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Indore News: रेलवे, बैंक कर्मचारी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर चला रहे थे आईपीएल सट्टा, करोड़ों का लेनदेन मिला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Wed, 27 May 2026 06:19 PM IST
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सार
इंदौर क्राइम ब्रांच ने आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टा खिलाने वाले एक हाईप्रोफाइल गिरोह का भंडाफोड़ किया है। आरोपी टेलीग्राम ग्रुप और एक वेबसाइट के जरिए करीब दो करोड़ रुपए का सट्टेबाजी नेटवर्क चला रहे थे।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर में आईपीएल क्रिकेट मैच पर ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। क्राइम ब्रांच की टीम ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कुल आठ आरोपियों को अपनी गिरफ्त में लिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि पकड़े गए आरोपियों में उच्च शिक्षित सॉफ्टवेयर इंजीनियर, रेलवे और बैंक के कर्मचारी सहित निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करने वाले युवक शामिल हैं। यह गिरोह पिछले करीब एक महीने से शहर के एक किराए के फ्लैट को अपना ठिकाना बनाकर मोबाइल आईडी के माध्यम से सट्टेबाजी का अवैध कारोबार चला रहा था।
ओडिशा और जबलपुर के रहने वाले हैं आठों युवक
इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया कि क्राइम ब्रांच को मंगलवार रात एक पुख्ता सूचना मिली थी। सूचना में कहा गया था कि बेंगलुरु और गुजरात के बीच खेले जा रहे आईपीएल मैच पर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टा खिलाया जा रहा है। इस इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। मौके से पुलिस ने ओडिशा और जबलपुर के रहने वाले आठ युवकों को रंगे हाथों सट्टा बुक करते हुए दबोच लिया।
कोई बैंक में तो कोई रेलवे में कार्यरत
पुलिस प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह का मुख्य सूत्रधार कुणाल दास नाम का युवक है। कुणाल पूर्व में कई जानी-मानी ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे चुका है। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में शशांक नेगी भी शामिल है, जो वर्तमान में गुरुग्राम की एक बड़ी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। इसके अलावा रामा स्वामी, अविनाश ठाकुर, चिन्मय, राजेंद्र दास, आनंद प्रधान और विकास को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन आरोपियों में कोई रेलवे का कर्मचारी है, कोई बैंक कर्मी है, तो कोई जियो कंपनी का कर्मचारी, छात्र और निजी कंपनी का सुपरवाइजर है।
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टेलीग्राम ग्रुप से तैयार किया सट्टेबाजी का जाल
डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक मास्टरमाइंड कुणाल दास ने इस अवैध नेटवर्क को खड़ा करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया था। उसने सभी आरोपियों को सबसे पहले एक टेलीग्राम ग्रुप के जरिए आपस में जोड़ा। इसके बाद ग्रुप में लगातार चैटिंग और बातचीत के माध्यम से आईपीएल सट्टे का पूरा नेटवर्क तैयार किया गया। यह आरोपी प्रीमियम नाम की एक सट्टेबाजी वेबसाइट से लिंक हासिल करते थे और फिर अन्य लोगों के लिए मोबाइल आईडी जनरेट कर उन्हें सट्टा खेलने की सुविधा उपलब्ध कराते थे।
करोड़ों के लेनदेन का खुलासा
पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं। क्राइम ब्रांच की टीम ने मौके से 23 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, नकद राशि और सट्टे के हिसाब-किताब से जुड़े कई रजिस्टर जब्त किए हैं। इन रजिस्टरों की शुरुआती जांच से पता चला है कि इस गिरोह द्वारा करीब दो करोड़ रुपए का अवैध वित्तीय लेनदेन किया जा चुका है। फिलहाल क्राइम ब्रांच की टीम पकड़े गए सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और मुख्य नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
ओडिशा और जबलपुर के रहने वाले हैं आठों युवक
इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने बताया कि क्राइम ब्रांच को मंगलवार रात एक पुख्ता सूचना मिली थी। सूचना में कहा गया था कि बेंगलुरु और गुजरात के बीच खेले जा रहे आईपीएल मैच पर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टा खिलाया जा रहा है। इस इनपुट के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। मौके से पुलिस ने ओडिशा और जबलपुर के रहने वाले आठ युवकों को रंगे हाथों सट्टा बुक करते हुए दबोच लिया।
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कोई बैंक में तो कोई रेलवे में कार्यरत
पुलिस प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह का मुख्य सूत्रधार कुणाल दास नाम का युवक है। कुणाल पूर्व में कई जानी-मानी ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों में अपनी सेवाएं दे चुका है। उसके साथ गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में शशांक नेगी भी शामिल है, जो वर्तमान में गुरुग्राम की एक बड़ी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। इसके अलावा रामा स्वामी, अविनाश ठाकुर, चिन्मय, राजेंद्र दास, आनंद प्रधान और विकास को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। इन आरोपियों में कोई रेलवे का कर्मचारी है, कोई बैंक कर्मी है, तो कोई जियो कंपनी का कर्मचारी, छात्र और निजी कंपनी का सुपरवाइजर है।
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डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक मास्टरमाइंड कुणाल दास ने इस अवैध नेटवर्क को खड़ा करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया था। उसने सभी आरोपियों को सबसे पहले एक टेलीग्राम ग्रुप के जरिए आपस में जोड़ा। इसके बाद ग्रुप में लगातार चैटिंग और बातचीत के माध्यम से आईपीएल सट्टे का पूरा नेटवर्क तैयार किया गया। यह आरोपी प्रीमियम नाम की एक सट्टेबाजी वेबसाइट से लिंक हासिल करते थे और फिर अन्य लोगों के लिए मोबाइल आईडी जनरेट कर उन्हें सट्टा खेलने की सुविधा उपलब्ध कराते थे।
करोड़ों के लेनदेन का खुलासा
पुलिस ने इस छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण और दस्तावेज बरामद किए हैं। क्राइम ब्रांच की टीम ने मौके से 23 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, नकद राशि और सट्टे के हिसाब-किताब से जुड़े कई रजिस्टर जब्त किए हैं। इन रजिस्टरों की शुरुआती जांच से पता चला है कि इस गिरोह द्वारा करीब दो करोड़ रुपए का अवैध वित्तीय लेनदेन किया जा चुका है। फिलहाल क्राइम ब्रांच की टीम पकड़े गए सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और मुख्य नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

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