहासिक बसाहट छावनी अब पूरी तरह से मलबे के ढेर में बदल चुकी है। क्षेत्र के नागरिकों में नगर निगम द्वारा किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण के कार्य से कहीं ज्यादा नाराजगी प्रशासनिक अमले के संवेदनहीन रवैये और उनके काम करने के तौर-तरीकों को लेकर दिखाई दे रही है। पीड़ित प्रभावितों का आरोप है कि निगम कर्मियों ने पूर्व में तय किए गए निशानों से कहीं ज्यादा अंदर तक घुसकर उनके मकानों और दुकानों को जमींदोज कर दिया है। इसके साथ ही बेघर हुए लोगों को अपने घरों के भीतर से जरूरी घरेलू सामान और कीमती वस्तुएं सुरक्षित निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। नगर निगम की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद मधुमिलन चौराहे से लेकर छावनी और जगन्नाथ धर्मशाला तक फैले इंदौर के इस बेहद पुराने रिहायशी इलाके में चारों तरफ तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है। 


प्रभावित जनता का स्पष्ट कहना है कि वे शहर के विकास और सड़क चौड़ीकरण की योजना के कतई खिलाफ नहीं हैं, परंतु नगर निगम ने जिस अत्यधिक जल्दबाजी और तानाशाही पूर्ण तरीके से इस अभियान को अंजाम दिया है, उसने आम लोगों की जिंदगीभर की गाढ़ी कमाई को पलभर में मिट्टी में मिलाकर रख दिया है। इस कार्रवाई में नागरिकों की लगभग बीस हजार वर्गफीट से अधिक की बहुमूल्य निजी जमीन जा चुकी है, लेकिन मुआवजे के नाम पर उन्हें केवल टीडीआर पॉलिसी थमाई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस पॉलिसी की शहर के बाजार में अभी तक व्यावहारिक रूप से खरीद-फरोख्त भी ठीक से शुरू नहीं हो सकी है, जिससे उन्हें आर्थिक मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। इसके अलावा टूटे हुए मकानों का मलबा हटाने की जिम्मेदारी भी खुद पीड़ित लोगों के कंधों पर डाल दी गई है।
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गिरते मलबे के बीच जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर राहगीर
तोड़फोड़ की इस भारी कार्रवाई के बाद पूरे प्रभावित क्षेत्र में बेहद खतरनाक स्थिति निर्मित हो गई है। क्षतिग्रस्त इमारतों के ऊपरी हिस्सों से लगातार ईंट और कंक्रीट का भारी मलबा नीचे गिर रहा है, जबकि उसी मलबे के ठीक नीचे की चालू सड़कों से आम राहगीर लगातार गुजर रहे हैं। नगर निगम प्रशासन ने इस खतरनाक क्षेत्र से सुरक्षा के लिहाज से रास्तों को बैरिकेडिंग करके बंद कराने की कोई जहमत नहीं उठाई है और चारों तरफ भारी मशीनों से तोड़फोड़ का काम अब भी अनवरत जारी है। स्थानीय रहवासियों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि मौके पर बड़ी-बड़ी जेसीबी और पोकलेन जैसी मशीनें मलबा हटाने और दीवारों को गिराने के काम में लगी हुई हैं और उनके बिल्कुल पास से ही दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। जर्जर हो चुकी इमारतों के हिस्से कभी भी अचानक भरभराकर नीचे गिर रहे हैं, जिससे सड़कों पर चलने वाले लोग बाल-बाल बच रहे हैं और किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।
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पूरे क्षेत्र में लग रहा ट्रैफिक जाम
निगम की इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद से पूरे छावनी और आसपास के क्षेत्र में बदतर ट्रैफिक जाम की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर यातायात को सुचारू रूप से चलाने या उसे दूसरे सुरक्षित रास्तों पर डाइवर्ट करने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। क्षेत्र की कई मुख्य और सहायक सड़कें मलबे की वजह से पूरी तरह से ब्लॉक हो चुकी हैं, जिसके कारण वाहन चालक संकरी गलियों में आपस में गुत्थमगुत्था हो रहे हैं और घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं।

