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Indore News: किसानों को मानसून की वापसी का इंतजार, खरीफ फसलों के 93 प्रतिशत क्षेत्र में सोयाबीन की हुई बुवाई
Sat, 18 Jul 2026 06:10 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sat, 18 Jul 2026 06:10 AM IST
सार
इंदौर जिले में चालू खरीफ सीजन के दौरान रिकॉर्ड 2,52,150 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बोनी पूरी हो चुकी है, जिसमें से अकेले 93 प्रतिशत यानी 2,33,700 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई की गई है।
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सोयाबीन।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर जिले में इस वर्ष खरीफ सीजन के दौरान कृषि क्षेत्र में व्यापक स्तर पर बोनी का कार्य हुआ है। पिछले 10 दिनों से बारिश नहीं हुई है लेकिन जल्द ही मानसून के मेहरबान होने की संभावना बनी हुई है। इस बीच कृषि विभाग ने कहा है कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में कुल 2,52,150 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न खरीफ फसलों की बोनी की गई है।
इस कुल रकबे में से सर्वाधिक 2,33,700 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल सोयाबीन की खेती की गई है, जो कुल बोनी क्षेत्र का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्तमान में जिले के भीतर खरीफ फसलों की स्थिति पूरी तरह से संतोषजनक और काफी अच्छी है। क्षेत्र के किसान इन दिनों अपनी फसलों में खरपतवार नियंत्रण तथा खेतों में नमी संरक्षण के लिए डोरा चलाने सहित अन्य आवश्यक अंतरवर्ती कृषि कार्यों में व्यस्त हैं।
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पिछले साल के मुकाबले जिले में हुई दोगुनी बारिश
मौसम के रुख ने इस बार किसानों का भरपूर साथ दिया है। इंदौर जिले में इस वर्ष 17 जुलाई 2026 तक कुल 13.9 इंच वर्षा दर्ज की जा चुकी है। इसके विपरीत, अगर पिछले वर्ष की समान अवधि की बात की जाए तो उस समय तक जिले में केवल 7.2 इंच औसत वर्षा ही दर्ज हुई थी। इस प्रकार, बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष जिले में लगभग दोगुनी वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे खरीफ की फसलों के विकास को पर्याप्त मात्रा में पानी मिला है और फसलों को इसका सीधा लाभ पहुंच रहा है। हालांकि पिछले 10 दिन से बारिश नहीं हुई है और अब किसान मानसून की वापसी का इंतजार कर रहा है।
ई-विकास प्रणाली से खाद का वितरण और पर्याप्त स्टॉक
कृषि विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिले के कृषकों को पारदर्शी ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरकों का वितरण निरंतर और बिना किसी बाधा के किया जा रहा है। खरीफ फसलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसानों द्वारा अब तक कुल 34,737 ई-टोकन के माध्यम से 19,873 मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव सोसायटियों और केंद्रों से किया जा चुका है। इसके साथ ही, जिले के दूरदर्शी किसान आगामी रबी सीजन की अग्रिम तैयारी के लिए भी अभी से उर्वरकों का भंडारण करने में लगे हैं।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में इंदौर जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है। उपलब्ध सरकारी और सहकारी भंडार में यूरिया 6,475 मीट्रिक टन, डीएपी 406 मीट्रिक टन, एनपीके 2,697 मीट्रिक टन, एसएसपी 4,699 मीट्रिक टन तथा पोटाश (एमओपी) 662 मीट्रिक टन शामिल है। इस तरह वर्तमान समय में जिले में कुल 14,940 मीट्रिक टन उर्वरक का मजबूत स्टॉक किसानों के लिए हर समय उपलब्ध है।
कृषि विभाग ने किसानों के लिए जारी की जरूरी सलाह
बदलते मौसम को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा जिले के तमाम किसानों को विशेष तकनीकी सलाह दी गई है। किसानों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी फसलों में समय-समय पर निंदाई-गुड़ाई करने के साथ ही डोरा चलाने सहित अन्य अंतरवर्ती कृषि क्रियाएं अनिवार्य रूप से पूरी करें। ऐसा करने से न केवल खेतों में उगने वाले खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, बल्कि यदि आने वाले दिनों में वर्षा में लंबा अंतराल आता है, तो खेतों में प्राकृतिक नमी का संरक्षण हो सकेगा और पौधों को उनकी वृद्धि के लिए आवश्यक जल मिलता रहेगा।
