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Indore News: किटी पार्टी वाली महिला ने लगाया करोड़ों का चूना, 100 दिन में पैसा डबल करने झांसा दिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Mon, 15 Jun 2026 08:47 AM IST
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सार
आरोपियों ने “ए स्क्वेयर वर्ल्ड ग्लोबल कंसल्टेंसी” नाम से फर्जी यूएस बेस्ड कंपनी बनाकर इंदौर के नामी होटलों में सेमिनार आयोजित किए और लोगों को 100 दिनों में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करीब ढाई करोड़ रुपए हड़प लिए।
हरप्रीत कौर उर्फ मोना
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर क्राइम ब्रांच ने क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है। इस पूरे मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक महिला आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह महिला बड़े होटलों में अमीरों को बुलाती थी। इसके बाद इसकी टीम इन लोगों को पैसा डबल करने का लालच देती थी और फिर सब मिलकर लोगों से लाखों रुपए निवेश करवाते थे। अब निवेशकों की शिकायतों के बाद में महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि चंडीगढ़, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे बड़े शहरों से जुड़े अन्य आरोपी फिलहाल फरार चल रहे हैं। पुलिस जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि इस गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था। ये लोग इंदौर की नामी होटलों में बकायदा सेमिनार और मीटिंग आयोजित करते थे और वहां लोगों को अपने झांसे में लेकर बड़ी रकम निवेश करवाते थे।
डीसीपी राजेश त्रिपाठी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में पुलिस ने हरप्रीत कौर उर्फ मोना निवासी विष्णुपुरी कॉलोनी, जसवंत सिंह उर्फ जस्सी निवासी चंडीगढ़, अनिरुद्ध दलवी निवासी बेंगलुरु, मुकेश तायडे और जोसेफ निवासी भोपाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इन सभी आरोपियों पर लोगों को महज 100 दिनों के भीतर रकम दोगुनी करने का बड़ा लालच देकर निवेश करवाने और बाद में उनका पैसा वापस नहीं करने का गंभीर आरोप लगा है। त्रिपाठी के अनुसार हरप्रीत कौर उर्फ मोना को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ चल रही है।
100 दिन में रकम दोगुनी करने का लालच दिया
इस धोखाधड़ी को लेकर इंदौर क्राइम ब्रांच को जिया पति सतीश वाधवानी, गुरजीत, अभिषेक, जसरथ, अमरजीत, हन्नी, साहिल, रोहित, पंकज, हरप्रीत कौर, गुरमीत कौर सहित कई अन्य पीड़ितों ने मिलकर शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस को दी अपनी शिकायत में पीड़ितों ने विस्तार से बताया कि आरोपियों ने क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में भारी निवेश पर शुरुआत में हर महीने 2 प्रतिशत मुनाफा देने और केवल 100 दिन के अंदर पूरी रकम दोगुनी करने का बड़ा दावा किया था। आरोपियों के इस झांसे में आकर लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगा दी, लेकिन बाद में उन्हें न तो कोई मुनाफा मिला और न ही उनकी मूल राशि वापस की गई।
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यूएस बेस्ड कंपनी के नाम से किया फर्जीवाड़ा
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि इन सभी शातिर आरोपियों ने मिलकर “ए स्क्वेयर वर्ल्ड ग्लोबल कंसल्टेंसी” नाम से एक कथित यूएस बेस्ड कंपनी खड़ी की थी। खुद को विदेशी कंपनी बताकर ये लोगों पर अपना प्रभाव जमाते थे। इस गिरोह की मुख्य सदस्य हरप्रीत कौर उर्फ मोना ने अपने खुद के और इस फर्जी कंपनी के अलग-अलग बैंक खातों में निवेशकों से करीब ढाई करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि जमा करवा ली थी।