नियमों को ताक पर रखकर तय निशान से ज्यादा की गई तोड़फोड़, नहीं मिली कोई मोहलत
इस क्षेत्र में वर्तमान समय में जमीन की बाजार कीमत लगभग बीस हजार रुपए प्रति वर्गमीटर के आसपास आंकी जाती है। प्रभावित हो रहे सभी लोगों के पास अपनी संपत्तियों की पूरी तरह से वैध रजिस्ट्रियां मौजूद हैं और वे साल से नगर निगम को नियमित रूप से संपत्ति कर का भुगतान भी करते आ रहे हैं। कानूनी नियमों के अनुसार किसी भी तोड़फोड़ से पहले प्रभावितों को कम से कम सात दिन का अग्रिम नोटिस दिया जाना अनिवार्य था, लेकिन निगम ने महज एक से दो दिन पहले ही मौखिक या संक्षिप्त सूचना देकर कार्रवाई शुरू कर दी। अचानक चालू ट्रैफिक के बीच शुरू हुई इस कार्रवाई के कारण लोग चाहकर भी अपने घरों से भारी सामान खुद नहीं हटा सके। नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई का शांतिपूर्ण विरोध करने का प्रयास किया, तो निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें पुलिस की धौंस दिखाते हुए सीधे हवालात में बंद कराने की खुली धमकी दे डाली।

उजड़े आशियानों को देखकर रो पड़े व्यापारी और स्थानीय रहवासी
इस बर्बर कार्रवाई ने क्षेत्र के व्यापारियों से लेकर आम रहवासियों तक को गहरे जख्म दिए हैं। छावनी क्षेत्र में लंबे समय से रहने वाले व्यापारी विजय मंगल ने अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारी पीढ़ियों पुरानी पुश्तैनी जमीन है। हमारे मकानों की दीवारों पर अधिकारियों ने दस फीट के हिस्से पर तोड़ने का निशान लगाया था, लेकिन जब पीला पंजा चला तो उसे अंदर तक पंद्रह फीट से ज्यादा तोड़ दिया गया। अब इस तानाशाही के खिलाफ हम किस दरवाजे पर न्याय मांगने जाएं। वहीं इसी इलाके की निवासी भारती श्रीवास्तव ने रोते हुए बताया कि उनके घर में अभी शादी का मांगलिक माहौल था, महज एक दिन पहले ही घर में नई बहू विदा होकर आई थी और अगले ही दिन नगर निगम ने उनके पूरे हंसते-खेलते घर को खंडहर बना दिया। हमें घर के भीतर रखा गृहस्थी का सामान तक सुरक्षित निकालने का मौका नहीं दिया गया और अब क्रूरता की हद देखिए कि हमारे ही घर का मलबा वहां से हटाने के बदले में हमसे एक-एक हजार रुपए की मांग की जा रही है।

जल्द ही पूरा मलबा साफ कर रास्ता सुगम बनाने का दावा
इस पूरे मामले और जनता के आक्रोश पर नगर निगम के अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए कहा कि निगम की टीमें मौके पर मुस्तैद हैं और लगातार मलबा उठवाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस ठेकेदार को इस काम का टेंडर दिया गया है, उसके आधिकारिक कॉन्ट्रेक्ट में ही मौके से सारा मलबा हटाकर ले जाने का काम पूरी तरह से शामिल है। आज भी हमारी टीमों ने दिनभर मौके पर उपस्थित रहकर प्रभावित सड़कों से मलबा हटवाने का कार्य प्रमुखता से करवाया है और बहुत जल्द ही इस पूरे रास्ते को साफ करके आम जनता के लिए आवागमन पूरी तरह से सुगम और सुरक्षित कर दिया जाएगा।
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