{"_id":"6a2f811ef3f3670a62054780","slug":"indore-news-davv-artificial-intelligence-mandatory-in-courses-2026-06-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore News: AI सीखे बिना नहीं मिलेगी डिग्री, DAVV में बड़ा बदलाव, हर कोर्स में जुड़ेगी तकनीकी शिक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore News: AI सीखे बिना नहीं मिलेगी डिग्री, DAVV में बड़ा बदलाव, हर कोर्स में जुड़ेगी तकनीकी शिक्षा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 16 Jun 2026 08:36 AM IST
विज्ञापन
सार
कुलपति प्रो. राकेश सिंघई के अनुसार छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए साइंस, कॉमर्स और मैनेजमेंट समेत सभी विषयों में एआई टूल्स और डेटा एनालिसिस सिखाया जाएगा।
डीएवीवी तक्षशिला परिसर।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ इंजीनियरिंग या आईटी के क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी ने इस दिशा में एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अपने सभी 34 टीचिंग विभागों के अंतर्गत संचालित होने वाले 100 से ज्यादा डिग्री कोर्स में एआई को एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने जा रही है। इसके साथ ही इस बड़े बदलाव का दायरा सिर्फ मुख्य कैंपस तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूनिवर्सिटी से संबद्ध 140 से ज्यादा कॉलेजों में संचालित होने वाले 50 से अधिक स्पेशलाइजेशन कोर्स में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित विशेष मॉड्यूल जोड़े जाएंगे।
सिर्फ किताबी नहीं प्रैक्टिकल नॉलेज पर भी फोकस
कुलपति प्रो. राकेश सिंघई ने इस संबंध में अमर उजाला से बातचीत करते हुए बताया कि भविष्य की बढ़ती जरूरतों और वैश्विक स्तर पर आ रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए यह सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि हमारे स्टूडेंट्स को सिर्फ किताबी नहीं बल्कि पूरी तरह से प्रैक्टिकल नॉलेज भी मिल सके। इसके तहत साइंस, इंजीनियरिंग, कॉमर्स और मैनेजमेंट सहित विभिन्न संकायों के छात्रों को एआई टूल्स, डेटा एनालिसिस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
इन प्रमुख कोर्स पर होने जा रहा है सीधा असर
यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा तैयार की गई इस नई योजना का सीधा असर मुख्य रूप से कई तरह के पोस्ट ग्रेजुएट और अंडर ग्रेजुएट स्तर के पाठ्यक्रमों पर देखने को मिलेगा। इसके अंतर्गत यूनिवर्सिटी के प्रमुख पीजी प्रोग्राम जैसे एमबीए, फाइनेंस, मार्केटिंग, बिजनेस इकोनॉमिक्स, ई-कॉमर्स, फॉरेन ट्रेड, एचआर, टूरिज्म और इंटरप्रेन्योरशिप में इसे पूरी तरह अनिवार्य किया जाएगा। इसके साथ ही साथ यूजी स्तर के सभी लोकप्रिय कोर्स जैसे बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीए ऑनर्स, बीए एलएलबी, बीएसडब्ल्यू और बीफार्मा जैसे महत्वपूर्ण विषयों के पाठ्यक्रम में भी एआई आधारित पढ़ाई को विशेष तौर पर शामिल किया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों के छात्र भी तकनीकी रूप से मजबूत बन सकें।
विज्ञापन
सीए और सीएस की पढ़ाई में डेटा और एआई की समझ होगी बेहद जरूरी