किटी पार्टी से पहचान बनाई और होटलों में बड़े सेमिनार किए
मुख्य पीड़िता जिया वाधवानी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसकी पहचान आरोपी हरप्रीत कौर से एक किटी पार्टी के दौरान हुई थी। वहां हरप्रीत ने खुद को यूएस बेस्ड कंपनी से जुड़ा हुआ बताया और उसे निवेश के बड़े फायदे गिनाए। इसके बाद उसने जिया को भंवरकुआ स्थित होटल सोलारिस में ले जाकर जसवंत सिंह और अनिरुद्ध से मिलवाया, जहां इन लोगों ने पूरा निवेश प्लान समझाया। इस पर विश्वास बढ़ने के बाद आगे चलकर होटल रेडिसन में एक बहुत बड़ा सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें शहर के करीब 200 लोग शामिल हुए थे। उस सेमिनार में लोगों को महंगे गिफ्ट और भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश करने के लिए राजी किया गया था।
साइट अपडेट का बहाना बनाकर टालमटोल करते रहे
पीड़ितों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मार्च 2025 के बाद से किसी भी निवेशक को कोई भुगतान नहीं किया गया। जब परेशान लोगों ने हरप्रीत कौर से संपर्क कर अपना पैसा मांगा तो उसने कंपनी की वेबसाइट अपडेट होने का झूठा बहाना बना दिया। उसने लोगों से कहा कि सिस्टम अपग्रेड हो रहा है और जल्द ही ऑनलाइन पेमेंट कर दिया जाएगा। अप्रैल महीने में भी आरोपियों द्वारा इसी तरह की टालमटोल की जाती रही। जब निवेशकों का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया तो आरोपियों ने झूम एप के जरिए एक ऑनलाइन मीटिंग रखी, जिसमें जसवंत और अनिरुद्ध भी जुड़े। उन्होंने मीटिंग में जल्द भुगतान का आश्वासन दिया, लेकिन उसके बाद भी किसी को रकम नहीं मिली।
रुपए मांगने पर दी धमकी
जब निवेशकों ने लगातार अपने पैसे वापस मांगने के लिए दबाव बनाना शुरू किया तो आरोपियों ने अपने असली तेवर दिखाए और साफ कह दिया कि कंपनी पूरी तरह डूब चुकी है और अब किसी को भी कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा। इसके बाद सभी आरोपियों ने अपने फोन बंद कर दिए और संपर्क पूरी तरह काट लिया। थक-हारकर सभी पीड़ितों ने इंदौर क्राइम ब्रांच में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी हरप्रीत कौर को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। क्राइम ब्रांच अब इन आरोपियों के बैंक खातों, लेन-देन के रिकॉर्ड और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों की भी गहराई से जांच कर रही है।
डीसीपी राजेश त्रिपाठी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में पुलिस ने हरप्रीत कौर उर्फ मोना निवासी विष्णुपुरी कॉलोनी, जसवंत सिंह उर्फ जस्सी निवासी चंडीगढ़, अनिरुद्ध दलवी निवासी बेंगलुरु, मुकेश तायडे और जोसेफ निवासी भोपाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इन सभी आरोपियों पर लोगों को महज 100 दिनों के भीतर रकम दोगुनी करने का बड़ा लालच देकर निवेश करवाने और बाद में उनका पैसा वापस नहीं करने का गंभीर आरोप लगा है। त्रिपाठी के अनुसार हरप्रीत कौर उर्फ मोना को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे पूछताछ चल रही है।
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100 दिन में रकम दोगुनी करने का लालच दिया