इसके साथ ही, कृषि विभाग ने यह भी कहा है कि जिन क्षेत्रों की हल्की पथरीली या कम गहराई वाली भूमि में फसलें पानी की कमी से मुरझाने लगी हैं, वहां के किसान मिनी स्प्रिंकलर यानी फव्वारा पद्धति के माध्यम से फसलों को हल्की जीवन रक्षक सिंचाई प्रदान करें। यदि किसी भी क्षेत्र में फसलों पर किसी प्रकार के हानिकारक कीट अथवा अज्ञात रोग का प्रकोप दिखाई देता है, तो किसान बिना किसी देरी के तत्काल अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा विकासखंड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से संपर्क स्थापित करें। वहां से आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार ही उचित कीटनाशक और रोग नियंत्रण के उपाय अपनाएं ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
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इस कुल रकबे में से सर्वाधिक 2,33,700 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल सोयाबीन की खेती की गई है, जो कुल बोनी क्षेत्र का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्तमान में जिले के भीतर खरीफ फसलों की स्थिति पूरी तरह से संतोषजनक और काफी अच्छी है। क्षेत्र के किसान इन दिनों अपनी फसलों में खरपतवार नियंत्रण तथा खेतों में नमी संरक्षण के लिए डोरा चलाने सहित अन्य आवश्यक अंतरवर्ती कृषि कार्यों में व्यस्त हैं।
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मौसम के रुख ने इस बार किसानों का भरपूर साथ दिया है। इंदौर जिले में इस वर्ष 17 जुलाई 2026 तक कुल 13.9 इंच वर्षा दर्ज की जा चुकी है। इसके विपरीत, अगर पिछले वर्ष की समान अवधि की बात की जाए तो उस समय तक जिले में केवल 7.2 इंच औसत वर्षा ही दर्ज हुई थी। इस प्रकार, बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष जिले में लगभग दोगुनी वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे खरीफ की फसलों के विकास को पर्याप्त मात्रा में पानी मिला है और फसलों को इसका सीधा लाभ पहुंच रहा है। हालांकि पिछले 10 दिन से बारिश नहीं हुई है और अब किसान मानसून की वापसी का इंतजार कर रहा है।
ई-विकास प्रणाली से खाद का वितरण और पर्याप्त स्टॉक
कृषि विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जिले के कृषकों को पारदर्शी ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरकों का वितरण निरंतर और बिना किसी बाधा के किया जा रहा है। खरीफ फसलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसानों द्वारा अब तक कुल 34,737 ई-टोकन के माध्यम से 19,873 मीट्रिक टन उर्वरक का उठाव सोसायटियों और केंद्रों से किया जा चुका है। इसके साथ ही, जिले के दूरदर्शी किसान आगामी रबी सीजन की अग्रिम तैयारी के लिए भी अभी से उर्वरकों का भंडारण करने में लगे हैं।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में इंदौर जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है। उपलब्ध सरकारी और सहकारी भंडार में यूरिया 6,475 मीट्रिक टन, डीएपी 406 मीट्रिक टन, एनपीके 2,697 मीट्रिक टन, एसएसपी 4,699 मीट्रिक टन तथा पोटाश (एमओपी) 662 मीट्रिक टन शामिल है। इस तरह वर्तमान समय में जिले में कुल 14,940 मीट्रिक टन उर्वरक का मजबूत स्टॉक किसानों के लिए हर समय उपलब्ध है।
कृषि विभाग ने किसानों के लिए जारी की जरूरी सलाह
बदलते मौसम को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा जिले के तमाम किसानों को विशेष तकनीकी सलाह दी गई है। किसानों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी फसलों में समय-समय पर निंदाई-गुड़ाई करने के साथ ही डोरा चलाने सहित अन्य अंतरवर्ती कृषि क्रियाएं अनिवार्य रूप से पूरी करें। ऐसा करने से न केवल खेतों में उगने वाले खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, बल्कि यदि आने वाले दिनों में वर्षा में लंबा अंतराल आता है, तो खेतों में प्राकृतिक नमी का संरक्षण हो सकेगा और पौधों को उनकी वृद्धि के लिए आवश्यक जल मिलता रहेगा।
इसके साथ ही, कृषि विभाग ने यह भी कहा है कि जिन क्षेत्रों की हल्की पथरीली या कम गहराई वाली भूमि में फसलें पानी की कमी से मुरझाने लगी हैं, वहां के किसान मिनी स्प्रिंकलर यानी फव्वारा पद्धति के माध्यम से फसलों को हल्की जीवन रक्षक सिंचाई प्रदान करें। यदि किसी भी क्षेत्र में फसलों पर किसी प्रकार के हानिकारक कीट अथवा अज्ञात रोग का प्रकोप दिखाई देता है, तो किसान बिना किसी देरी के तत्काल अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा विकासखंड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय से संपर्क स्थापित करें। वहां से आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार ही उचित कीटनाशक और रोग नियंत्रण के उपाय अपनाएं ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