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की सर्वोच्च राष्ट्रीय संस्था आईसीएआई भी कॉर्पोरेट जगत की बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए अपने मौजूदा पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की पूरी तैयारी कर रही है। वरिष्ठ सीए आनंद जैन के मुताबिक आने वाले समय में वित्तीय क्षेत्र में एआई, डेटा एनालिटिक्स, सस्टेनेबिलिटी और ईएसजी जैसे आधुनिक विषयों पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाएगा। इसी तरह आईसीएसआई ने भी कंपनी सेक्रेटरी के पूरे पाठ्यक्रम और वर्तमान परीक्षा ढांचे में व्यापक बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। अब डिजिटल गवर्नेस, टेक्नोलॉजी आधारित कंप्लायंस, डेटा मैनेजमेंट और नई तकनीकों की गहरी समझ को पाठ्यक्रम में अधिक महत्व दिया जा रहा है। आने वाले साल में सीएस प्रोफेशनल्स को मुख्य रूप से एआई आधारित एडवांस टूल्स, ऑटोमेटेड कंप्लायंस सिस्टम और डिजिटल रिपोर्टिंग के साथ ही काम करना होगा। इसी वजह से एआई टूल्स से असल में कैसे काम करना है, इस व्यावहारिक प्रक्रिया को भी अब कोर्स का हिस्सा बनाया जा रहा है।
सिर्फ किताबी नहीं प्रैक्टिकल नॉलेज पर भी फोकस
कुलपति प्रो. राकेश सिंघई ने इस संबंध में अमर उजाला से बातचीत करते हुए बताया कि भविष्य की बढ़ती जरूरतों और वैश्विक स्तर पर आ रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए यह सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि हमारे स्टूडेंट्स को सिर्फ किताबी नहीं बल्कि पूरी तरह से प्रैक्टिकल नॉलेज भी मिल सके। इसके तहत साइंस, इंजीनियरिंग, कॉमर्स और मैनेजमेंट सहित विभिन्न संकायों के छात्रों को एआई टूल्स, डेटा एनालिसिस और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
इन प्रमुख कोर्स पर होने जा रहा है सीधा असर
यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा तैयार की गई इस नई योजना का सीधा असर मुख्य रूप से कई तरह के पोस्ट ग्रेजुएट और अंडर ग्रेजुएट स्तर के पाठ्यक्रमों पर देखने को मिलेगा। इसके अंतर्गत यूनिवर्सिटी के प्रमुख पीजी प्रोग्राम जैसे एमबीए, फाइनेंस, मार्केटिंग, बिजनेस इकोनॉमिक्स, ई-कॉमर्स, फॉरेन ट्रेड, एचआर, टूरिज्म और इंटरप्रेन्योरशिप में इसे पूरी तरह अनिवार्य किया जाएगा। इसके साथ ही साथ यूजी स्तर के सभी लोकप्रिय कोर्स जैसे बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीए ऑनर्स, बीए एलएलबी, बीएसडब्ल्यू और बीफार्मा जैसे महत्वपूर्ण विषयों के पाठ्यक्रम में भी एआई आधारित पढ़ाई को विशेष तौर पर शामिल किया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों के छात्र भी तकनीकी रूप से मजबूत बन सकें।
सीए और सीएस की पढ़ाई में डेटा और एआई की समझ होगी बेहद जरूरी
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की सर्वोच्च राष्ट्रीय संस्था आईसीएआई भी कॉर्पोरेट जगत की बदलती आवश्यकताओं को देखते हुए अपने मौजूदा पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की पूरी तैयारी कर रही है। वरिष्ठ सीए आनंद जैन के मुताबिक आने वाले समय में वित्तीय क्षेत्र में एआई, डेटा एनालिटिक्स, सस्टेनेबिलिटी और ईएसजी जैसे आधुनिक विषयों पर बहुत ज्यादा जोर दिया जाएगा। इसी तरह आईसीएसआई ने भी कंपनी सेक्रेटरी के पूरे पाठ्यक्रम और वर्तमान परीक्षा ढांचे में व्यापक बदलाव करने शुरू कर दिए हैं। अब डिजिटल गवर्नेस, टेक्नोलॉजी आधारित कंप्लायंस, डेटा मैनेजमेंट और नई तकनीकों की गहरी समझ को पाठ्यक्रम में अधिक महत्व दिया जा रहा है। आने वाले साल में सीएस प्रोफेशनल्स को मुख्य रूप से एआई आधारित एडवांस टूल्स, ऑटोमेटेड कंप्लायंस सिस्टम और डिजिटल रिपोर्टिंग के साथ ही काम करना होगा। इसी वजह से एआई टूल्स से असल में कैसे काम करना है, इस व्यावहारिक प्रक्रिया को भी अब कोर्स का हिस्सा बनाया जा रहा है।

कमेंट
कमेंट X