इस धोखाधड़ी को लेकर इंदौर क्राइम ब्रांच को जिया पति सतीश वाधवानी, गुरजीत, अभिषेक, जसरथ, अमरजीत, हन्नी, साहिल, रोहित, पंकज, हरप्रीत कौर, गुरमीत कौर सहित कई अन्य पीड़ितों ने मिलकर शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस को दी अपनी शिकायत में पीड़ितों ने विस्तार से बताया कि आरोपियों ने क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में भारी निवेश पर शुरुआत में हर महीने 2 प्रतिशत मुनाफा देने और केवल 100 दिन के अंदर पूरी रकम दोगुनी करने का बड़ा दावा किया था। आरोपियों के इस झांसे में आकर लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगा दी, लेकिन बाद में उन्हें न तो कोई मुनाफा मिला और न ही उनकी मूल राशि वापस की गई।
यूएस बेस्ड कंपनी के नाम से किया फर्जीवाड़ा
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि इन सभी शातिर आरोपियों ने मिलकर “ए स्क्वेयर वर्ल्ड ग्लोबल कंसल्टेंसी” नाम से एक कथित यूएस बेस्ड कंपनी खड़ी की थी। खुद को विदेशी कंपनी बताकर ये लोगों पर अपना प्रभाव जमाते थे। इस गिरोह की मुख्य सदस्य हरप्रीत कौर उर्फ मोना ने अपने खुद के और इस फर्जी कंपनी के अलग-अलग बैंक खातों में निवेशकों से करीब ढाई करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि जमा करवा ली थी।
किटी पार्टी से पहचान बनाई और होटलों में बड़े सेमिनार किए
मुख्य पीड़िता जिया वाधवानी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसकी पहचान आरोपी हरप्रीत कौर से एक किटी पार्टी के दौरान हुई थी। वहां हरप्रीत ने खुद को यूएस बेस्ड कंपनी से जुड़ा हुआ बताया और उसे निवेश के बड़े फायदे गिनाए। इसके बाद उसने जिया को भंवरकुआ स्थित होटल सोलारिस में ले जाकर जसवंत सिंह और अनिरुद्ध से मिलवाया, जहां इन लोगों ने पूरा निवेश प्लान समझाया। इस पर विश्वास बढ़ने के बाद आगे चलकर होटल रेडिसन में एक बहुत बड़ा सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें शहर के करीब 200 लोग शामिल हुए थे। उस सेमिनार में लोगों को महंगे गिफ्ट और भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश करने के लिए राजी किया गया था।
साइट अपडेट का बहाना बनाकर टालमटोल करते रहे
पीड़ितों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मार्च 2025 के बाद से किसी भी निवेशक को कोई भुगतान नहीं किया गया। जब परेशान लोगों ने हरप्रीत कौर से संपर्क कर अपना पैसा मांगा तो उसने कंपनी की वेबसाइट अपडेट होने का झूठा बहाना बना दिया। उसने लोगों से कहा कि सिस्टम अपग्रेड हो रहा है और जल्द ही ऑनलाइन पेमेंट कर दिया जाएगा। अप्रैल महीने में भी आरोपियों द्वारा इसी तरह की टालमटोल की जाती रही। जब निवेशकों का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया तो आरोपियों ने झूम एप के जरिए एक ऑनलाइन मीटिंग रखी, जिसमें जसवंत और अनिरुद्ध भी जुड़े। उन्होंने मीटिंग में जल्द भुगतान का आश्वासन दिया, लेकिन उसके बाद भी किसी को रकम नहीं मिली।
रुपए मांगने पर दी धमकी
जब निवेशकों ने लगातार अपने पैसे वापस मांगने के लिए दबाव बनाना शुरू किया तो आरोपियों ने अपने असली तेवर दिखाए और साफ कह दिया कि कंपनी पूरी तरह डूब चुकी है और अब किसी को भी कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा। इसके बाद सभी आरोपियों ने अपने फोन बंद कर दिए और संपर्क पूरी तरह काट लिया। थक-हारकर सभी पीड़ितों ने इंदौर क्राइम ब्रांच में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी हरप्रीत कौर को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। क्राइम ब्रांच अब इन आरोपियों के बैंक खातों, लेन-देन के रिकॉर्ड और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों की भी गहराई से जांच कर रही है।

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