Indore News: मेडिकल काॅलेज के पूर्व फार्मसिस्ट के घर ईओडब्ल्यू का छापा, आय से 110 प्रतिशत ज्याद संपत्ति मिली
आय से अधिक संपत्ति के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने मेडिकल विभाग के पूर्व कर्मचारी राकेश गोरखे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदौर में उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में उनकी वैध आय से करीब 110 प्रतिशत अधिक संपत्ति का पता चला है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इंदौर में बुधवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में मेडिकल विभाग के पूर्व कर्मचारी राकेश गोरखे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
शुरुआती जांच में गोरखे के पास उनकी ज्ञात वैध आय से करीब 110 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने की बात सामने आई है। कार्रवाई के दौरान करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियों, बैंक रिकॉर्ड और निवेश से जुड़े अहम दस्तावेज मिलने की जानकारी भी सामने आई है। घर पर मिले दस्तावेजों की अफसर जांच कर रहे हैं।
बुधवार सुबह ईओडब्ल्यू की टीम ने गोरखे के अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। जांच में वृंदावन गार्डन स्थित तीन मंजिला मकान के अलावा संघवी रेसिडेंसी, सद्गुरु कॉलोनी, बड़िया कीमा, साकार सिटी, साहिल रेसिडेंसी और ओमेक्स सिटी में उनके व परिजनों के नाम पर संपत्तियों की जानकारी मिली। इन संपत्तियों की खरीद, स्वामित्व और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से अफसर जांच कर रहे हैं।
ईओडब्ल्यू की टीम बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों, नकदी और अन्य वित्तीय लेन-देन का मिलान कर रही है। जांच के बाद सभी संपत्तियों का वास्तविक बाजार मूल्य भी आंका जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं संपत्तियां बेनामी नामों से तो नहीं खरीदी गई हैं।
राकेश गोरखे पहले एमजीएम मेडिकल कॉलेज में फार्मासिस्ट के पद पर पदस्थ रहे हैं। कॉलेज परिसर में डीन के रीडर भावेश के साथ हुए विवाद और मारपीट के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला काफी चर्चा में रहा। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें निलंबित कर शासकीय मनोरोग अस्पताल, बाणगंगा में अटैच किया था। शिकायतों की जांच के लिए गठित समिति ने आरोपों को सही पाया, जिसके आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। अब आय से अधिक संपत्ति के मामले में ईओडब्ल्यू ने उन पर शिकंजा कसा है।
